डेढ़ साल की बच्ची से दुष्कर्म, 6.5 महीने में आरोपी को अंतिम सांस तक जेल की सजा, सहरसा कोर्ट का बड़ा फैसला

सहरसा के सौरबाजार में डेढ़ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी राज कुमार शर्मा को अंतिम सांस तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई. 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. 26 फरवरी को केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने एसआईटी बनाकर वैज्ञानिक जांच और डीएनए परीक्षण कराया. 14 मई को चार्जशीट दाखिल हुई और 3 सितंबर को फैसला आया.

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बच्ची से रेप के आरोपी को उम्रकैद की सजा. (Photo: Representational) बच्ची से रेप के आरोपी को उम्रकैद की सजा. (Photo: Representational)

धीरज कुमार सिंह

  • सहरसा ,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

कहते हैं न्यायालय फैसला करने में देर कर सकता है, लेकिन करता जरूर है. सहरसा की अदालत ने डेढ़ साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को अंतिम सांस तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी राज कुमार शर्मा पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इस मामले में पुलिस की कार्रवाई से लेकर अदालत के फैसले तक की प्रक्रिया करीब साढ़े छह महीने में पूरी हुई. फरवरी महीने में डेढ़ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी. घटना के बाद बच्ची रोते-बिलखते और लहूलुहान हालत में मिली. बच्ची की हालत देखकर परिजन परेशान हो गए. उन्होंने आरोपी के घर पहुंचकर शिकायत की, लेकिन वहां से उन्हें न्याय नहीं मिला.

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इसके बाद परिवार वालों ने बिना देर किए पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. मामला गंभीर होने के कारण थानेदार ने इसकी सूचना जिले के पुलिस कप्तान को दी. जानकारी मिलते ही तत्कालीन एसपी हिमांशु घटनास्थल पर पहुंचे और मामले का जायजा लिया. उन्होंने परिजनों से मुलाकात की और आरोपी के खिलाफ जल्द और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी हिमांशु ने घटनास्थल से ही विशेष टीम गठित करने का फैसला लिया. उन्होंने स्पेशल टास्क फोर्स और एसआईटी का गठन किया. साथ ही एफएसएल की टीम को भी तुरंत बुलाया गया, ताकि घटनास्थल से वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए जा सकें.

डीएनए जांच के साथ पुलिस ने जुटाए मामले से जुड़े साक्ष्य

इसके बाद विशेष टीम में शामिल पुलिस अधिकारियों ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी. पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. इसके साथ ही मामले से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने का काम शुरू किया गया. पुलिस ने इस मामले की जांच में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया. अनुसंधान के दौरान डीएनए जांच भी कराई गई. पुलिस का कहना है कि सभी जरूरी साक्ष्यों को जुटाकर मामले की जांच आगे बढ़ाई गई.

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पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 14 मई को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया. यानी 26 फरवरी को मामला दर्ज होने के करीब तीन महीने के भीतर पुलिस ने चार्जशीट अदालत में समर्पित कर दी. चार्जशीट दाखिल होने के अगले महीने ही अदालत में मामले की सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी. 4 जून को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप का गठन कर दिया. इसके बाद मामले की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राकेश कुमार राकेश की अदालत में हुई. मामले में पुलिस की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों और जांच के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी. अनुसंधान के दौरान कराई गई डीएनए जांच को भी जांच का हिस्सा बनाया गया.

करीब तीन महीने बाद 3 सितंबर को अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राकेश कुमार राकेश की अदालत ने आरोपी राज कुमार शर्मा को पॉक्सो एक्ट के तहत अंतिम सांस तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. इस तरह डेढ़ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में घटना के करीब साढ़े छह महीने के भीतर आरोपी को सजा सुना दी गई.

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मुख्यालय डीएसपी धीरेन्द्र कुमार पांडेय ने बताया कि 26 फरवरी को बच्ची से दुष्कर्म के संबंध में मामला दर्ज किया गया था. घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसपी हिमांशु ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था. डीएसपी के मुताबिक, मामले के त्वरित निष्पादन के लिए घटनास्थल पर ही एसआईटी का गठन किया गया था. एसआईटी ने प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान करते हुए साक्ष्यों का संकलन किया. उन्होंने बताया कि पुलिस ने 14 मई को अदालत में आरोप पत्र समर्पित कर दिया था. अनुसंधान के दौरान डीएनए जांच भी कराई गई. इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई हुई और 3 सितंबर को आरोपी राज कुमार शर्मा के खिलाफ सजा सुनाई गई.

मुख्यालय डीएसपी धीरेन्द्र कुमार पांडेय ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई की. घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद एसआईटी का गठन किया गया. आरोपी की गिरफ्तारी के साथ वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए और डीएनए जांच कराई गई. पुलिस ने 14 मई को चार्जशीट दाखिल की और 4 जून को अदालत ने आरोप का गठन किया. इसके बाद सुनवाई पूरी हुई और 3 सितंबर को आरोपी को अंतिम सांस तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

26 फरवरी से 3 सितंबर तक चली पूरी कार्रवाई

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इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और अदालत की सुनवाई दोनों ही तेजी से आगे बढ़ीं. 26 फरवरी को दर्ज हुए मामले में करीब साढ़े छह महीने बाद 3 सितंबर को फैसला आ गया. अदालत ने आरोपी को अंतिम सांस तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा के साथ 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया. मुख्यालय डीएसपी धीरेन्द्र कुमार पांडेय के मुताबिक, घटना के बाद सुनवाई और सजा सुनाने की पूरी कार्रवाई मात्र साढ़े छह महीने में हुई.

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