Mahindra Thar Rent Ban Goa: गोवा का नाम सुनते ही दिमाग में बीच, छुट्टियां और किराये पर दौड़ती महिंद्रा थार की तस्वीर बनती है. लेकिन यही THAR सरकार की नज़र में आ गई है, जिसकी रफ्तार पर राज्य सरकार ब्रेक लगाने की तैयारी में है. वजह हैं लगातार सामने आ रहे सड़क हादसे. गोवा सरकार ने नई रेंटल महिंद्रा थार और थार रॉक्स के लाइसेंस पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है. अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह सिर्फ एक गाड़ी पर फैसला नहीं होगा, बल्कि पूरे रेंटल कार कारोबार और टूरिज़्म से जुड़े समीकरण भी बदल सकते हैं.
ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या हादसों की वजह सिर्फ गाड़ी है, या फिर उसे चलाने का तरीका? यही बहस अब गोवा से निकलकर पूरे देश में शुरू हो सकती है. आइये जानें क्या है पूरा मामला-
गोवा के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो (Mauvin Godinho) ने हाल ही में राज्य परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. इस दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े कई नए प्रस्तावों पर चर्चा हुई. मंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि ज्यादा जोखिम वाली रेंटल महिंद्रा थार गाड़ियों को लेकर नए नियम बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. दरअसल सरकार महिंद्रा थार को (हाई-रिस्क रेंट-कार) मान रही है और और इस मीटिंग में थार गाड़ियों को रेगुलेट करने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई. इसे अब स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा.
सरकार ने साफ किया है कि बड़े सड़क हादसों में शामिल रेंटल कार चालकों के साथ-साथ गाड़ी मालिकों और ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई होगी. इसके अलावा प्राइवेट गाड़ियों का अवैध तरीके से कमर्शियल और रेंटल इस्तेमाल करने वालों पर भी शिकंजा कसा जाएगा. रेंटल गाड़ियों की पार्किंग को लेकर भी अलग नियम बनाए जा सकते हैं.
यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि, फिलहाल महिंद्रा थार पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है. यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, जिस पर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की अगली बैठक में वोटिंग होगी. मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा. महिंद्रा थार और थार रॉक्स देश के कई टूरिस्टम प्लेसेज पर सबसे ज्यादा किराये पर ली जाने वाली SUVs में शामिल हैं.
शानदार ऑफ-रोडिंग कैपेसिटी, दमदार इंजन और बोल्ड रोड प्रेजेंस इस एसयूवी को टूरिस्ट के बीच लोकप्रियम बनाती हैं. इसके अलावा टफ टेरेन (खराब रास्तों) पर चलने की क्षमता के कारण पर्यटक इन्हें काफी पसंद करते हैं. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि गोवा सरकार ने किन आंकड़ों के आधार पर इन्हें दूसरी गाड़ियों की तुलना में ज्यादा जोखिम वाला माना है.
यह पहली बार नहीं है जब गोवा सरकार ने रेंटल गाड़ियों को लेकर बड़ा कदम उठाने की कोशिश की है. साल 2023 में भी प्रस्ताव आया था कि 2024 से राज्य में सभी कार और बाइक रेंटल ऑपरेटर सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही किराये पर दें. हालांकि यह योजना लागू नहीं हो सकी. वहीं उबर और ओला जैसी टैक्सी एग्रीगेटर सेवाओं को राज्य में शुरू करने की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हुई हैं.
बैठक में रोड सेफ्टी को बेहतर करने के लिए AI बेस्ड ट्रैफिक कैमरे, स्पीड गवर्नर और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम लगाने पर भी चर्चा हुई. मंत्री के मुताबिक, राज्य के 26 स्थानों पर लगाए गए AI ट्रैफिक कैमरों ने एक ही दिन में 56,500 से ज्यादा ट्रैफिक वॉयलेशन के केस पकड़े हैं. फिलहाल लोगों को चेतावनी दी जा रही है. 15 जुलाई के बाद मौके पर ही चालान काटे जाएंगे. सितंबर तक कैमरों की संख्या 52 औ र दिसंबर तक 90 स्थानों तक बढ़ाने की योजना है.
हालांकि, अभी रेंटेड थार के रोक पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि, क्या सड़क पर होने वाले हादसों के लिए गाड़ी जिम्मेदार है? इससे पहले भी थार को लेकर इस तरह की कई बातें सामने आ चुकी हैं. कुछ दिनों पहले हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) ओपी सिंह ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि, "अब थार गाड़ी है, इसे छोड़ने का क्या मतलब है... सारे बदमाश इसी से चलते हैं. मतलब जिस तरह की गाड़ी का च्वॉइस है... वो आपका माइंडसेट शो करता है."
अश्विन सत्यदेव