रायगढ़ के पारंपरिक 'जवांफूल' चावल की दिल्ली तक मांग, किसानों की बढ़ी कमाई

जिस चावल की खुशबू कभी रायगढ़ के एक छोटे से गांव तक सीमित थी, आज उसकी महक देश की राजधानी दिल्ली तक है. जबरदस्त मांग और ₹180 प्रति किलो तक की कीमत ने स्थानीय किसानों की तकदीर बदल दी है.

Advertisement
लोग गांव जाकर खरीद रहे हैं चावल (Photo-Pixabay) लोग गांव जाकर खरीद रहे हैं चावल (Photo-Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST

रायगढ़ जिले का एक छोटा सा गांव आजकल अपने अनोखे चावल की खेती की वजह से चर्चा में है. पाकरगांव के जवांफूल चावल का स्वाद लोगों को ऐसा लगा है कि ये चावल बाजार में 175 रुपये से लेकर 180 रुपये किलो तक बिक रहा है, जिससे किसानों को भी खूब फायदा हो रहा है. 

पाकरगांव के किसान सेवक राम नायक, बूंद राम नायक, निर्भय राम नायक, प्रदीप नायक और गणेश राम नायक मिलकर लगभग 10 एकड़ भूमि पर 'जवांफूल' धान की खेती कर रहे हैं. ये किसान पीढ़ियों से इस पारंपरिक किस्म को न केवल सहेज रहे हैं, बल्कि इसकी मौलिकता और गुणवत्ता को भी बरकरार रखे हुए हैं.

Advertisement

किसान बताते हैं कि अपनी बेहतरीन सुगंध, लाजवाब स्वाद और उच्च गुणवत्ता की वजह से जवांफूल धान की मांग में हर वर्ष इजाफा हो रहा है. यही कारण है कि आम धान के मुकाबले यह किस्म उन्हें कई गुना अधिक मुनाफा दे रही है.

बड़े शहरों से लेकर 'मुख्यमंत्री निवास' तक पहुंची जवांफूल चावल की महक

स्थानीय बाजारों से निकलकर जवांफूल चावल अब रायपुर और दिल्ली जैसे देश के प्रमुख महानगरों की पसंद बन चुका है. इतना ही नहीं, इस खास चावल के कद्रदान सीधे गांव पहुंचकर किसानों से खरीददारी कर रहे हैं. किसानों की मानें तो बिना रसायनों के, प्राकृतिक विधि से तैयार किए जाने और अपनी बेहतरीन गुणवत्ता की वजह से यह ग्राहकों के भरोसे पर पूरी तरह खरा उतर रहा है. यही नहीं जवांफूल चावल राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आवास तक भी भेजा जाता है. यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि यह पारंपरिक चावल अपने स्वाद,खुशबू और गुणवत्ता के मामले में कितना विशिष्ट है.
 
खरीफ सीजन में कृषकों ने धान की बोआई से पूर्व खेतों में 'ढैंचा' की हरी खाद का प्रयोग किया है. मिट्टी में ढैंचा मिलाने से उसकी प्राकृतिक उवरा शक्ति मजबूत होती है और फसल को कुदरती पोषण मिलता है, कृषि विभाग और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के जरिया किसानों को ढैंचा के बीज मुहैया कराए गए इस पहल से न केवल खेती का ख़र्च घटा है, बल्कि उपज की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »