अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका है. अमेरिकी सेना ने शुक्रवार दोपहर 3:00 बजे (भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे) ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से हवाई हमले किए.
यह लगातार सातवीं ऐसी रात है जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरानी सरजमीं को दहलाया है. इन हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संकट में आ गई है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा, "कमांडर इन चीफ (राष्ट्रपति) के निर्देशों पर ईरानी सैन्य क्षमताओं को लगातार नष्ट करने के लिए ये हमले किए गए हैं."
राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्राउंड ऑपरेशन की दी धमकी
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका अपने हवाई हमलों का दायरा बढ़ाकर ईरान के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बना सकता है. इसके साथ ही उन्होंने ईरान के तटीय क्षेत्रों या द्वीपों पर अमेरिकी सेना के जमीनी हमले (की संभावना से भी इनकार नहीं किया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दक्षिणी ईरान में चलाए जा रहे इन अभियानों का मकसद भविष्य के लिए सभी सैन्य विकल्प खुले रखना है.
यह भी पढ़ें: ईरान के पावर प्लांट-पुल क्यों उड़ा रहे ट्रंप? बदले में कतर को प्यासा मारने तैयारी में तेहरान
3 ग्रामीण शहीद, आखिरी सांस तक लड़ेंगे - ईरान के विदेश मंत्री
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने X पर एक बेहद कड़ा और भावुक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिका पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.
उन्होंने लिखा, "बंदर खमीर पुल (को पार करते समय हमारे 3 निर्दोष ग्रामीण शहीद हो गए हैं. वे पूरी तरह से बेकसूर थे, और हम उनका खून कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे. दक्षिण से उत्तर और पूर्व से पश्चिम तक- ईरान हमारा वतन है. हम अपनी धरती के एक-एक इंच की रक्षा अपनी आखिरी सांस तक करेंगे."
ईरान ने दी पूर्ण जवाबी हमले की चेतावनी
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसेन रज़ाई ने ईरानी सरकारी टेलीविजन पर सीधे शब्दों में महाविनाश की चेतावनी दी है. रज़ाई ने कहा, "यदि अमेरिकी हमले कुछ और दिनों तक जारी रहे, तो ईरान अब रक्षात्मक मोड से बाहर निकलकर 'पूर्ण पैमाने पर आक्रामक सैन्य अभियानों' के चरण में कदम रखेगा."
यह भी पढ़ें: ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए भारत दे चुका है 400 करोड़ रुपये, अब झटके में US ने टावर उड़ाया, कितना बड़ा है नुकसान?
विशेषज्ञों को डर है कि यदि ईरान ने पलटवार किया तो वह पड़ोसी अरब देशों के महत्वपूर्ण तेल ठिकानों को निशाना बना सकता है या यमन के हूती जैसे अपने सहयोगी गुटों के जरिए लाल सागर (Red Sea) में व्यापारिक जहाजों पर हमले तेज कर सकता है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई ठप हो जाएगी.