Vehicle Crash Safety Standards: सड़क हादसों में यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर करने और वाहनों को मॉडर्न सेफ्टी टेक्नोलॉजी से लैस करने के लिए केंद्र सरकार ने मोटर व्हील सेफ्टी स्टैंडर्ड में बदलाव किया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 19 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के तहत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 से संबंधित अलग-अलग सेफ्टी स्टैंडर्ड में बदलाव किए गए हैं. नए स्टैंडर्ड अलग-अलग चरणों में लागू होंगे, जिससे वाहन निर्माताओं को तय समयसीमा के अनुसार तैयारी करनी होगी.
संशोधित प्रावधानों में फ्रंटल और साइड क्रैश के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है. इसके साथ ही पीछे से टक्कर होने की स्थिति में फ्यूल सिस्टम और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन की सेफ्टी बढ़ाने के लिए भी स्टैंडर्ड को अपडेट किया गया है. व्हीकल कंट्रोल सिस्टम और स्टीयरिंग से जुड़े सेफ्टी नियमों में भी बदलाव किए गए हैं.
पैदल यात्रियों की सेफ्टी
नए नियमों में पैदल यात्रियों और सड़क पर चल रहे लोगों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है. अधिसूचना के अनुसार, नए वाहन मॉडलों के लिए संबंधित बदलाव 1 अक्टूबर 2028 से लागू होंगे. इसके अलावा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए फ्लेक्सिबल पेडेस्ट्रियन लेग इम्पैक्टर (FlexPLI) टेस्टिंग डिवाइस का अनिवार्य इस्तेमाल 1 अक्टूबर 2032 से प्रस्तावित किया गया है.
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M1 कैटेगरी की कारों में इमोबिलाइज़र की अनिवार्य फिटिंग के लिए 1 अक्टूबर 2027 की समयसीमा निर्धारित की गई है. बता दें कि, इमोबिलाइज़र एक ऐसा डिवाइस होता है जो बिना चाबी के इस्तेमाल किए वाहन को स्टार्ट होने से रोकता है. इससे वाहन के चोरी होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है. अब ये फीचर आगामी 1 अक्टूबर 2027 से सभी पैसेंजर वाहनों में अनिवार्य होगा.
वहीं, इलेक्ट्रॉनिक डेटा रिकॉर्डर (EDR) से जुड़े स्टैंडर्ड को भी नए नियम में शामिल किया गया है. यह डिवाइस दुर्घटना से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े रिकॉर्ड करने में मदद करता है, जिससे हादसों के कारणों की जांच में सहायता मिलती है. सरकार के इस कदम से व्हीकल सेफ्टी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलने और सड़क दुर्घटनाओं में चोटों का जोखिम कम करने की उम्मीद है.
आशुतोष मिश्रा