पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से जुड़े नामों और धार्मिक प्रतीकों की पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) को बड़ी सफलता मिली है. मंदिर प्रशासन ने गुरुवार को बताया कि 'जगन्नाथ धाम', 'श्रीक्षेत्र', 'महाप्रसाद', 'नीलचक्र' और 'कोइली वैकुंठ' सहित पांच और शब्दों को ट्रेडमार्क संरक्षण की प्रक्रिया में अहम मंजूरी मिल गई है.
श्रीजगन्नाथ मंदिर कार्यालय, पुरी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री द्वारा दूसरे चरण की जांच के बाद इन पांचों ट्रेडमार्क आवेदनों को आगामी ट्रेड मार्क्स जर्नल में प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है. मंदिर प्रशासन ने इसे मंदिर की विरासत और पहचान की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. मंदिर प्रशासन के अनुसार, इन नामों के ट्रेडमार्क से भगवान श्रीजगन्नाथ की पवित्र परंपराओं और उनसे जुड़े धार्मिक प्रतीकों को कानूनी संरक्षण मिलेगा. साथ ही, इनका किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलेगी.
इससे पहले पिछले महीने भी एसजेटीए को 'आनंद बाजार', 'पतितपावन' और नीलचक्र के लोगो के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन मिला था. ये रजिस्ट्रेशन ट्रेड मार्क्स अधिनियम के तहत किए गए थे. मंदिर प्रशासन ने इससे पहले जगन्नाथ संस्कृति और पुरी मंदिर से जुड़े कुल 29 नामों, शब्दों और प्रतीकों के ट्रेडमार्क के लिए अप्लाई किया था. एसजेटीए के अधिकारियों के मुताबिक, हाल के वर्षों में कुछ व्यक्ति और संस्थाएं भगवान जगन्नाथ से जुड़े पवित्र नामों और प्रतीकों का व्यावसायिक उपयोग कर रहे थे. इसी को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने इन धार्मिक पहचान चिह्नों को कानूनी सुरक्षा देने का फैसला किया.
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के दीघा में बने एक जगन्नाथ मंदिर के लिए 'जगन्नाथ धाम' नाम के इस्तेमाल के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया था. इस नाम के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद संबंधित संदर्भ हटा दिया गया. इसके बाद पुरी मंदिर प्रशासन ने प्रमुख धार्मिक नामों और प्रतीकों के ट्रेडमार्क संरक्षण की प्रक्रिया को और तेज कर दिया. मंदिर प्रशासन का मानना है कि इन नामों और प्रतीकों को कानूनी संरक्षण मिलने से श्रीजगन्नाथ संस्कृति की विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी और भविष्य में इनके अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.
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