Tata Group Rift: टाटा ग्रुप मतभेद में सरकार की एंट्री! चंद्रशेखरन और नोएल टाटा ने की अलग-अलग मुलाकात

यह बातचीत एन चंद्रशेखरन द्वारा फरवरी में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के फैसले से पहले की बताई जा रही है. नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद थे, और पिछले कुछ वर्षों से गतिरोध बढ़ रहा था.

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टाटा ग्रुप विवाद में सरकार की हस्तक्षेप की खबर. (Photo: ITG) टाटा ग्रुप विवाद में सरकार की हस्तक्षेप की खबर. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

टाटा संस के चेयरमैन पद से एन. चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दे दिया है. अब उनके और टाटा ट्रस्ट (Tata Trust) के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच विवाद को लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं. 

दरअसल, टाटा ग्रुप (Tata Group) में इन दोनों के बीच रणनीति और गवर्नेंस (शासन) को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एन. चंद्रशेखरन और नोएल टाटा ने समूह के बीच पनपे मतभेदों को लेकर केंद्र सरकार के सीनियर अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात कर स्थिति की जानकारी दी है. 

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दरअसल, यह बातचीत एन चंद्रशेखरन द्वारा फरवरी में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के फैसले से पहले की बताई जा रही है. यानी सरकार से मुलाकात की बात इस्तीफे से पहले की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद थे, और पिछले कुछ वर्षों से गतिरोध बढ़ रहा था. 

नए बिजनेस को लेकर मतभेद 
नए क्षेत्रों और परियोजनाओं को लेकर दोनों की सोच में असमानता थी. एयर इंडिया (Air India) के अधिग्रहण के बाद के प्रबंधन, नुकसान और टाटा न्यू (Tata Neu) जैसे डिजिटल और सेमीकंडक्टर वेंचर्स में हो रहे वित्तीय नुकसान को लेकर चिंताएं जताई गईं. 

यही नहीं, नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच टाटा ग्रुप के शीर्ष पदों पर की गई कुछ नियुक्तियों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के तौर-तरीकों पर असहमति थी. चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार और पुनर्नियुक्ति को लेकर बनी अनिश्चितता भी तनाव का एक बड़ा कारण था. 

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सरकार से बातचीत और इसका महत्व
आमतौर पर किसी प्राइवेट सेक्टर के कॉर्पोरेट घराने के आंतरिक विवादों में सरकार की सीधी हस्तक्षेप नहीं होती है, जब तक कि कंपनी किसी वित्तीय संकट या दिवालियापन की स्थिति में न हो. हालांकि टाटा समूह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और ग्रुप देशहित काम के लिए जाना जाता है. यही कारण है कि समूह के आंतरिक मतभेदों को देखते हुए दोनों पक्षों ने खुद पहल कर सरकार के शीर्ष अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया, और अधिकारियों ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं. 

बता दें, नोएल टाटा हाल ही में दिल्ली दौरे पर थे, जिसे उनके करीबियों ने रिटेल बिजनेस ट्रेंट से जोड़कर बताया था. नोएल टाटा 70 वर्ष की आयु सीमा के नियम के कारण नवंबर में ट्रेंट के पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

टाटा संस की संभावित आईपीओ (IPO) 
इससे पहले जून 2026 में नोएल टाटा ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों से टाटा संस के संभावित आईपीओ को लेकर भी बातचीत की थी, जिससे टाटा ट्रस्ट्स के नियंत्रण पर असर पड़ सकता है.

हालांकि चंद्रशेखरन के 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप का बाजार पूंजीकरण लगभग तीन गुना बढ़ा. लेकिन आंतरिक शासन और रणनीतिक निर्णयों को लेकर टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच यह खींचतान समूह के भविष्य के नेतृत्व और पुनर्गठन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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