पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत चल रही थी, वहीं दूसरी ओर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए. अमेरिकी युद्धपोत विवादित जलक्षेत्र से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते ईरान की सैन्य ताकत के साथ आमना-सामना हो गया. अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाज इस समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी. एक नागरिक जहाज द्वारा रिकॉर्ड किए गए रेडियो मैसेज में ईरानी फाॅर्स ने कहा, 'लौट जाओ, नहीं तो निशाना बनाया जा सकता है, यह आखिरी चेतावनी है, यह आखिरी चेतावनी है.'
इस पर अमेरिकी जहाज ने जवाब दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मार्ग से गुजर रहा है और किसी तरह की चुनौती देने का इरादा नहीं है, साथ ही वह संघर्षविराम के नियमों का पालन करेगा. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अमेरिकी युद्धपोत बिना किसी टकराव के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने में सफल रहे. हालांकि, लगभग छह हफ्तों से जारी संघर्ष के बीच यह पहली बार था जब किसी अमेरिकी युद्धपोत ने इस मार्ग से गुजरने की कोशिश की. इससे पहले ईरान ने इस समुद्री रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की कोशिश
ईरान ने बीते कई हफ्तों में मिसाइल और ड्रोन के जरिए इस मार्ग पर दबाव बनाए रखा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है. ऐसे में अमेरिकी युद्धपोतों की यह कार्रवाई बेहद अहम मानी जा रही है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि दोनों युद्धपोत यूएसएस फ्रैंक ई पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी ने समुद्री मार्ग को फिर से व्यापार के लिए खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके तहत पानी के भीतर ड्रोन तैनात कर ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का काम किया जा रहा है.
कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिका नया सुरक्षित समुद्री रास्ता तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही व्यापारिक जहाजों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वैश्विक व्यापार सुचारु रूप से चल सके. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को स्वीकार नहीं करता.
ईरान करता है अलग दावा
वहीं, ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उसकी सेना ने इस पूरे घटनाक्रम में सुलझी हुई प्रतिक्रिया दी और अमेरिकी जहाजों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. साथ ही यह भी कहा गया कि इस कार्रवाई में इस्लामाबाद में चल रही बातचीत का भी असर था.
कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज में बारूदी सुरंगें बेतरतीब तरीके से बिछाई थीं, जिससे अब खुद उसे भी उनकी सटीक स्थिति का पता नहीं है. इसके चलते उन्हें हटाने में मुश्किलें आ रही हैं.
महंगा पड़ रहा वैकल्पिक रास्ता
समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण जहाजों को अब ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरना पड़ रहा है, जहां ईरान ने प्रति जहाज 20 लाख डॉलर का शुल्क प्रस्तावित किया है. यह मांग उसकी 10 सूत्रीय वार्ता शर्तों का हिस्सा बताई जा रही है.
बेनतीजा रही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत
इस बीच, पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्चस्तरीय वार्ता भी बेनतीजा रही. लंबी बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के 'अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव' को ठुकरा दिया. वहीं, ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी शर्तों के कारण समझौता नहीं हो सका. कुल मिलाकर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव और कूटनीतिक बातचीत का विफल होना, क्षेत्र में बड़े टकराव की आशंका को और बढ़ा रहा है.