हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी से सेब के बागानों को भारी नुकसान हुआ है. बागी, रत्नारी, बलसान और चोपाल जैसे प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी से फसल बर्बाद हो गई है. बागी के एक सेब किसान ने बताया कि बर्फबारी के कारण एंटी-हेल नेट (ओले रोकने वाले जाल) पर तीन से चार इंच तक बर्फ जमा हो गई. जिससे वजन इतना ज्यादा हो गया कि बांस के सहारे भी टूट गए और कई पेड़ भी खराब हो गए हैं.
रत्नारी के सेब बागवान सतपाल चौहान ने कहा कि बर्फबारी सिर्फ पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचा रही है, बल्कि इस साल की फसल को भी बुरी तरह प्रभावित करेगी. ठंड से गुलाबी कलियां और फूल खराब होने की संभावना है. जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
बता दें कि पिछले कुछ दिनों में शिमला समेत हिमाचल के ऊंचे इलाकों में ओले भी पड़े हैं, जिससे पहले ही काफी नुकसान हो चुका है. अब इस नई बर्फबारी से स्थिति और खराब हो गई है. सतपाल चौहान ने कहा कि सेब की फसल के लिए मौसम अब बहुत अनिश्चित हो गया है. अप्रैल 2022 में भी ऐसी ही बर्फबारी हुई थी. अस्थिर मौसम में बागवानों के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं.
ऊंचाई वाले इलाकों में सेब की खेती मुख्य रूप से की जाती है. इन क्षेत्रों में सेब के फूल आने का वक्त है. इस समय ठंड और बर्फबारी से फूल और कलियां दोनों प्रभावित हो रहे हैं. अगर परागण यानी pollination नहीं हुआ तो सेब की पैदावार बहुत कम हो जाएगी. इस बीच मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में अगले कुछ दिनों तक ठंड और बर्फबारी की आशंका जताई है. ऐसे में सेब किसानों को और सतर्क रहने की जरूरत है.
बता दें कि यह लगातार दूसरा साल है जब अप्रैल में अनियमित मौसम ने हिमाचल के सेब किसानों को परेशान किया है. दरअसल, सेब हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. अगर इस साल भी फसल प्रभावित हुई तो पूरे राज्य पर इसका असर पड़ेगा.