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ट्रंप का 'मैसिव आर्माडा', 4 महीने पहले सीक्रेट ऑर्डर, ऐसे हुई थी वेनेजुएला पर हमले की पूरी प्लानिंग

अमेरिका ने वेनेजुएला पर यह हमला अचानक नहीं किया बल्कि महीनों से इसकी प्लानिंग चल रही थी. अमेरिका ने हमले से पहले बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती कर रखी थी. अमेरिकी साउदर्न कमांड के अनुसार दिसंबर तक कैरेबियन में 15,000 सैनिक मौजूद थे. ड्रग तस्करी के नाम पर 35 घातक हमले किए गए. रिपोर्ट के मुताबिक इस सैन्य जमावड़े का एक प्रमुख मकसद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाना था.

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महीनों से हमले की तैयारी कर रहा था अमेरिका (Photo: ITG)
महीनों से हमले की तैयारी कर रहा था अमेरिका (Photo: ITG)

नए साल (2026) की शुरुआत को अभी 72 घंटे भी नहीं बीते हैं लेकिन इस बीच अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर ताबड़तोड़ हमला कर पूरी दुनिया को चौंका दिया. इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वेनेजुएला पर भीषण हमले के बाद वहां के राष्ट्रपति  निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी फोर्सेज ने हिरासत में ले लिया है.

कई महीनों से हमले की तैयारी कर रहा था अमेरिका

अमेरिकी मीडिया द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अचानक नहीं हुआ बल्कि इसके लिए महीनों की प्लानिंग की गई और ऑपरेशन की पूरी रूपरेखा बनाई गई. द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिका इस ऑपरेशन के लिए पिछले कई महीनों से बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़ा कर रहा था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पकड़े जाने की घोषणा से पहले ही, अमेरिका कैरेबियन क्षेत्र में इस दशक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर चुका था.

अमेरिकी सेना के United States Southern Command (SOUTHCOM) ने दिसंबर में बताया था कि कैरेबियन क्षेत्र में लगभग 15,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस तैनाती को 'मैसिव आर्माडा' यानी विशाल नौसैनिक बेड़ा बताया था.

अगस्त में ही सीक्रेट आदेश दे चुके थे ट्रंप

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रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में ट्रंप ने चुपचाप पेंटागन को दिए एक आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत उन लैटिन अमेरिकी ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ सैन्य बल प्रयोग की अनुमति दी गई, जिन्हें उनकी सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया था. इस निर्देश के बाद से अमेरिका ने ऐसे 35 घातक हमले किए, जिनका लक्ष्य नशीले पदार्थ ले जा रही नावें थीं. 

इन हमलों में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई. हालांकि, कानूनी और सैन्य विशेषज्ञों ने इन हमलों की वैधता पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि न तो अमेरिकी कांग्रेस ने इसकी अनुमति दी थी और न ही वेनेजुएला के खिलाफ युद्ध की घोषणा की गई थी. ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों का कहना है कि इस सैन्य जमावड़े का मुख्य उद्देश्य मादुरो को सत्ता से हटाना था. ट्रंप की घोषणा से कुछ घंटे पहले ही वेनेजुएला सरकार ने आरोप लगाया था कि अमेरिकी सेना ने राजधानी काराकस समेत देश के अन्य हिस्सों में हमले किए.

एक सप्ताह से लगातार सैन्य विमान भर रहे थे उड़ान

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में अमेरिकी सेना ने कैरेबियन में ट्रांसपोर्ट और कार्गो विमानों की तैनाती भी बढ़ाई. उड़ान ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, एक ही सप्ताह में C-17 हैवी-लिफ्ट सैन्य विमान कम से कम 16 बार प्यूर्टो रिको पहुंचे. ये विमान अमेरिका के न्यू मैक्सिको, इलिनॉय, वर्मांट, फ्लोरिडा, एरिज़ोना, यूटा, वॉशिंगटन स्टेट और जापान के सैन्य अड्डों से उड़ान भर रहे थे.

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इसके अलावा, अमेरिका ने विशेष अभियान विमानों को भी कैरेबियन में तैनात किया.अक्टूबर से एक नेवी एक्सपेडिशनरी स्ट्राइक ग्रुप, जिसमें हजारों मरीन, युद्धक विमान और हेलीकॉप्टर शामिल थे वो इस क्षेत्र में मौजूद रहे. नवंबर में एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी पहुंचा, जिसमें USS Gerald R. Ford और कई विध्वंसक जहाज वेनेजुएला तट से करीब 100 नॉटिकल मील दूर तैनात थे.

हालांकि, ड्रग तस्करी से जुड़ी नावों पर हमले इस कैरियर से नहीं, बल्कि ड्रोन और AC-130 गनशिप्स से किए गए, जिन्हें United States Special Operations Command नियंत्रित करता है. वहीं, United States Coast Guard ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में तेल टैंकरों का पीछा करना, उन्हें रोकना और जब्त करना भी शुरू कर दिया है.

 

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