सड़क पर कोई हादसा होता है, CCTV का वीडियो सामने आता है और कुछ ही घंटों में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आ जाता है - महिंद्रा थार. कभी यह तेज रफ्तार में किसी बाइक को टक्कर मारती दिखती है, कभी डिवाइडर से टकराकर पलटती है और कभी किसी दूसरी कार या पैदल चल रहे व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेती है. सवाल इसलिए बड़ा है कि आखिर हर बार तस्वीर में 'THAR' ही क्यों नजर आती है. क्या वाकई इस SUV में कुछ ऐसा है जो इसे हादसों का 'दानव' बना देता है, या फिर कहानी इसके ड्राइवर, इसकी लोकप्रियता और सोशल मीडिया की है.
हाल के कुछ हादसों ने इस सवाल को और गंभीर कर दिया है. सितंबर 2026 में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में तेज रफ्तार महिंद्रा थार ने स्कूटर सवार दंपती को टक्कर मार दी. इस हादसे में 40 वर्षीय सुप्रीम कोर्ट के वकील नीरज की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हुईं. पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर रही है और हादसे में थार की रफ्तार अहम सवाल बनी हुई है.
सितंबर में ही कई हादसे, तस्वीर लगभग एक जैसी
चंडीगढ़ के धनास इलाके में बीते कल शराब के नशे में धुत्त एक युवती ने थार एसयूवी से बाइक सवार युवकों को रौंद दिया. इतना ही नहीं युवती ने मौके से भागने की कोशिश में थार एसयूवी को पास में लगे ट्रांसफार्मर से टकरा दिया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. बताया जा रहा है कि, आरोपी युवती किसी जाने-माने डॉक्टर की बेटी है.
इंदौर में सितंबर 2026 में एक थार तेज रफ्तार में राजेंद्र नगर के एक ब्रिज की रेलिंग तोड़कर करीब 50 फीट नीचे जा गिरी. SUV पलट गई और उसमें सवार चार लोग घायल हो गए. पुलिस ने हादसे की वजह की जांच शुरू की और ड्राइवर के नशे में होने की आशंका की भी जांच की.
दिल्ली के कैंट इलाके में भी सितंबर की शुरुआत में एक बाइक के फिसलने के बाद पीछे से आ रही थार उससे टकरा गई. इस हादसे में बाइक सवार दो लोगों की मौत हो गई. शुरुआती पुलिस जांच में बाइक के फिसलने की बात सामने आई थी, यानी हर थार हादसे की कहानी में थार का ड्राइवर ही अकेला कारण हो, ऐसा भी नहीं है.
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फरीदाबाद में सितंबर में एक 52 वर्षीय मोटरसाइकिल सवार की मौत तेज रफ्तार थार की कथित टक्कर के बाद हुई. पुलिस ने SUV को जब्त कर ड्राइवर की पहचान की. इसी महीने फरीदाबाद के चंदावली मोड़ पर 35 वर्षीय एक पैदल व्यक्ति को भी थार ने टक्कर मारी, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक CCTV के आधार पर वाहन और उसके मालिक की पहचान की गई.
जयपुर का मामला तो इस पूरी बहस को और साफ करता है. 31 अगस्त 2026 को एक तेज रफ्तार थार कथित तौर पर लाल बत्ती पार करते हुए दूसरी कार से टकराई. इसके बाद SUV पलटी और एक ई-रिक्शा समेत दूसरी गाड़ियों से टकरा गई. इस हादसे में तीन लोग घायल हुए. CCTV में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई और रिपोर्ट के मुताबिक थार का ड्राइवर मौके से चला गया.
जयपुर का ही 22-23 सितंबर की दरम्यानी रात का एक और मामला है. जिसमें देर रात तकरीबन 12:30 बजे एक महिंद्रा थार एसयूवी ने जवाहर नगर पुलिस स्टेशन के अन्तर्गत आने वाले उदय मार्ग के राजा पार्क इलाके में विजय पासवान नाम के एक स्कूटर सवार को टक्कर मार दी. और तकरीबन 15 फीट तक वो स्कूटर चालक को घसीटते हुए आगे ले गए. यह हादसा उस वक्त हुआ जब विजय अपने किसी फ्रेंड के लिए खाना लेकर जा रहे थे. एक्सीडेंट में शामिल थार सवार तीन डॉक्टरों से पुलिस ने पूछताछ की थी. इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ.
और यह सिलसिला सिर्फ सितंबर 2026 तक सीमित नहीं है. मार्च 2026 में गुरुग्राम के पटौदी इलाके में एक तेज रफ्तार थार ने सड़क किनारे 60 वर्षीय व्यक्ति और उसके दो पोतों को टक्कर मार दी. तीनों की मौत हो गई. पुलिस के अनुसार CCTV में SUV की रफ्तार करीब 80 किमी प्रति घंटा बताई गई और ड्राइवर मोड़ पर कंट्रोल नहीं रख सका.
