खेती-किसानी के साथ अगर आप कमाई का कोई दूसरा विकल्प तलाश रहे हैं, तो इमू पालन के बारे में जान सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया मूल का यह विशालकाय पक्षी मांस, अंडे और तेल के लिए पाला जाता है. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य मुर्गियों से बेहतर मानी जाती है. हालांकि, इमू पालन शुरू करने से पहले इसकी जरूरतों, खर्च और बाजार की जानकारी होना जरूरी है. आइए जानते हैं कि इमू पालन कैसे किया जाता है और इससे कमाई के कौन-कौन से रास्ते खुलते हैं.
क्या है इमू और क्यों बढ़ रही है इसकी चर्चा?
इमू ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक बड़ा उड़ान न भर सकने वाला पक्षी है. इसकी लंबाई करीब 5 से 6 फीट तक हो सकती है. खेती के साथ पशुपालन करने वाले किसानों के लिए यह कमाई का एक वैकल्पिक जरिया बन सकता है. इसे मुख्य रूप से मांस, अंडे और तेल के लिए पाला जाता है. हालांकि, इसकी व्यावसायिक सफलता स्थानीय बाजार में मांग और बिक्री की व्यवस्था पर निर्भर करती है.
इमू पालन के लिए कितनी जगह चाहिए?
इमू पालन के लिए बहुत बड़े फार्म की जरूरत नहीं होती, लेकिन पक्षियों को घूमने और चलने-फिरने के लिए पर्याप्त खुली जगह चाहिए. इनके रहने की जगह सुरक्षित होनी चाहिए और बाड़ लगाना जरूरी है. साथ ही शेड, साफ पानी और मौसम से बचाव का इंतजाम भी करना होता है. जगह तय करते समय पक्षियों की संख्या और उनके बढ़ने के बाद की जरूरतों का ध्यान रखें.
इमू को क्या खिलाना पड़ता है?
इमू खेतों में घूमते हुए कीड़े-मकोड़े और छोटे जीव खा सकता है, लेकिन सिर्फ इसी पर उसका भोजन निर्भर नहीं होना चाहिए. अच्छी ग्रोथ और सेहत के लिए संतुलित दाना, हरा चारा और जरूरत के मुताबिक पोषण देना जरूरी है. पक्षियों को हर समय साफ पानी मिलना चाहिए. उनके खानपान में उम्र और शारीरिक जरूरत के हिसाब से बदलाव किया जाता है.
क्या इमू जल्दी बीमार नहीं पड़ता?
इमू की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य मुर्गियों से बेहतर मानी जाती है. इसके बावजूद यह पूरी तरह बीमारी से सुरक्षित नहीं है. गंदगी, खराब खानपान और संक्रमित पक्षियों के संपर्क से इसे भी बीमारियां हो सकती हैं. इसलिए फार्म की नियमित सफाई, नए पक्षियों को कुछ समय अलग रखना और समय-समय पर पशु चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है.
इमू के मांस से कितनी कमाई हो सकती है?
इमू पालन में मांस कमाई का एक बड़ा जरिया है. एक वयस्क इमू से मिलने वाले मांस की मात्रा उसके वजन और प्रोसेसिंग पर निर्भर करती है. एक इमू की बिक्री से करीब 20 से 30 हजार रुपये तक मिल सकते हैं. कुछ बाजारों में इमू के मांस की कीमत करीब 800 रुपये प्रति किलो बताई जाती है. हालांकि, यह कीमत हर जगह एक जैसी नहीं होती. बिक्री से पहले खरीदार और बाजार की उपलब्धता जांचना जरूरी है.
इमू का अंडा कितना बड़ा होता है?
इमू का अंडा आकार में काफी बड़ा होता है. इसका वजन करीब 500 ग्राम तक हो सकता है. एक मादा इमू सालभर में औसतन 20 अंडे दे सकती है. इन अंडों का इस्तेमाल खाने और प्रजनन के लिए किया जाता है. इनकी बिक्री से कमाई हो सकती है, लेकिन इसके लिए स्थानीय बाजार में मांग और सही खरीदार होना जरूरी है.
इमू के अंडे और तेल की भी होती है मांग
इमू के अंडे के साथ तेल की भी डिमांड काफी है. इमू के शरीर की चर्बी से तेल निकाला जाता है. इसका इस्तेमाल कुछ कॉस्मेटिक और स्किन केयर उत्पादों में किया जाता है. पारंपरिक तौर पर इसे जोड़ों के दर्द से जुड़े उत्पादों में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. हालांकि, इसके औषधीय फायदों को लेकर किए जाने वाले दावों को प्रमाणित इलाज नहीं मानना चाहिए. तेल से कमाई के लिए प्रोसेसिंग और बिक्री की व्यवस्था जरूरी है.
इमू पालन शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
इमू पालन शुरू करने से पहले केवल पक्षियों की कीमत देखकर निवेश न करें. फार्म तैयार करने, चारे, पानी, देखभाल और पशु चिकित्सा पर होने वाले खर्च का हिसाब लगाएं. साथ ही यह पता करें कि आपके आसपास इमू का मांस, अंडे और तेल खरीदने वाले उपलब्ध हैं या नहीं. इन उत्पादों की प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए जरूरी व्यवस्था भी समझें. बेहतर होगा कि शुरुआत करने से पहले पशुपालन विभाग या विशेषज्ञ से प्रशिक्षण और सलाह लें.