मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के कोठियां गांव निवासी उमाशंकर कुमार सोमवार को चार महीने बाद अपने घर लौट आया. वह पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल की राजधानी डकार में नौकरी करने गया था. घर पहुंचते ही पत्नी चांदनी देवी और बच्चों ने उसे गले लगा लिया. लंबे समय बाद परिवार से मिलने पर उमाशंकर भावुक हो गया. उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े. उमाशंकर के मुताबिक, परिवार में बेटी की शादी को लेकर आर्थिक परेशानी थी. इसी दौरान एक परिचित ने उसे सेनेगल में 60 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिलने की बात बताई. नौकरी की उम्मीद में वह 17 मई 2026 को सेनेगल की राजधानी डकार पहुंच गया. उमाशंकर का आरोप है कि डकार पहुंचने के बाद हालात उसके अनुमान के मुताबिक नहीं रहे. जिस नौकरी के लिए उसे 60 हजार रुपये प्रतिमाह मिलने की बात बताई गई थी, वहां पहुंचने के बाद उसे 30 हजार रुपये प्रतिमाह के एग्रीमेंट पर काम कराया गया.
उमाशंकर ने बताया कि 19 मई से उसने कंपनी की हेचरी में काम करना शुरू किया. उसका आरोप है कि कंपनी ने उसका पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया. इसके बाद उससे रोज करीब 12 घंटे काम कराया जाता था. उमाशंकर के मुताबिक, काम के दौरान उसकी तबीयत भी खराब हुई, लेकिन इसके बावजूद उस पर काम करने का दबाव बनाया जाता था. विदेश में अकेले रहने और लगातार काम करने की वजह से उसकी परेशानी बढ़ती चली गई. उसने बताया कि डकार में रहते हुए उसके पास मौजूद पैसे भी खत्म हो गए थे. हालात ऐसे हो गए थे कि उसे खाने तक की परेशानी होने लगी. लगातार मुश्किलों के बीच वह मानसिक रूप से काफी तनाव में रहने लगा.
'लगता था अब भारत वापस नहीं लौट पाऊंगा'
उमाशंकर ने बताया कि सेनेगल में रहने के दौरान कई बार उसे ऐसा लगा कि वह शायद अब भारत वापस नहीं लौट पाएगा. उसके पास पैसे नहीं थे और पासपोर्ट भी कंपनी के पास था. ऐसे हालात में भारत लौटना उसके लिए मुश्किल हो गया था. इसके बाद उसने मदद के लिए गुहार लगाई. उमाशंकर के मुताबिक, उसकी परेशानी की जानकारी विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास तक पहुंची. इसके बाद भारत लौटने की कोशिश शुरू हुई.
उमाशंकर के मुताबिक, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास की पहल के बाद बीते बुधवार को कंपनी मालिक को दूतावास बुलाया गया. उमाशंकर को भी वहां बुलाया गया. करीब चार घंटे तक पूरे मामले की जानकारी ली गई. इसके बाद दूतावास के निर्देश पर कंपनी मालिक ने उमाशंकर का पासपोर्ट वापस किया. भारत लौटने के लिए टिकट की व्यवस्था भी की गई. पासपोर्ट वापस मिलने के बाद उसके घर लौटने का रास्ता साफ हुआ.
उमाशंकर रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा. इसके बाद उसने दिल्ली जंक्शन से शाम छह बजे मुजफ्फरपुर आने वाली स्पेशल ट्रेन पकड़ी. करीब चार महीने तक विदेश में रहने और परेशानियों का सामना करने के बाद सोमवार देर शाम वह अपने गांव कोठियां स्थित घर पहुंचा. घर पहुंचते ही परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. पत्नी चांदनी देवी और बच्चों ने उसे गले लगा लिया. परिवार से मिलकर उमाशंकर भावुक हो गया. उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े. लंबे समय बाद पिता को सामने देखकर बच्चों और परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला था.
घर लौटने के बाद उमाशंकर ने कहा, 'मैं भारत लौटने की उम्मीद छोड़ चुका था. केंद्रीय मंत्री सह सांसद डॉ. राजभूषण चौधरी तथा पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता की पहल से आज अपने वतन और अपनी मिट्टी पर लौट सका हूं.' उमाशंकर ने बताया कि सेनेगल में बिताए चार महीने का अनुभव वह कभी नहीं भूल पाएगा. विदेश जाकर बेहतर कमाई की उम्मीद रखने वाले उमाशंकर के लिए यह सफर मुश्किलों से भरा रहा.
अब विदेश नहीं जाना चाहता, भारत में ही करेगा काम
उमाशंकर का कहना है कि अब वह दोबारा विदेश नहीं जाना चाहता. वह भारत में ही मजदूरी या कोई दूसरा काम करना चाहता है. उसके मुताबिक, विदेश में नौकरी के दौरान जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, उसके बाद उसका दोबारा विदेश जाने का मन नहीं है. उमाशंकर के घर लौटने की खबर मिलते ही रिश्तेदार और आसपास के लोग उससे मिलने पहुंचने लगे. चार महीने बाद उसके अपने घर लौटने से परिवार में खुशी का माहौल है. जिस परिवार से दूर होकर वह बेहतर कमाई की उम्मीद में सेनेगल गया था, आखिरकार उसी परिवार के बीच उसकी वापसी हुई.
मणि भूषण शर्मा