सारण जिले में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर का असर अब बड़े इलाके में साफ दिखाई दे रहा है. बीती रात से तेजी से बढ़े पानी ने मकेर से गुजरने वाले NH-722 को अपनी चपेट में ले लिया है. छपरा से मुजफ्फरपुर जाने वाले इस नेशनल हाईवे के करीब 3 से 4 किलोमीटर हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया है. हाईवे पर कहीं 3 फीट तो कहीं करीब 5 फीट तक पानी जमा है. पानी की तेज धार के कारण इस रास्ते पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है. जिस सड़क पर सामान्य दिनों में वाहनों की आवाजाही रहती थी, वहां अब चारों तरफ बाढ़ का पानी नजर आ रहा है.
आजतक संवाददाता ने जब ग्राउंड जीरो पर स्थिति देखी तो बाढ़ की भयावह तस्वीर सामने आई. जिन लोगों तक समय पर सरकारी नाव नहीं पहुंच सकी, वे खुद ही पानी के बीच से निकलकर सुरक्षित जगह की ओर जाते दिखाई दिए. कई लोग तेज बहाव के बीच पैदल ही आगे बढ़ते नजर आए. बाढ़ के पानी से घिरे रास्तों पर लोग अपने सामान और जरूरी चीजों के साथ सुरक्षित स्थान तलाशते दिखे. मवेशियों को बचाने के लिए भी ग्रामीण पानी से भरे रास्तों से गुजरते नजर आए. इसी दौरान एक पुलिसकर्मी भी दो छोटे बच्चों को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान की ओर जाता दिखाई दिया. बाढ़ के बीच बच्चों को गोद में लेकर पानी पार करते पुलिसकर्मी की तस्वीर ने मौके की गंभीर स्थिति को सामने रखा.
NDRF-SDRF की 7 टीमें तैनात, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए जिला प्रशासन ने NDRF और SDRF की टीमों को कई मोटरबोट के साथ लगाया है. प्रशासन के मुताबिक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. हालांकि बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि राहत और बचाव के लिए लगाई गई NDRF और SDRF की टीमें स्थिति के मुकाबले कम हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिस बड़े इलाके में बाढ़ आई है, वहां रेस्क्यू टीमों की संख्या और बढ़ाई जानी चाहिए. कुछ आक्रोशित ग्रामीणों ने रेस्क्यू के दौरान पैसे के लेनदेन का आरोप भी लगाया है. राहत और बचाव कार्य को लेकर ग्रामीणों में असंतोष दिखाई दिया.
ग्रामीणों का कहना है कि मकेर के हैजलपुर में बांध क्षतिग्रस्त होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले 2020 में भी नेशनल हाईवे पर बाढ़ का पानी चढ़ा था, लेकिन उस समय इतनी बड़ी मात्रा में बर्बादी नहीं हुई थी. इस बार बाढ़ का असर काफी बड़े इलाके में दिखाई दे रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं. कई लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर जाना पड़ा है. बाढ़ के बीच लोगों के सामने अपने घर, परिवार और मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती है. वहीं राहत और बचाव को लेकर प्रशासन की व्यवस्था पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं.
सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 18 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं. करीब 1 लाख 70 हजार की आबादी पर इसका असर पड़ा है. डीएम के मुताबिक प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है. उन्होंने बताया कि गंडक के तीन स्थानों पर बांध क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि एक जगह जमींदारी बांध भी क्षतिग्रस्त हुआ है. लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए NDRF और SDRF की 7 टीमें लगातार काम कर रही हैं. बाढ़ प्रभावित लोगों के खाने की व्यवस्था के लिए 28 कम्युनिटी किचन भी चलाए जा रहे हैं.
पुलिस कर रही पेट्रोलिंग, ट्रैफिक डायवर्ट
सारण के एसएसपी रौशन कुमार ने बताया कि पुलिस बाढ़ प्रभावित इलाकों और बांधों की सुरक्षा के लिए लगातार पेट्रोलिंग कर रही है. बाढ़ प्रभावित कई लोग सड़कों के किनारे रह रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को देखते हुए ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है. एसएसपी के मुताबिक पुलिस स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है. उन्होंने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है. फिलहाल मकेर और आसपास के इलाकों में बाढ़ का असर गंभीर बना हुआ है. NH-722 पर पानी भरने से आवागमन ठप है और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं. प्रशासन की टीमें रेस्क्यू और राहत कार्य में जुटी हैं.
आलोक कुमार जायसवाल