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Success Story: लकड़ी बेचकर परिवार का गुजारा करती थी ये महिला, अब खेती से 45 हजार रुपये महीने की कमाई

साल 2015 में जब गुलबरी गो 26 साल की थीं तो सखी मंडल समूह का हिस्सा बनीं. उस दौरान उनके लिए हफ्ते में 10 रुपये भी बचा पाना मुश्किल होता था. सखी मंडल में रहकर उनकी जानकारियांबढ़ी. इस दौरान उन्होंने समूह से कर्ज भी लिया. इस जमीन पर उन्होंने खेती की शुरुआत की. आज वह रोजाना डेढ़ हजार रुपये कमा रही हैं,

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Jharkhand woman farmer success story
Jharkhand woman farmer success story

खेती-किसानी को अक्सर लोग मुनाफे वाला काम नहीं समझते हैं. इन सबके बावजूद हमारे आसपास कई ऐसे उदाहरण हैं, जिसमें खेती ने लोगों का जीवन बदल दिया है. कुछ ना करने वाले लोग अचानक इसी के माध्यम से बढ़िया मुनाफा कमाने लगे. ऐसा ही कुछ हुआ झारखंड की रहने वाली महिला किसान गुलबरी गो के साथ. कुछ साल पहले उन्हें पैसों के लिए तरसना पड़ता था. जीवनयापन के लिए वह लकड़ियां बेचा करती थीं. हालांकि, अब वह जैविक खेती के माध्यम से दिन के डेढ़ हजार यानी महीने के 45 हजार रुपये कमा रही हैं.

साल 2015 में सखी मंडल का हिस्सा बनीं

साल 2015 में जब गुलबरी गो 26 साल की थीं तो सखी मंडल समूह का हिस्सा बनीं. उस दौरान उनके लिए हफ्ते में 10 रुपये भी बचा पाना मुश्किल होता था. सखी मंडल में रहकर उनकी जानकारियां बढ़ी. इस दौरान उन्होंने समूह से कर्ज भी लिया और इस पैसे से कुछ जमीन लीज पर ली. सिंचाई और एक पंप सेट भी खरीदा. झारखंड के ही एक एनजीओ की मदद से जैविक खेती और मचान विधि से खेती करने की ट्रेनिंग ली.

घर पर ही बनाती हैं देसी खाद

15 डिसमिल जमीन गुलबरी ने गोबर से देसी खाद बनाया. ऐसे में खेतों में खाद के लिए ज्यादा रकम भी नहीं लगी. पहली बार में ही गुलबरी गो को खेती में अच्छा परिणाम हासिल हुआ. अब वह बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करने लगी हैं.

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रोजाना कमाती हैं डेढ़ हजार रुपये

आज गुलबरी गो प्रत्येक दिन सब्जी बेचकर डेढ़ हजार रुपये कमा लेती हैं. वह घर में जैविक खाद बनाने से लेकर बाजार में सब्जी बेचने तक का काम खुद करती हैं. खेती उनके आजीविका का सशक्त माध्यम बन गया है. इससे पहले वह जंगल से लकड़ी लाती थीं, उसे बेचकर अपने बच्चों को पालती थीं. अब वह एक सफल महिला किसान बन गई हैं. साथ ही अपने जैसी अन्य महिलाओं के लिए खेती-किसानी में आने की प्रेरणा बन गई हैं.

 

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