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ईरान में जमीनी जंग की तैयारी में US-इजरायल... क्या है ट्रंप और नेतन्याहू का असली प्लान?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. अमेरिका सटीक हमलों, छापेमारी और रणनीतिक ठिकानों पर कब्जे की योजना बना रहा है. खार्ग द्वीप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जरूरी टारगेट हैं. बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक और युद्धपोत तैनात किए गए हैं. हालांकि खतरे भी बड़े हैं और ईरान ने कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है, जिससे युद्ध की आशंका बढ़ गई है.

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अमेरिका का फोकस ईरान की मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस को कमजोर करना है. (Photo: X/U.S. Central Command)
अमेरिका का फोकस ईरान की मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस को कमजोर करना है. (Photo: X/U.S. Central Command)

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अब ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई की तैयारी करता नजर आ रहा है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने ऐसे अभियानों की रूपरेखा तैयार की है, जो कुछ हफ्तों तक चल सकते हैं. बड़ी संख्या में अमेरिकी मरीन और सैनिक पहले ही क्षेत्र में तैनात किए जा चुके हैं, जिससे हालात तेजी से बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है. देखना ये है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप का अगला प्लान क्या होता है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई पूर्ण युद्ध नहीं बल्कि सीमित और सटीक हमलों की रणनीति है. इसमें स्पेशल फोर्सेज और पैदल सेना तेजी से कार्रवाई कर अहम ठिकानों को निशाना बना सकती है और तुरंत वापस लौटने की योजना है. इन अभियानों की अवधि 'कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों' तक हो सकती है.

निशाने पर ईरान की डिफेंस फोर्सेज
अमेरिका का फोकस ईरान की मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस और तटीय ठिकानों को कमजोर करना है. खासतौर पर खर्ग द्वीप को कब्जे में लेने या उसकी नाकेबंदी करने की योजना पर चर्चा हो रही है, जो ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है. 

इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हमला कर उन ठिकानों को खत्म करने की योजना है, जहां से जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है.

'एंड गेम' के विकल्प भी तैयार
पेंटागन ने 'अंतिम प्रहार' के तौर पर बड़े स्तर पर हमले की भी योजना बनाई है, जिसमें जमीनी कार्रवाई के साथ भारी बमबारी शामिल हो सकती है. इसमें लारक द्वीप और अबू मूसा जैसे रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करने के विकल्प भी शामिल हैं.

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ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंचकर यूरेनियम को सुरक्षित करने की बात भी सामने आई है, हालांकि बड़े हवाई हमले भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं.

अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार
अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ाई है. हजारों सैनिकों के साथ 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की कमान भी भेजी जा रही है, जिससे तुरंत हमले की क्षमता और मजबूत हो गई है.

जमीनी युद्ध में कई बड़े खतरे
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जमीनी अभियान में अमेरिकी सैनिकों को ड्रोन, मिसाइल हमलों और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से कड़ी टक्कर मिल सकती है. खासतौर पर खार्ग द्वीप जैसे इलाके बेहद संवेदनशील युद्ध क्षेत्र बन सकते हैं.

एक ओर डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वह सैनिकों को तैनात नहीं करेंगे, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन के भीतर कार्रवाई की तैयारी जारी है.

ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उसके क्षेत्र पर हमला हुआ तो वह मुंहतोड़ जवाब देगा. ऐसे में आशंका है कि कोई भी जमीनी कार्रवाई पूरे क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है. फिलहाल ये योजनाएं कागजों पर हैं, लेकिन जिस तरह से सैन्य तैयारियां हो रही हैं, उससे आने वाले हफ्तों में हालात और बिगड़ सकते हैं.

वॉशिंगटन पोस्ट ने क्या लिखा?
अब ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन को लेकर वॉशिंगटन पोस्ट में भी बड़ा दावा किया गया है. अखबार के मुताबिक अमेरिका ईरान में लंबे ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है. इन चर्चाओं के बीच ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि आधुनिक युद्धपोत USS त्रिपोली ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है जिस पर करीब 2500 मरीन सैनिक सवार हैं.

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इन सैनिकों की तैनाती उस रणनीति को बल देती हैं, जिसकी चर्चा ईरान के खिलाफ जमीनी अभियान को लेकर कई दिनों से चल रही है. USS त्रिपोली पर ट्रांसपोर्ट और स्ट्राइकर फाइटर विमानों के साथ-साथ एम्फीबियस असॉल्ट और टैक्टिकल साजो-सामान भी मौजूद है. इस असॉल्ट शिप पर मौजूद सैनिक जापान में तैनात थे और ताइवान के आसपास के इलाके में अभ्यास कर रहे थे. दो हफ्ते पहले उन्हें मिडिल ईस्ट में तैनात होने का आदेश मिला. खबर ये भी है कि त्रिपोली के अलावा USS बॉक्सर और दो अन्य जहाजों को भी मिडिल ईस्ट जाने का आदेश दिया गया है.

ये तैयारियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि जल्द अमेरिका ईरान के खिलाफ फाइनल प्लान को अंजाम दे सकता है. ट्रंप सरकार की ओर से आ रहे बयानों से भी कुछ ऐसा ही संकेत मिल रहा है. कुछ दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी जंग को लेकर बड़ा दावा किया था. रूबियो ने कहा कि युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है. माना जा रहा है कि अब अमेरिका ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए अपने फाइनल प्लान में जुट गया है.

11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले का दावा
अब तक अमेरिका हमले में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि 28 फरवरी से शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अब तक 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी लगातार ईरान को भारी नुकसान की बात कह रहे हैं. दावा ये भी है कि ईरान बातचीत का प्रयास कर रहा है. हालांकि ट्रंप के इन दावों को ईरान खारिज करता रहा है. साथ ही अमेरिकी दावों के बीच ईरान का हमला और खतरनाक हो रहा है.

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माना जा रहा है कि ईरान पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिका ने कई लेयर पर प्लान तैयार किया है और वो जल्द इसे अंजाम देकर धधकते यु्द्ध की आग को शांत करने के लिए बड़ा ऑपरेशन चला सकता है.

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