2025 का गुरुग्राम हादसा भी नहीं भूला है
सितंबर 2025 में दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे पर थार के एक हादसे में पांच लोगों की मौत हुई थी. पुलिस के अनुसार SUV करीब 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चल रही थी और झारसा चौक के पास अचानक कंट्रोल छूटने के बाद एसयूवी डिवाइडर से टकराकर पलट गई. एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था.
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फरवरी 2026 में गोवा में भी एक किराये की थार और Hyundai i20 की टक्कर में भोपाल निवासी 65 वर्षीय भगतराम शर्मा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में मौजूद दो अन्य लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि 5 महीने का एक शिशु की जान बाल-बाल बची. इस घटना के बाद थार और तेज ड्राइविंग कल्चर को लेकर बहस तेज हुई. रिपोर्ट ने सोशल मीडिया पर थार से जुड़े तेज रफ्तार, स्वर्विंग और ड्रिफ्टिंग वाले वीडियो को भी इस चर्चा का एक हिस्सा बताया गया.
इस हादसे के बाद गोवा सरकार ने नई रेंटल महिंद्रा थार और थार रॉक्स के लाइसेंस पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है. गोवा के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो (Mauvin Godinho) ने हाल ही में गोवा में किराए की थार के प्रयोग को लेकर सख्त नियम बनाने का प्रस्ताव रखा है. दरअसल, गोवा सरकार का मानना है कि, महिंद्रा थार (हाई-रिस्क रेंट-कार) है. फिलहाल, अभी इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है.
DM को दिलानी पड़ी शपथ
थार और फॉर्च्यूनर जैसी बड़ी गाड़ियों से लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए दमन प्रशासन और आरटीओ विभाग ने 'रफ्तार नहीं, संस्कार' नाम से एक कैंपेन चलाया. इस दौरान 100 से ज्यादा फॉर्च्युनर और थार गाड़ियों को एक जगह खड़ा किया गया और सभी वाहन मालिकों से बाकायदा शपथ दिलाई गई. इस मौके पर दमन के जिलाधिकारी सौरभ मिश्रा भी मौजूद थे और उन्होंने सभी वाहन मालिकों से अपील की वो ट्रैफिक नियमों का पालन करें और ठीक ढंग से वाहन चलाएं.
लेकिन क्या हर हादसे की वजह थार है
यहीं इस कहानी का सबसे जरूरी हिस्सा है. किसी वाहन का हादसे में शामिल होना और उस वाहन का हादसे की वजह होना, दोनों अलग बातें हैं. ऊपर बताए कई मामलों में पुलिस की शुरुआती जानकारी में तेज रफ्तार, गाड़ी पर कंट्रोल खोना, रेड लाइट जंप करना, गलत तरीके से गाड़ी निकालना या दूसरी गाड़ी के फिसलने जैसी बातें सामने आई हैं. इसलिए सिर्फ यह देखकर कि हादसे में Thar थी, यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि Thar ही समस्या है.
फिर भी सवाल यह है कि Thar का नाम इतनी बार क्यों उभरता है.
पहला कारण - Thar अब सिर्फ ऑफ-रोड SUV नहीं रही
पुरानी Thar की पहचान एक रफ-टफ ऑफ-रोड मशीन की थी. लेकिन नई Thar ने इसे लाइफस्टाइल SUV में बदल दिया. आज यह सिर्फ पहाड़ी या खराब रास्तों पर चलने वाली गाड़ी नहीं है. शहरों में भी यह बड़ी संख्या में दिखाई देती है. जितनी ज्यादा कोई गाड़ी सड़क पर होगी, उतनी ही संभावना है कि वह हादसों में भी नजर आएगी. इसलिए Thar की लोकप्रियता को नजरअंदाज करके केवल हादसों की खबरों को देखना तस्वीर का अधूरा हिस्सा होगा.
दूसरा कारण - Thar की 'इमेज'
Thar सिर्फ एक कार नहीं, एक स्टेटमेंट बन चुकी है. सोशल मीडिया पर इसके साथ रफ्तार, स्टाइल, ऑफ-रोडिंग, ड्रिफ्टिंग और दबंग अंदाज की तस्वीरें और वीडियो खूब दिखाई देते हैं. सोशल मीडिया ऐसे कंटेंट से भरा पड़ा है जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि, लोग किस तरह थार के साथ वीडियो और तस्वीरों में स्टंट करते दिखाई देते हैं. कोई हाईवे या एक्सप्रेस-वे से गाड़ी लहरा रहा है, तो कोई SUV के बोनट पर केक काट रहा है, तो कोई तेज रफ्तार दौड़ती थार के सनरूफ से बाहर निकल कर लहरा रहा है.
