क्लच क्या होता है. गियर कब बदलना है. और ढलान पर गाड़ी बंद हो जाए तो दोबारा कैसे स्टार्ट करनी है. ये सवाल आज की Gen Z से पूछिए, तो हो सकता है जवाब आए... “भाई, ऑटोमैटिक में तो ऐसा कुछ करना नहीं पड़ता.” मामला सिर्फ मजाक का नहीं है. हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च बता रही है कि Gen Z की नई पीढ़ी के 35% कार चालकों ने जिंदगी में कभी मैनुअल कार चलाना सीखा ही नहीं. वहीं बेबी बूमर्स के जेनरेशन में यह आंकड़ा सिर्फ 9% है. यानी जिस क्लच-गियर के साथ पिछली पीढ़ी ने ड्राइविंग सीखी, Gen Z उसी से दूरी बना रही है.
कारें स्मार्ट हो गईं, गियरबॉक्स स्मार्ट हो गए और ड्राइवर भी शायद इतने स्मार्ट हो गए कि क्लच दबाने की जहमत उठाना भी छोड़ चुके हैं. लेकिन ट्विस्ट ये है कि मैनुअल ट्रांसमिशन से दूर होती इसी युवा पीढ़ी में 56% लोग मानते हैं कि काश उन्होंने ये हुनर सीखा होता. तो सवाल ये नहीं कि Gen Z मैनुअल कार चला सकती है या नहीं. असली सवाल है... ऑटोमैटिक की गोद में पली-बढ़ी ये पीढ़ी, क्लच-गियर वाली गाड़ियों से भरी सड़क पर उतरेगी तो कैसा नजारा होगा. आइये जानते हैं क्या कहती है ये रिसर्च-
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क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट
Extreme Terrain के सर्वे में अमेरिका के अलग-अलग उम्र के ड्राइवरों से मैनुअल कार चलाने को लेकर सवाल पूछे गए. सर्वे के मुताबिक 35% Gen Z ड्राइवरों ने कभी स्टिक शिफ्ट यानी मैनुअल ट्रांसमिशन कार चलाना सीखा ही नहीं है. इसके मुकाबले सिर्फ 9% बेबी बूमर्स ऐसे हैं, जिन्होंने यह स्किल नहीं सीखी. यानी दोनों पीढ़ी में काफी अंतर देखने को मिला.
उम्र के साथ मैनुअल कार चलाने का अनुभव भी काफी बदलता नजर आया. सर्वे में जब अलग-अलग एज ग्रुप के लोगों से सवाल किया गया कि, वो आज अभी इसी वक्त पूरे विश्वास के साथ मैनुअल कार ड्राइव कर सकते हैं. तो बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. इस सवाल के जवाब में 91% बेबी बूमर्स ने कहा कि वो भरोसे के साथ मैनुअल कार ड्राइव कर सकते हैं, वहीं 82% Gen X, 71% मिलेनियल्स और 65% Gen Z ड्राइवरों ने कहा कि वे मैनुअल कार चला सकते हैं. हालांकि 30 साल से कम उम्र के ड्राइवरों में सिर्फ 58% को भरोसा है कि वे आज भी मैनुअल कार को अच्छी तरह चला पाएंगे.
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पैरेंट्स का रोल
मैनुअल कार चलाना सीखने वाले ज्यादातर लोगों के लिए इसकी ट्रेनिंग किसी ड्राइविंग स्कूल से नहीं, बल्कि परिवार से शुरू हुई. सर्वे में 56% मैनुअल ड्राइवरों ने बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता या घर के ही किसी बड़े व्यक्ति या रिश्तेदार से कार ड्राइविंग (मैनुअल) सीखी. वहीं 27% लोगों का कहना था कि, उन्होंने अपने दोस्त या पार्टनर की मदद ली.
ड्राइविंग इंस्ट्रक्टर और एस्पर्ट्स का मानना है कि, बेबी बूमर्स, जेन-एक्स या मिलेनियल्स वह पीढ़ी है जो मैनुअल कारों के साथ बड़े हुए और उन्होंने इसे सीखा. क्योंकि उस वक्त ज्यादातर घरों में मैनुअल कारें ही हुआ करती थीं. इक्का-दुक्का लोग ऑटोमेटिक कारों से चलते थें. वहीं आज के दौर में लोग तभी मैनुअल कार चलाना सीखते हैं, जब उनके माता-पिता या घर का कोई बड़ा व्यक्ति उन्हें सीखाता है. लेकिन बदलते समय के साथ ये प्रैक्टिस भी कम होती जा रही है. हालांकि ये बात विदेशों में ज्यादा लागू होती है.
मैनुअल कार सीखने की वजह भी समय के साथ बदल गई है. बेबी बूमर्स के जेनरेशन में 55% लोगों ने माना है कि, उन्होंने जरूरत की वजह से मैनुअल कार चलाना सीखा था, जबकि सिर्फ 23% ने अपनी पसंद से इसे सीखा. इसके उलट Gen Z में सिर्फ 22% लोगों का कहना है कि उन्होंने जरूरत के चलते यह स्किल सीखी, जबकि 55% ने कहा कि उन्होंने अपनी पसंद से इसे सीखा.
