सुबह के पांच बजे हैं. शहर अभी ठीक से जागा भी नहीं है. सड़कें खाली हैं. तभी एक टोयोटा फॉर्च्यूनर आकर रुकती है. गाड़ी का दरवाजा खुलता है. एक आदमी बाहर निकलता है. न तन पर महंगे कपड़े, न कलाई में लग्ज़री घड़ी बल्कि हाथ में एक झाड़ू है, जो उस शख्स की असल पहचान है. गाड़ी से उतरने के बाद वो शख्स सड़क पर झाड़ू लगाना शुरू कर देता है. नाम है सेसप्पा.
जिस गाड़ी को लोग अक्सर रुतबे और पैसे की निशानी मानते हैं, उसी से उतरकर सेसप्पा शहर की सफाई के काम में लग जाते हैं. आपको इस कहानी तक भले ही फॉर्च्यूनर खींच कर लाई हो, लेकिन असल बात वो जिंदगी है, जो इस आदमी ने पीछे छोड़कर यहां तक का सफर तय किया है. कभी 50 रुपये रोज की कमाई थी. शराब की लत ने जिंदगी को मुश्किल मोड़ पर पहुंचा दिया था. पिता के अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे. फिर एक मुलाकात हुई. जिंदगी बदली. शराब छूटी. मेहनत शुरू हुई. और आज वही सेसप्पा सुबह-सुबह सड़क पर झाड़ू लगाते नजर आते हैं... लेकिन फॉर्च्यूनर से.
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सोशल मीडिया पर फॉर्च्यूनर और झाड़ू का यह विरोधाभास लोगों को चौंका रहा है. उनके तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. लेकिन सेसप्पा की कहानी बताती है कि आदमी की ऊंचाई उसकी गाड़ी से नहीं, उसके संघर्ष से तय होती है. और कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता. उसे करने का हौसला बड़ा होता है. आइये जानें क्या है सेसप्पा के हिस्से की कहानी.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि, सेसप्पा सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर से उतरकर सड़क पर झाडू लगाते नज़र आते हैं. पहली नजर में उनकी गाड़ी देखकर कोई भी उन्हें एक रसूखदार शख्स समझ सकता है. लेकिन गाड़ी से उतरने के बाद वह सीधे अपने काम में जुट जाते हैं. वह सड़क पर झाड़ू लगाते हैं, कचरा साफ करते हैं और पब्लिक प्लेस की सफाई करते हैं.
कौन है सेसप्पा?
सेसप्पा कर्नाटका के बिस्रोड़ी गांव के रहने वाले हैं. 46 साल के सेसप्पा बंटवाल नगर परिषद में सफाई कर्मी (Civic Worker) का काम करते हैं, उन्होंने साल 1996 में नगर परिषद में काम करना शुरू किया था. उस समय उन्हें रोजाना सिर्फ 50 रुपये मजदूरी मिलती थी. नौकरी के शुरुआती दिनों में वह साइकिल से काम पर जाया करते थे. आज उनके पास टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी महंगी एसयूवी है, लेकिन उनकी रोजाना की जिंदगी और काम करने का तरीका अब भी पहले जैसा ही है.
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सेसप्पा परवा कम्यूनिटी से आते हैं. जिनका मुख्य पेशा दैव नर्तक (Daiva Narthaka) का है. ये कम्यूनिटी धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों और पूजा-पाठ के दौरान देवताओं को खुश करने के लिए नृत्य करती है. बताया जाता है कि सेसप्पा हर दिन सूरज निकलने से पहले काम पर पहुंच जाते हैं. सुबह करीब 5 बजे से उनका काम शुरू होता है और दोपहर तक वह सफाई करते हैं. यहां तक की जरूरत पड़ने पर वह दफ्तर की कचरा ढोने वाली गाड़ी भी चलाते हैं.
पिता की मौत, शराब की लत, बदहाल जिंदगी
सेसप्पा की शुरुआती जिंदगी बहुत मुश्किलों भरी थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेसप्पा की जिंदगी में एक ऐसा दर्द भी है, जिसे वह आज तक नहीं भूल पाए हैं. उनके पिता की मौत शराब पीने की वजह से हुई थी. लेकिन पिता की मौत का दुख यहीं खत्म नहीं हुआ. परिवार में हुए एक विवाद के कारण कोई रिश्तेदार उनके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं आया. उस मुश्किल वक्त में सेसप्पा को अपने पिता का शव खुद अपने कंधों पर उठाना पड़ा. उन्होंने अकेले ही अपने पिता का अंतिम संस्कार किया.
पिता की मौत के बाद उनकी जिंदगी का एक दौर ऐसा भी आया जब वह भी शराब की लत से जूझ रहे थे. इस वजह से हालात लगातार बिगड़ते गए. इसके बाद उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उन्हें पूरी तरह बदल दिया. साल 2005 में सेसप्पा की मुलाकात बेलियप्पा से हुई. उस समय बेलियप्पा बंटवाल पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे. दोनों के बीच हुई बातचीत का सेसप्पा पर गहरा असर पड़ा. इसके बाद उन्होंने शराब को हमेशा के लिए छोड़ने का फैसला किया. शराब से दूरी बनाने के बाद सेसप्पा ने अपनी जिंदगी को नए सिरे से खड़ा करने पर ध्यान दिया.
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कार की चाहत.... ऑल्टो से फॉर्च्यूनर का सफर
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सेसप्पा को हमेशा एक कार की चाहत थी. जब वो सड़क पर किसी कार वाले को देखते तो सोचते थे कि, एक दिन वो भी कार के मालिक बनेंगे. अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए साल 2006 में उन्होंनें बैक से लोन लेकर मारुति ऑल्टो 800 कार खरीदी थी. आगे चलकर उन्होंने मारुति ओमनी और फिर महिंद्रा स्कॉर्पियो एसयूवी खरीदी. अब हाल ही में उन्होंने सेकंड हैंड टोयोटा फॉर्च्यूनर एसयूवी खरीदी है, जिसे उनका बेटा भी चलाता है.
कैसी है सेसप्पा का फॉर्च्यूनर
ऑनलाइन उपलब्ध व्हीकल डिटेल्स के अनुसार, ये टोयोटा फॉर्च्यूनर 2013 की मैन्युफैक्चर्ड है और सेसप्पा इसके चौथे मालिक हैं. हाल ही में उन्होंने ये एसयूवी खरीदी है. ये फर्स्ट जेनरेशन फॉर्च्यूनर है, जिसमें 3.0 लीटर का 4 सिलिंडर डीजल इंजन दिया गया है. ये इंजन 169 बीएचपी की पावर और 343 एनएम का टॉर्क जेनरेट करता है. 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन गियरबॉक्स से लैस इस एसयूवी में 7 लोगों की बैठने की व्यवस्था है और इसमें 80 लीटर का बूट स्पेस मिलता है. सेसप्पा ने ये एसयूवी कितने में खरीदी है इसकी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन नई फॉर्च्यूनर की शुरुआती कीमत 34.76 लाख रुपये है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क