तीसरा कारण - ऊंची SUV की फिजिक्स
Thar का डिजाइन मूल रूप से खराब रास्तों और ऑफ-रोड इस्तेमाल को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसका ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा है और बॉडी अपेक्षाकृत ऊंची है. ऐसे वाहन का सेंटर ऑफ ग्रैविटी सामान्य लो-स्लंग कार की तुलना में ऊपर होता है.
इसका मतलब यह नहीं कि Thar आसानी से पलट जाती है. लेकिन जब कोई ऊंची SUV तेज रफ्तार में अचानक दिशा बदलती है, तेज मोड़ लेती है या एक तरफ से जोरदार टक्कर लगती है, तो वाहन पर लगने वाली लैटरल फोर्स काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. यही वजह है कि तेज रफ्तार और अचानक स्टीयरिंग इनपुट का कॉम्बिनेशन किसी भी हाई-राइडिंग SUV के लिए जोखिम बढ़ा सकता है.
Thar Roxx में Mahindra ने रोलओवर मिटिगेशन जैसी तकनीक भी दी है, जो संभावित व्हील-लिफ्ट को आइडेंटिफाई कर ब्रेकिंग और पावर को कंट्रोल करने की कोशिश करती है. लेकिन कंपनी के अपने मैनुअल में भी साफ कहा गया है कि ऐसा सिस्टम हर रोलओवर को नहीं रोक सकता और ड्राइवर को खतरनाक या लापरवाह तरीके से वाहन नहीं चलाना चाहिए.
चौथा कारण - बड़ी SUV का कॉन्फिडेंस
यह एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी है. बड़ी, ऊंची और भारी SUV चलाते हुए ड्राइवर को सड़क पर ज्यादा आत्मविश्वास महसूस हो सकता है. लेकिन सड़क पर बाकी लोग उसी हिसाब से व्यवहार नहीं करते. बाइक, स्कूटर, ई-रिक्शा और छोटी कार के बीच से तेज रफ्तार में निकलने की कोशिश करना किसी भी SUV के लिए खतरनाक है. जयपुर का हादसा इसी बात का उदाहरण है, जहां कथित तौर पर लाल बत्ती पार करने के बाद थार कई वाहनों से टकराई.
पांचवां कारण - Thar के हादसे कैमरे में ज्यादा आते हैं
यह भी एक बड़ा फैक्टर है. Thar का डिजाइन दूर से पहचान में आ जाता है. सड़क पर किसी छोटी हैचबैक के हादसे की तस्वीर सोशल मीडिया पर शायद उतनी तेजी से वायरल न हो, लेकिन पलटी हुई या बुरी तरह डैमेज Thar तुरंत लोगों का ध्यान खींचती है. इसके ऊपर Thar से जुड़े मीम्स, रील्स और एक खास सोशल मीडिया इमेज पहले से मौजूद है. इसलिए हर नया हादसा उसी पुराने नैरेटिव को और मजबूत कर देता है. यही वजह है कि लोगों को लग सकता है कि "हर हादसे में Thar ही है".
असली समस्या SUV नहीं, ड्राइविंग कल्चर
अगर हाल के हादसों को एक साथ रखकर देखें तो एक पैटर्न जरूर दिखाई देता है - तेज रफ्तार, अचानक कंट्रोल खोना, गलत तरीके से ओवरटेक करना, रेड लाइट तोड़ना और हादसे के बाद मौके से भागने जैसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं. इन चीजों का संबंध वाहन के मॉडल से ज्यादा ड्राइवर के व्यवहार और सड़क पर डिसिप्लिन से जुड़ा है.
इसका मतलब यह भी नहीं कि वाहन के डिजाइन की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाती है. किसी भी ऊंची SUV को उसकी फिजिक्स के लिमिटेशन के भीतर चलाना जरूरी है. खासकर तेज मोड़, अचानक लेन बदलने और बहुत ज्यादा रफ्तार वाली परिस्थितियों में.
तो फिर 'दानव' कौन है
थार भले ही एक 'दबंगई' का टैबू बन गया है, लेकिन कई बार असली खतरा कार की सीट पर बैठा इंसान पैदा करता है. एक अच्छी SUV भी गलत ड्राइविंग को सही नहीं कर सकती. ABS, एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और रोलओवर मिटिगेशन जैसी टेक्नोलॉजी हादसे का जोखिम या उसके रिजल्ट को बदल सकती हैं, लेकिन वे फिजिक्स के नियम खत्म नहीं करतीं. महिंद्रा के Thar Roxx मैनुअल में भी साफ तौर पर वाहन की सीमाओं और रोलओवर के जोखिमों के बारे में चेतावनी दी गई है.
