देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर चलने के लिए तैयार हो रही है. यह 508 किलोमीटर लंबा ट्रैक भारत में यात्रा के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा और लोगों के सफर को बहुत तेज और आरामदायक बना देगा.
दरअसल, रास्ते में बन रहे ये 14 बिजली सब-स्टेशन यह तय करेंगे कि ट्रेन हमेशा सुरक्षित और पूरी रफ्तार से अपनी मंजिल तक पहुंचे. यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में देश के अन्य शहरों में बनने वाली तेज ट्रेनों के लिए भी एक बेहतर उदाहरण बनेगा.
300 किलोमीटर प्रति घंटे से भी तेज चलने वाली बुलेट ट्रेन को चलाने के लिए लगातार बिजली की जरूरत होती है. इसलिए ट्रेन को बिना रुके सही तरीके से चलाने के लिए पूरे रूट पर 14 बिजली सब-स्टेशन (TSS) बनाए जा रहे हैं. ये सब-स्टेशन इस पूरी व्यवस्था की सबसे मुख्य कड़ी हैं.
बिजली सब-स्टेशन (TSS) कैसे काम करते हैं?
ये सब-स्टेशन ट्रेन को बिजली देने वाले मुख्य केंद्र हैं. इनका काम बहुत आसान लेकिन बेहद जरूरी है. राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से मिलने वाली हाई-वोल्टेज बिजली को ये सब-स्टेशन उस स्तर पर लाते हैं, जिससे बुलेट ट्रेन सुरक्षित रूप से चल सके.
बुलेट ट्रेन के लिए बिजली का एक सेकंड के लिए भी जाना नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए इन सब-स्टेशनों को इस तरह बनाया गया है कि अगर एक सिस्टम में दिक्कत आए, तो दूसरा तुरंत चालू हो जाए.
पूरे रास्ते में बराबर पावर बांटना
बता दें, 508 किलोमीटर के रास्ते पर 14 सब-स्टेशन थोड़े-थोड़े फासले पर बनाए गए हैं. इससे पूरी लाइन पर बिजली का दबाव बराबर रहता है और ट्रेन को हर जगह एक जैसी ताकत मिलती है. यही नहीं, इन सब-स्टेशनों के बनने से देश के इंजीनियरों और मजदूरों को आधुनिक तकनीक सीखने का मौका मिल रहा है. (Photo: AFP)
सुरक्षा के आधुनिक इंतजाम
इन सब-स्टेशनों में आधुनिक ऑटोमैटिक स्विच और ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं, जो किसी भी तकनीकी गड़बड़ी को तुरंत रोक लेते हैं. यह पूरी ट्रेन बिजली से चलेगी. इससे डीजल और पेट्रोल का इस्तेमाल कम होगा और हवा साफ रखने में मदद मिलेगी. (Photo: PTI)