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मैनुअल ड्राइविंग और ब्रेन गेम
मैनुअल कार चलाने के लिए क्लच, गियर, एक्सीलेरेटर और स्टीयरिंग के बीच लगातार तालमेल बनाना पड़ता है. यही वजह है कि बहुत से ड्राइवर इसे बड़ी मुश्किल मानते हैं. एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि, ज्यादात नए ड्राइवर इसे इसलिए पसंद नहीं करते क्योंकि इसमें दिमाग को एक साथ कई काम करने पड़ते हैं. दिलचस्प बात यह है कि जो लोग मैनुअल कार चला सकते हैं, उनमें भी इसका इस्तेमाल कम हो गया है. ऐसे ड्राइवरों में 64% ने कहा कि वे मैनुअल कार को कभी-कभार या बिल्कुल नहीं चलाते. वहीं 31% ऐसे लोग हैं, जो मैनुअल कार चला सकते हैं, लेकिन वे मैनुअल कार चलाते ही नहीं.
मैनुअल ड्राइविंग के फायदे और भी
मैनुअल ट्रांसमिशन ड्राइविंग का फायदा लोगों के पर्सनल लाइफ को भी इफेक्ट कर रहा है. इस सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि, 43% अमेरिकियों ने कहा कि अगर उनका पार्टनर मैनुअल कार चला सकता है तो वह उन्हें ज्यादा अट्रैक्टिव लगेगा. महिलाओं में यह सोच थोड़ी ज्यादा देखने को मिली, जहां 45% महिलाओं ने इसे अट्रैक्टिव माना, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 41% था. वहीं 40% लोगों ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी डेटिंग प्रोफाइल में मैनुअल कार ड्राइविंग को दिखाता है तो इससे इंप्रेस होंगे, हालांकि 17% लोगों ने इसे दिखावा भी माना.
ऐसा नहीं है कि, Gen Z को मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कार चलाना पसंद नहीं है. बल्कि इस सर्वे में 54% ऐसे लोगों ने कहा कि काश उन्होंने मैनुअल कार चलाना सीखा होता या उन्हें ऐसा मौका मिला होता. Gen Z में यह इच्छा सबसे ज्यादा नजर आई. 56% Gen Z ड्राइवरों ने कहा कि वे चाहते हैं कि उन्होंने मैनुअल ड्राइविंग सीखी होती या वो इसे और बेहतर तरीके से चला सकते. इसके मुकाबले सिर्फ 26% बेबी बूमर्स ने ऐसी इच्छा जाहिर की. इतना ही नहीं, 68% माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे मैनुअल कार चलाना सीखें. इनमें 40% ऐसे माता-पिता भी शामिल हैं, जो खुद मैनुअल कार नहीं चला सकते.
अलग-अलग जनरेशन की कैटेगरी और उम्र
| क्रमांक | जनरेशन | जन्म वर्ष | 2026 में उम्र |
| 1 | द साइलेंट जनरेशन | 1925–1945 | 81–101 साल |
| 2 | बेबी बूमर जनरेशन | 1946–1964 | 62–80 साल |
| 3 | जनरेशन X | 1965–1980 | 46–61 साल |
| 4 | मिलेनियल्स | 1981–1996 | 30–45 साल |
| 5 | जनरेशन Z | 1997–2012 | 14–29 साल |
| 6 | जनरेशन अल्फा | 2013–2025 | 1–13 साल |
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EV के दौर में मैनुअल का क्या होगा?
इलेक्ट्रिक कारों के बढ़ते दौर में मैनुअल ट्रांसमिशन का भविष्य और मुश्किल नजर आ रहा है. सर्वे में 55% लोगों का मानना है कि इलेक्ट्रिक कारें आखिरकार मैनुअल ट्रांसमिशन को खत्म कर देंगी. बेबी बूमर्स में यह सोच सबसे ज्यादा देखने को मिली, जहां 95% लोगों ने मैनुअल को खत्म होती हुई स्किल माना. Gen Z में यह आंकड़ा 78% था. सिर्फ 38% लोगों को लगता है कि 20 साल बाद भी मैनुअल कारें मौजूद रहेंगी.
मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारों की डिमांड अमेरिका में तेजी से घटी है. और बिक्री के आंकड़े इस बात के गवाह हैं. NY पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में अमेरिका में बिकने वाली कुल कारों में 2% से भी कम कारें मैनुअल ट्रांसमिशन वाली थीं. वहीं 2025 मॉडल ईयर के लिए अमेरिकी बाजार में बनी कुल गाड़ियों में सिर्फ 0.6% में मैनुअल ट्रांसमिशन दिया गया था. दिलचस्प बात ये है कि, यह आंकड़ा 1980 में 35% था. यानी कुछ दशकों में मैनुअल गियर वाली कारों की संख्या में जबरदस्त गिरावट आई है.
कहां और कैसे हुआ सर्वे
Extreme Terrain ने जुलाई 2026 में 1,006 अमेरिकी ड्राइवरों पर यह सर्वे किया. इसमें लोगों से मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारों के अनुभव, उनके प्रति सोच और भविष्य को लेकर सवाल पूछे गए. सर्वे के लिए क्लाउड रिसर्च कनेक्ट के जरिए लोगों को शामिल किया गया. सर्वे में Gen Z की उम्र 18 से 29 साल, मिलेनियल्स की उम्र 30 से 45 साल, Gen X की उम्र 46 से 61 साल और बेबी बूमर्स तथा उससे ज्यादा उम्र के लोगों को 62 साल या उससे अधिक की कैटेगरी में रखा गया है.
अश्विन सत्यदेव