बिहार में नीतीश कुमार से सम्राट चौधरी तक बिहार में सत्ता की कमान किस तरह बदली, इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विस्तार से बात की है. उन्होंने बताया कि भाजपा और नीतीश कुमार का गठबंधन नया नहीं है, बल्कि 2005 से चला आ रहा है और जंगलराज के खिलाफ साझा संघर्ष पर टिका है. उनके मुताबिक सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नीतीश कुमार से लगातार सलाह ली जा रही है और भाजपा सरकार का तरीका पहले से अलग नहीं बल्कि उसी अनुभव पर आगे बढ़ने वाला है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब उनकी पार्टी की सीटें ज्यादा थीं, तब भी नीतीश कुमार को सहजता से मुख्यमंत्री बनाया गया था. उन्होंने साफ किया कि नीतीश कुमार, भाजपा, एलजेपी, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा सभी की एक साझा समझदारी है, जिसे वे बहुत अहम मानते हैं. उनके अनुसार सम्राट चौधरी अब इसी अनुभव पर आगे बढ़ रहे हैं और उन्होंने कुछ नई पहल भी शुरू की हैं.
इनमें सबसे अहम है जनता की शिकायतों के लिए शुरू किया गया एक पोर्टल, जिसमें कोई भी नागरिक कहीं से भी शिकायत दर्ज कर सकता है. इस पर एक हफ्ते में पहला और दो हफ्ते में दूसरा रिमाइंडर जाता है, और एक महीने में जवाब न मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है.
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रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह मॉडल गोवा और गुजरात में भी अपनाया गया है. इसके अलावा सम्राट चौधरी डिजिटल गवर्नेंस, स्किल सेंटर, एआई और डाटा यूनिवर्सिटी जैसी योजनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं और नए डिग्री कॉलेज भी खोले जा रहे हैं.
उन्होंने पटना और बिहार में हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया, जैसे पटना एयरपोर्ट का नया रूप, आठ वंदे भारत ट्रेनें, अटल पथ, जेपी गंगा पथ और गंगा नदी पर बन रहे पांच पुल. बाढ़ के दौरान प्रशासन की मौजूदगी और मदद का भी उन्होंने उदाहरण दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था पर थोड़ी सख्ती जरूरी है और इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
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