मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. जिस कारण भारत में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी गैस और सीएनजी तक के दाम बढ़े हैं. हालांकि, अभी भारत में एनर्जी सप्लाई स्थिर बनी हुई है. क्योंकि मिडिल ईस्ट से तेल आयात रुकने के बाद भारत ने कई देशों से तेल की आपूर्ति पूरी की है.
भारत ने रूस से लेकर वेनुजएला और अमेरिका तक से तेल की सप्लाई पूरी की है. एनर्जी को लेकर भारत की रणनीति हमेशा से रही है कि जहां से भी देश को कीफायती तेल मिल सके, वहां से आयात को बढ़ा देना. इसी बीच, खबर है कि रूसी तेल के दाम बढ़ने के बाद भारत ने वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ा दिया है. जहां कभी रूसी तेल आयात 56 फीसदी था, अब ये घटकर 35 फीसदी रह गया है.
वेनेजुएला से बढ़ रहा तेल का आयात
ब्लूमबर्ग न्यूज ने बुधवार को बताया कि वेनेजुएला से कच्चे तेल का भारत का आयात अक्टूबर में दोगुने से अधिक होने की उम्मीद है, क्योंकि दक्षिण अमेरिकी उत्पादक देश के तेल पर भारी छूट से रिफाइनर बढ़ती लागत और रूसी आपूर्ति से संबंधित प्रतिबंधों के जोखिमों के बीच खरीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं.
केप्लर के अनुमानों के अनुसार, इस महीने भारत को वेनेजुएला से कच्चे तेल की आपूर्ति लगभग 465,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) तक पहुंचने का अनुमान है, जो सितंबर में 196,000 बीपीडी थी. अगर तय कार्गो समय पर पहुंचते हैं, तो अक्टूबर का आयात दिसंबर 2019 के बाद से सबसे अधिक होगा. हालांकि, वास्तविक मात्रा कम हो सकती है.
अक्टूबर में कितनी रही है डिलीवरी?
केप्लर के वरिष्ठ प्रबंधक सुमित रिटोलिया का अनुमान है कि अक्टूबर में औसत डिलीवरी 350,000 बैरल प्रति दिन के करीब रहेगी, क्योंकि कुछ जहाज महीने के अंत से पहले माल नहीं उतार सकते हैं. मौजूदा समय में भारत की ओर जा रहे सभी वेनेजुएला जहाजों पर गुजरात के सिक्के बंदरगाह का जिक्र है.
सिक्का बंदरगाह रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर रिफाइनरी परिसर को सेवाएं प्रदान करता है, जो विश्व का सबसे बड़ा रिफाइनिंग सेंटर है. जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, कम से कम दो टैंकर 31 अक्टूबर को भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाले हैं.
प्रतिबंधों में ढील के बाद भारत ने बढ़ाया तेल आयात
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के कच्चे तेल के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद, भारत ने लगभग एक साल के अंतराल के बाद फरवरी में वेनेजुएला से तेल का आयात फिर से शुरू किया. भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता का फिर से वैल्यूएशन कर रही हैं.
रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, लेकिन केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत के आयात में रूस की हिस्सेदारी 56% से घटकर सितंबर में लगभग 35% रह गई. रूसी यूराल्स कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, बाल्टिक सागर से आने वाले कच्चे तेल की कीमतें यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिबंधों और दंडात्मक शुल्कों के खतरे के मद्देनजर भारतीय रिफाइनर रूसी खरीद को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क