69 FIR, 500 अरेस्ट और AK-47 से 4 राउंड फायर... स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर SC में बिहार सरकार ने क्या-क्या बताया?

बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर अनुचित बल प्रयोग के आरोपों को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. सरकार ने AK-47 से फायरिंग मामले में सफाई देते हुए कहा कि कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ.

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बिहार में AK-47 के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम हैं. (Photo- ITGD) बिहार में AK-47 के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम हैं. (Photo- ITGD)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:16 PM IST

बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से बर्बरता के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. सम्राट चौधरी सरकार ने पुलिस पर 'अनुचित बल' के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे. सरकार ने सीवान में एक पुलिसकर्मी की ओर से AK-47 से फायरिंग किए जाने के मामले पर भी सफाई दी है.

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राज्य सरकार के मुताबिक, सीवान में उग्र भीड़ के बीच फंसने के बाद एक कांस्टेबल ने AK-47 से हवा में चार गोलियां चलाई थीं. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि AK-47 से चली गोलियों से किसी भी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी. सरकार ने हलफनामे में माना कि AK-47 जैसे हथियार का इस्तेमाल सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए.

इसे 'प्लाटून स्तर का हथियार' बताते हुए कहा गया कि इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए होता है. राज्य के DGP ने AK-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं. फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

9mm पिस्टल से फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारी घायल

बिहार सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्टल से दो राउंड फायर किए थे. इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं. सरकार का कहना है कि इन तीनों प्रदर्शनकारियों को AK-47 से गोली नहीं लगी थी. वे उस स्थान पर मौजूद भी नहीं थे, जहां AK-47 से फायरिंग हुई थी. घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिसके जरिए हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के एंगल जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं.

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69 FIR, करीब 500 लोगों की गिरफ्तारी

राज्य सरकार के हलफनामे के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में प्रदर्शन से जुड़ी कुल 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के जरिए छोड़ा गया.

सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई जगहों पर स्थिति हिंसक हो गई थी. छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में भीड़ में असामाजिक तत्वों के शामिल होने और तोड़फोड़ तथा पथराव करने का आरोप लगाया गया है.

157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल

सरकार के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर हुई हिंसा में कुल 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए. इनमें 2 BDO, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल भी शामिल हैं. एक BDO की आंख की रोशनी चली गई, जबकि दूसरे BDO के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी हालत गंभीर बताई गई है.

बिहार सरकार ने स्वीकार किया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था और इस दौरान प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं.

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सरकार ने हिंसा के संदर्भ में AISA और RYA की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का भी जिक्र किया है. वहीं, 24 जुलाई को CJP की ओर से किए गए प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं होने का दावा किया गया है.

राज्य सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक प्रदर्शन से जुड़े सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त DGP को दिए गए हैं. साथ ही प्रदर्शनकारियों से जुटाई गई निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है. सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान से जुड़ी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है.

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