'क्या कर रहे थे SDO-DSP', भरत तिवारी एनकाउंटर पर मंत्री अशोक चौधरी ने उठाए सवाल

बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि भरत तिवारी का पुलिस एनकाउंटर गलत था, लेकिन कुछ लोग इसे जातीय रंग देकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने एनकाउंटर में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उधर, भरत तिवारी का परिवार संबंधित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, गांव वालों पर दर्ज कथित फर्जी केस वापस लेने और सुरक्षा की मांग पर अड़ा है. मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है.

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मंत्री अशोक चौधरी भरत तिवारी के परिवार से मिले. Photo ITG मंत्री अशोक चौधरी भरत तिवारी के परिवार से मिले. Photo ITG

aajtak.in

  • पटना,
  • 05 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:33 PM IST

बिहार के भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार के मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने एक बार फिर कहा कि भरत तिवारी का पुलिस एनकाउंटर गलत था, लेकिन कुछ लोग इस घटना को जातीय रंग देकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, एनकाउंटर वाली जगह SDO क्या कर रहे थे, DSP को पहले से दो एनकाउंटर पर 5 लाख जुर्माना देना पड़ा है. ऐसे अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए.  

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रविवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अशोक चौधरी ने कहा, 'मैं लगातार कह रहा हूं कि उनका एनकाउंटर गलत था. लेकिन कुछ लोग इसे जातिवाद का मुद्दा बना रहे हैं. समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है. हम दलित समाज के प्रतिनिधि होने के नाते वहां गए थे. मंत्री होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि लोगों के बीच जाकर सच्चाई रखें और समाज में विभाजन की स्थिति न बनने दें.'

अशोक चौधरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब भरत तिवारी के परिवार का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की 17 जून को भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी. इस घटना के बाद से परिवार पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है और इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहा है.

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परिवार की मांग- पुलिसकर्मियों की हो गिरफ्तारी
शनिवार को भरत तिवारी के परिजनों ने कथित तौर पर एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों की गिरफ्तारी की मांग की. परिवार का कहना है कि जगदीशपुर डीएसपी राजेश शर्मा, शाहपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार मल्लकर, एसआई अंकित आर्यन और एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी तक भरत की मां आशा देवी का अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा.

'गांव वालों पर दर्ज फर्जी केस हटाया जाए'
परिजनों ने यह भी मांग की कि जांच के लिए आने वाले अधिकारियों की जानकारी पहले से दी जाए और एनकाउंटर के बाद गांव वालों पर दर्ज किए गए कथित झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं. साथ ही परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की गई है.

फेसबुक लाइव वीडियो से बढ़ा विवाद
यह मामला उस समय और विवादित हो गया जब घटना से ठीक पहले का एक फेसबुक लाइव वीडियो सामने आया. परिवार का दावा है कि वीडियो में भरत तिवारी अपना पिस्तौल पुलिस की ओर फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था. आरोप है कि निहत्थे होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी. हालांकि, भोजपुर पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी.

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एफआईआर दर्ज, जांच जारी
परिवार की शिकायत के आधार पर बिहार पुलिस ने जगदीशपुर डीएसपी, शाहपुर थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है. विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी इस मामले पर सवाल उठाए हैं, जिससे यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

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