नवरात्र के पवित्र पावन पर्व पर देशभर में रामलीलाओं का मंचन जारी है. पारंपरिक रूप से हो रही रामलीलाओं के बीच राम कथा पर आधार नाट्य प्रस्तुतियां और नृत्य नाटिकाएं भी मन मोह रही हैं. इनका कलेवर पारंपरिक रामलीला के मंचन से अलग हटकर शास्त्रीय अधिक है और यही इसकी खासियत भी है. राजधानी दिल्ली का पीतमपुरा इलाका ऐसी ही एक प्रस्तुति से रूबरू हो रहा है, जहां श्रीराम कथा का एक अलग ही भव्य स्वरूप देखने को मिल रहा है.
यह ब्रॉडवे रामलीला, 10 दिनों तक चलने वाला कथाक्रम का मंचन नहीं है, बल्कि श्रीराम के जीवन व्यक्तित्व और उनकी कथा को आधार मानकर रचा गया एक लंबा नाटकीय मंचन है. जिसमें रामकथा के प्रमुख आयाम हैं और यह सिर्फ इतनी ही कथा नहीं बताता कि श्रीराम ने रावण का वध किया और बुराई पर अच्छाई की जीत हुई, बल्कि यह रामायण के मूल पात्रों के मनोभाव, उनकी स्थिति, अवस्था और परिस्थितियों के आधार पर उनके चरित्र व व्यक्तित्व की समीक्षा भी करता है.
इसीलिए इस ब्रॉडवे रामलीला 2026 की थीम, 'चरित्रों का अध्ययन' (The Study of Characters) रखी गई है. इसके तहत रामायण के प्रमुख पात्रों के व्यक्तित्व, उनकी भावनाओं और उनके जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण बदलावों को विशेष रूप से दिखाया जा रहा है.
दिल्ली के पीतमपुरा में आर्यन हेरिटेज फाउंडेशन की ओर से हो रहा यह मंचन 14 अक्टूबर से जारी है और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा. इस रामलीला में 100 से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं.
तीन घंटे की इस प्रस्तुति में आधुनिक तकनीक, संगीत, नृत्य और विजुअल इफेक्ट्स के जरिए भगवान राम की पूरी कहानी दिखाई जा रही है, जिसे देखना अलग ही स्तर का रोमांच जगाता है. इसका निर्देशन शशिधरन नायर ने किया है. शशिधरन नायर भारतीय रंगमंच के वरिष्ठ नृत्य निर्देशक, कोरियोग्राफर और कथकली कलाकार हैं. वे विशेष रूप से पौराणिक कथाओं को नृत्य-नाटिका के रूप में मंचित करने के लिए जाने जाते हैं.
कैकेयी से लेकर दशरथ तक, पात्रों की भावनाओं पर विशेष जोर
भगवान राम के वनवास की कथा को केवल एक धार्मिक प्रसंग के रूप में नहीं, बल्कि उससे जुड़े पात्रों की भावनाओं के जरिए भी प्रस्तुत किया जा रहा है. इसमें कैकेयी का एक स्नेहमयी रानी से भगवान राम के लिए वनवास मांगने वाली रानी बनना, महाराज दशरथ की एक पिता के रूप में विवशता और भगवान राम का राजपाट छोड़कर वनवास स्वीकार करने जैसे प्रसंगों को प्रमुखता दी गई है.
रामायण की कहानी से लोग पहले से परिचित हैं, लेकिन इस बार कोशिश की गई है कि दर्शक इसके पात्रों के मनोभावों और उनके फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को भी समझ सकें.
3D तकनीक से दिखाई जा रही अयोध्या और लंका
ब्रॉडवे रामलीला की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसका भव्य मंच और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शामिल है. इसमें बड़े सेट, 3D विजुअल डिजाइन, विशेष प्रकाश व्यवस्था, नृत्य, संगीत और विजुअल इफेक्ट्स के जरिए अयोध्या, वन और लंका के दृश्यों को मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया गया है. रामलीला में कलाकारों की वेशभूषा और मंच की सजावट पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. इस प्रस्तुति का उद्देश्य दर्शकों को लाइव थिएटर में सिनेमा जैसा अनुभव देना है.
सौरभ राज जैन की आवाज में सुनाई जा रही रामायण की कथा
टीवी पर महाभारत में श्रीकृष्ण बनकर छाए अभिनेता सौरभ राज जैन की आवाज भी इस मंचन में शामिल है. वह एक आधुनिक दौर के एक दादा की भूमिका में हैं रामायण की कहानी अपने पोते लव और कुश को सुनाते हैं. इस तरह रामायण की कथा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की परंपरा को भी प्रस्तुति का हिस्सा बनाया गया है.
इस मंचन के लिए 20 मूल संगीत रचनाएं तैयार की गई हैं. इनका संगीत चंद्र कमल और भरत कमल ने तैयार किया है. इनमें फेमस प्लेबैक सिंगर उदित नारायण और कैलाश खेर समेत अन्य गायकों की आवाजें शामिल हैं. संगीत, नृत्य और अभिनय के संयोजन से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को प्रस्तुत किया जा रहा है.
एक ही शाम में दिखाई जा रही संपूर्ण रामायण
फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेंद्र मित्तल के मुताबिक, ब्रॉडवे रामलीला ने एक ही शाम में संपूर्ण रामायण की कथा प्रस्तुत करने की अवधारणा को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि इतनी विस्तृत कथा को तीन घंटे में समेटना बड़ी चुनौती है. उद्देश्य है कि रामायण का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए.
इसके साथ ही महर्षि वाल्मीकि की ओर से रचित मूल कथा के प्रति निष्ठा बनाए रखने का भी प्रयास किया गया है. साल 2015 में शुरुआत होने के बाद से ब्रॉडवे रामलीला के स्वरूप में लगातार विस्तार हुआ है. साल 2020 में इसकी प्रस्तुति सिनेमाघरों तक भी पहुंचाई गई थी.
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