यूरोप से लौटे तेजस्वी यादव, दो दिन में बांकीपुर की सियासत कितना गरमाई

बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का प्रचार मंगलवार को थम जाएगा. आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता की जीत की इबारत लिखने के लिए तेजस्वी यादव बांकीपुर सीट की कमान संभाल ली है. दो दिन रोड-शो और संवाद करके सियासी माहौल बनाने की कवायद करेंगे, लेकिन कितना गेम बदल पाएंगे?

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रेखा गुप्ता को जिताने का बांकीपुर में तेजस्वी यादव का प्लान (Photo-ITG) रेखा गुप्ता को जिताने का बांकीपुर में तेजस्वी यादव का प्लान (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

बिहार की सियासत में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है. पटना का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव प्रचार में पिछड़ रही आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता के पक्ष में सियासी माहौल बनाने की कवायद तेज हो गई है.यूरोप की ठंडी हवाओं से लौटे आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बांकीपुर उपचुनाव की कमान संभाल ली है. 

पटना जिले की बांकीपुर विधानसभा सीट को पारंपरिक रूप से बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ यानी एक 'सेफ सीट' माना जाता रहा है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा तो जनसुराज पार्टी से प्रशांत किशोर किस्मत आजमा रहे हैं. नीरज और पीके के बीच सिमटते हुए उपचुनाव को त्रिकोणीय बनाने के लिए तेजस्वी ने पूरी ताकत झोंक दी है. 

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बांकीपुर चुनाव प्रचार के आखिरी दो दिन ही बचे हैं. तेजस्वी यादव यह अचानक और आक्रामक तरीके से उतरना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है, सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ 48 घंटे के इस तूफानी प्रचार से तेजस्वी कोई बड़ा सियासी गुल खिला पाएंगे या यह सिर्फ एक रस्म अदायगी साबित होगी?

बांकीपुर के रण में तेजस्वी यादव की एंट्री
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रचार के अंतिम दो दिन में  आरजेडी प्रत्याशी रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता को जिताने के लिए तेजस्वी यादव उतर गए हैं.  रोड शो के जरिए तेजस्वी यादव बांकीपुर के लोगों से सीधे संवाद और महागठबंधन प्रत्याशी को जिताने के लिए उतरे. दोपहर एक बजे वो मीठापुर स्थित से अपने चुनावी अभियान का आगाज. इसके बाद चांदपुर बेला, सिपारा, विग्रहपुर, पोस्टल पार्क, चिरैयाटांड़ पुल, गोरियाटोली, लालजी टोला, पीरमुहानी, उमा सिनेमा, आयुर्वेदिक कालेज, लोहानीपुर, साहित्य सम्मेलन, दरियापुर, खेतान मार्केट व बिरला मंदिर होते हुए शाम छह बजे सब्जीबाग चौराहे तक रोड शो करेंगे.

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मंगलवार को सुबह 10.30 बजे तेजस्वी यादव रोड शो पुराना हड़ताली मोड़, पहलवान मार्केट और बोरिंग रोड से शुरू होगा. इसके बाद बोरिंग रोड चौराहा, राजापुर पुल, दुजरा मस्जिद, पुलिस लाइन चौराहा, लोदीपुर मेन रोड, चीना कोठी, उत्तरी मंदिर, इनकम टैक्स गोलंबर और किदवईपुरी होते हुए दोपहर तीन बजे चकरम देवी मंदिर के पास समापन होगा.

तेजस्वी याद दो दिन में क्या गुल खिलाएंगे
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में शहरी मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग लंबे समय से बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहा है. ऐसे में जब चुनाव प्रचार के मुट्ठीभर घंटे ही बाकी हों, तब तेजस्वी यादव का मैदान में उतरना महज एक सीट जीतने की कोशिश भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति छिपी है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव इस कम समय में शहरी और युवा मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को साधने की जुगत में हैं. Gen-Z और युवा वर्ग के बीच बेरोजगारी, परीक्षा व्यवस्था और स्थानीय विकास के मुद्दों को लेकर जो सुगबुगाहट है, तेजस्वी उसी स्पेस को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं. इस तरह दो दिन के इस छोटे से अंतराल में वे बड़ी रैलियों के बजाय नुक्कड़ सभाओं, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ क्लोज-डोर बैठकों और सीधे संवाद पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, ताकि सीधा संदेश जनता तक पहुंच सके.

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बांकीपुर में आरजेडी की राह कितनी मुश्किल
बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव आरजेडी के लिए काफी मुश्किल भरा दिख रहा है. आरजेडी यह सीट कभी भी जीत नहीं सकी है. 1996 से बीजेपी का कब्जा है. इस बार बीजेपी से नीरज सिन्हा मैदान में है तो जन सुराज पार्टी से प्रशांत किशोर ने ताल ठोक रखी है. पीके ने अपनी पूरी ताकत बांकीपुर सीट पर लगा दिया है. इसके चलते बीजेपी और पीके के बीच पूरा उपचुनाव सिमटता दिख रहा है. ऐसे में आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता के समर्थन में उतरकर तेजस्वी उपचुनाव को त्रिकोणीय बनाना चाहते हैं. 

हालांकि, चुनौती बेहद कड़ी है, इतने कम समय में दशकों से जमे हुए राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह पलट देना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होता, सत्तारूढ़ दल का मजबूत सांगठनिक ढांचा और शहरी मतदाताओं की रूढ़िवादी पसंद इस किले को भेदना कठिन बना देती है. ऐसे में तेजस्वी का यह दांव विपक्ष के खेमे में ऊर्जा भरने का काम जरूर कर रहा है.

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि यूरोप से लौटने के बाद तेजस्वी का यह 'दो दिवसीय इमरजेंसी प्लान' बांकीपुर के चुनावी गणित में कोई ऐतिहासिक उलटफेर कर पाता है या यह सिर्फ एक मजबूत विपक्ष की सांकेतिक मौजूदगी बनकर रह जाता है. परिणाम चाहे जो भी हों, इसने चुनावी माहौल को बेहद रोमांचक जरूर बना दिया है.

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