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'AI और डिजिटल सिस्टम को लेकर सोच बदले दुनिया', टेक महिंद्रा CEO मोहित जोशी की अपील

टेक महिंद्रा के CEO मोहित जोशी ने वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट में कहा कि देशों को अल्पकालिक सोच छोड़कर सॉवरेन डिजिटल सिस्टम पर फोकस करना होगा. उन्होंने AI को रोजगार खत्म करने वाला नहीं, बल्कि सस्ती और बेहतर सेवाएं देने वाला टूल बताया.

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टेक महिंद्रा के सीईओ मोहित जोशी. (Screengrab)
टेक महिंद्रा के सीईओ मोहित जोशी. (Screengrab)

टेक महिंद्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मोहित जोशी ने दुनिया भर के नेताओं से डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अपनी सोच बदलने की अपील की है. दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट के दौरान एक पैनल चर्चा में उन्होंने कहा कि सरकारों और संस्थानों को सिर्फ सस्ती खरीद और तुरंत फायदा देखने की सोच से बाहर आना होगा और "सॉवरेन डिजिटल सिस्टम" पर ध्यान देना होगा.

इंडिया टुडे ग्रुप की सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर (फॉरेन अफेयर्स) गीता मोहन की अगुवाई में हुई इस चर्चा में मोहित जोशी ने कहा कि किसी देश की डिजिटल व्यवस्था की सफलता सिर्फ मुनाफे से नहीं, बल्कि सही सोच और लॉन्ग टर्म प्लान से तय होती है. उन्होंने साफ कहा कि अगर AI को केवल नौकरियां घटाने या काम की रफ्तार बढ़ाने तक सीमित रखा गया, तो लोग इसकी असली ताकत को समझ नहीं पाएंगे.

यह भी पढ़ें: दुबई में 'वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट' का आगाज, 150 देशों के नेता होंगे शामिल

मोहित जोशी के मुताबिक AI का असली मकसद आम लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना होना चाहिए. उन्होंने उदाहरण दिया कि तकनीक का इस्तेमाल इस दिशा में होना चाहिए कि हर व्यक्ति को सिर्फ 10 डॉलर महीने में अच्छी और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें. उन्होंने चेताया कि अगर ऐसी सोच नहीं अपनाई गई, तो लोग AI को अवसर नहीं, बल्कि अपने रोजगार के लिए खतरा मानने लगेंगे.

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डिजिटल सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत भरोसा

मोहित जोशी ने "सॉवरेन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर" पर जोर देते हुए कहा कि इसमें नागरिक अपने डेटा के असली मालिक हों. लोगों को जरूरत के मुताबिक अपना डेटा साझा करने और काम पूरा होने के बाद उसे वापस लेने का अधिकार मिलना चाहिए. उनका कहना था कि किसी भी डिजिटल सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत भरोसा होता है, जिसे बनाना मुश्किल है, लेकिन खोना बहुत आसान.

टेक महिंद्रा का "इंडस" मॉडल

मोहित जोशी ने यह भी कहा कि आज ज्यादातर AI सिस्टम अंग्रेजी भाषा पर आधारित हैं, जिससे बड़ी आबादी तकनीक से दूर रह जाती है. इसी कमी को दूर करने के लिए टेक महिंद्रा ने "इंडस" मॉडल तैयार किया है, जो हिंदी की करीब 27 बोलियों को समझने और इस्तेमाल करने में सक्षम है, ताकि तकनीक का फायदा हर वर्ग तक पहुंच सके.

टेलीकॉम नेटवर्क में यूक्रेन का सराहनीय कदम

इस चर्चा में VEON के CEO कान टेरजियोग्लू ने भी जोशी की बातों का समर्थन किया. उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे टेलीकॉम नेटवर्क को सैटेलाइट सिस्टम से जोड़कर आम 4G मोबाइल यूजर्स तक सीधी कनेक्टिविटी पहुंचाई गई. 

मोहित जोशी ने अंत में कहा कि ग्लोबल साउथ के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन अब तकनीक अपनाने की रफ्तार पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है. उन्होंने सरकारों से अपील की कि वे ऐसे नियम और ढांचे बनाएं, जिससे तकनीक समाज के लिए एक मजबूत और बदलाव लाने वाला जरिया बन सके.

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