यूक्रेन से गया आईं एलिस, रूस-इटली-जर्मनी से भी पहुंचे लोग... विदेशी श्रद्धालुओं ने पितरों के लिए गया में किया पिंडदान

बिहार के गया में पितृपक्ष मेले के दौरान विदेशी श्रद्धालु भी अपने पितरों के मोक्ष की कामना लेकर पहुंचे हैं. रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी समेत कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी तट स्थित देवघाट पर सनातन परंपरा के अनुसार पिंडदान और तर्पण किया. यूक्रेन से आई एलिस जंडरा ने बताया कि वह सनातन धर्म से प्रभावित हैं और अपने पितरों की मोक्ष की कामना को लेकर गया पहुंची हैं.

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पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर गयाजी पहुंचे विदेशी श्रद्धालु. (Photo: ITG) पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर गयाजी पहुंचे विदेशी श्रद्धालु. (Photo: ITG)

पंकज कुमार

  • गया,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:08 AM IST

बिहार में गया की फल्गु नदी के किनारे देवघाट पर इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जो लोगों का ध्यान खींच रहा है. यहां सिर्फ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग ही अपने पितरों के लिए पिंडदान नहीं कर रहे, बल्कि रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी समेत कई देशों से आए विदेशी श्रद्धालु भी सनातन परंपरा के अनुसार पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं.

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पितृपक्ष मेले के दौरान गयाजी में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है. यहां विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के पास फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट पर कई विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने मृत पूर्वजों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना को लेकर पूरे विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया.

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देवघाट पर पिंडदान करते विदेशी श्रद्धालुओं को देखकर आसपास मौजूद लोगों की भी नजर उन पर टिक गई. अलग-अलग देशों और संस्कृतियों से आने वाले इन लोगों ने स्थानीय पुरोहितों की मदद से पिंडदान और तर्पण की रस्म पूरी की. यूक्रेन से आई एलिस जंडरा ने बताया कि वह सनातन धर्म से प्रभावित हैं और अपने पितरों की मोक्ष की कामना लेकर गया आई हैं. उनके साथ कई दूसरे देशों के श्रद्धालु भी यहां पहुंचे हैं और सभी अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान कर रहे हैं.

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एलिस के मुताबिक, गयाजी आकर पितरों के लिए यह अनुष्ठान करना उनके लिए खास अनुभव है. गया को पिंडदान और पितृ तर्पण के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. पितृपक्ष के दौरान यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करने पहुंचते हैं. इस बार इन श्रद्धालुओं में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी से आए लोगों ने फल्गु नदी के किनारे देवघाट पर पिंडदान किया.

विदेशी श्रद्धालुओं को पिंडदान कराने वाले पुरोहित लोकनाथ गौड़ ने बताया कि अलग-अलग देशों से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं. उनके मुताबिक, इनमें कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो सनातन धर्म से प्रभावित होकर इसकी परंपराओं को समझना चाहते हैं. पुरोहित के अनुसार, इन श्रद्धालुओं ने पितरों के उद्धार और आत्मशांति की मान्यता के तहत पिंडदान करने की इच्छा जताई थी. इसके बाद उन्हें सनातन परंपरा के अनुसार पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया कराई गई.

देवघाट पर सुरक्षा के इंतजाम

विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से भी देवघाट पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं. पितृपक्ष मेले के दौरान गया में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई है. देवघाट पर किसी ने रूस से आकर अपने पितरों को याद किया, कोई यूक्रेन से पहुंचा, तो इटली और जर्मनी से आए श्रद्धालुओं ने भी फल्गु नदी के किनारे वही धार्मिक अनुष्ठान किया.

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गया के देवघाट की तस्वीर इस वजह से भी खास रही कि यहां अलग-अलग देशों से आए लोग एक ही धार्मिक परंपरा का हिस्सा बने दिखाई दिए. विदेशी श्रद्धालुओं ने स्थानीय पुरोहितों के मार्गदर्शन में पिंडदान और तर्पण किया. गयाजी में पितृपक्ष के दौरान होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में अब विदेश से आने वाले श्रद्धालु भी शामिल हो रहे हैं. उनके लिए अपने पूर्वजों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना को लेकर पिंडदान करना इस यात्रा का अहम हिस्सा रहा.

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