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
थार से जुड़े इन हादसों को हमने मनोवैज्ञानिक नजरिए से भी समझने की कोशिश की. इस मामले में जानीमानी साइकोलॉजिस्ट डॉ. विधि एम. पिलनिया ने बताया कि, "एक मनोवैज्ञानिक के तौर पर मैं रोड रेजेजे में गाड़ी से ज्यादा गाड़ी को चलाने वाले व्यक्ति को महत्वपूर्ण मानती हूं, कि आखिर उसकी मनोवैज्ञानिक स्थिति क्या है. उसका रिस्क परसेप्शन कितना है, उसका परसिव्ड कंट्रोल कितना है, वो कितना पावर कंट्रोल या डॉमिनेंस वाली फीलिंग को महसूस कर रहा है."
डॉ. विधि का कहना है कि, "आमतौर पर उंची और बड़ी गाड़ियों को चलाने वालों के भीतर पावर, डॉमिनेंस और कंट्रोल वाली फीलिंग आ जाती है. हालांकि ऐसा सभी के साथ हो ये जरूरी भी नहीं है. अगर व्यक्ति का बेसिक नेचर गुस्से वाला है तो इस तरह की स्थिति के चांसेस बढ़ जाती है. लेकिन इस तरह के मामले में गाड़ी से ज्यादा व्यक्ति दोषी होता है."
गाड़ी आपके व्यक्तित्व का आइना
डॉ. विधी का मानना है कि, "जिस तरह की गाड़ी आप चुनते हैं वो आपके व्यक्तित्व को दर्शाता है, ये एक तरह से आपके व्यक्तित्व का आइना होती हैं. टोयोटा की कोरोला बनाती है और टोयोटा ही फॉर्च्यूनर भी बनाती है. लेकिन प्राइस से ज्यादा लोगों की अपनी पसंद होती है. इस तरह के लोग ऐसी गाड़ी चाहते हैं जो सड़क पर अलग दिखे, दूसरे वाहनों के सामने ज्यादा दमदार दिखे. रोड रेजेज भी उन्हीं लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है, जिनमें एग्रेसन ज्यादा है. जो सड़क पर छोटी-मोटी बात पर भी रिएक्ट करते हैं."
थार को लेकर लोगों का जो परसेप्शन है उसको लेकर डॉ. विधि का कहना है कि, "किसी एक गाड़ी को देखकर यह कहना ठीक नहीं है कि, उसे गलत विचारधारा वाले व्यक्ति ही चलाते हैं. थार के अलावा दूसरी और कई गाड़ियां हैं जिन्हें फिल्मों में खलनायक द्वारा इस्तेमाल करते हुए देखा जाता है. इसके अलावा बहुत सारे आर्मी पर्सन भी हैं जिन्हें थार पसंद हैं और वो इसे खरीद रहे हैं. इसलिए सिर्फ थार को दोषी मानना गलत है."
THAR के डिजाइन को लेकर भी डॉ. विधि सवाल उठाती हैं. उनका मानना है कि, "इस एसयूवी का डिजाइन और स्ट्रक्चर ऐसा है जो कई बार हादसों का संभावित कारण बन सकता है. इसके अलावा गाड़ी के उंचे होने के वजह से लोगों के भीतर 'फीलिंग ऑफ ग्रैंडिसिटी' (Feeling of Grandiosity) आती है. यानी वो सड़क पर डॉमिनेट कर सकते हैं."
इसके अलावा सोशल मीडिया पर महिंद्रा थार को लेकर खूब महिमा मंडन देखने को मिल रहा है. आजकल इंस्टाग्राम पर ऐसे कई रील्स मिल जाएंगी, जिसमें यंगस्टर महिंद्रा थार से स्टंट करते दिख जाते हैं. इसके अलावा कुछ हरियाणवी म्यूजिक वीडियोज भी हैं जिनमें थार का गुणगान किया जा रहा है. इस तरह की चीजें भी महिंद्रा थार के प्रति यंगस्टर्स के नजरिए को तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं.
इसलिए अगली बार सड़क पर कोई Thar तेज रफ्तार में निकलती दिखे तो सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि "Thar इतनी खतरनाक क्यों है." सवाल यह भी होना चाहिए कि ड्राइवर इतनी तेजी से क्यों चला रहा है, ट्रैफिक नियमों को क्यों तोड़ रहा है और एक भारी SUV की ताकत को सड़क पर दिखाने की जरूरत आखिर क्यों महसूस कर रहा है. क्योंकि मशीन के हाथ में स्टीयरिंग नहीं होता. स्टीयरिंग के पीछे इंसान बैठा होता है. और सड़क पर 'दानव' अक्सर चार पहियों पर नहीं, गलत फैसलों से पैदा होता है.
अश्विन सत्यदेव