ईरान युद्ध के 19 दिन पूरे होने के बाद भी संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा, बल्कि इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. 17 मार्च को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान में 63 हमलों की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान और उसके सहयोगियों ने इजरायल समेत पूरे पश्चिम एशिया में 37 हमले किए.
हालांकि शुरुआती दिनों की तुलना में हमलों की संख्या कुछ कम हुई है, लेकिन युद्ध का फैलाव बढ़ता जा रहा है. 28 फरवरी से अब तक अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान में 1,394 हमले किए जा चुके हैं, जबकि ईरान और उसके सहयोगियों ने 784 जवाबी हमले किए हैं. इस तरह कुल हमलों की संख्या 2,178 तक पहुंच गई है.
यह आंकड़े आर्म्ड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (ACLED) के हैं, जो वैश्विक स्तर पर राजनीतिक हिंसा, विरोध प्रदर्शनों और सशस्त्र संघर्षों का रियल टाइम डेटा कलेक्ट करता है. इसमें हवाई हमले, ड्रोन हमले, मिसाइल हमले और यहां तक कि रोके गए हमलों को भी शामिल किया जाता है. एक ही स्थान पर एक दिन में कई हमले होने पर उन्हें एक ही घटना के रूप में दर्ज किया जा सकता है.
भौगोलिक दृष्टि से भी यह संघर्ष महत्वपूर्ण है. अमेरिका और इजरायल के सबसे ज्यादा हमले तेहरान और उसके आसपास के औद्योगिक व सैन्य क्षेत्रों पर केंद्रित रहे हैं. तेहरान पर अब तक 460 से ज्यादा हमले हो चुके हैं, जो कुल हमलों का लगभग एक-तिहाई है. वहीं, ईरान के न्यूक्लियर एंड वेपन रिसर्च के प्रमुख सेंटर इस्फहान पर भी 35 हमले हुए हैं.
दूसरी ओर, ईरान की जवाबी कार्रवाई का दायरा काफी व्यापक है. उसने इजरायल के अलावा खाड़ी क्षेत्र में उन देशों को निशाना बनाया है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. अब तक यह संघर्ष 13 देशों और क्षेत्रों तक फैल चुका है, जिनमें बहरीन, इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं. इजरायल पर 250 हमले दर्ज किए गए हैं, जबकि खाड़ी देशों में 390 से अधिक हमले हुए हैं.
आर्थिक असर भी तेजी से दिखाई दे रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है, लगातार हमलों का केंद्र बना हुआ है. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 72.50 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 103 डॉलर से ऊपर पहुंच गई है, यानी करीब 42 प्रतिशत की वृद्धि. इसका असर वैश्विक ईंधन कीमतों पर भी पड़ रहा है.
उत्तरी मोर्चे पर भी संघर्ष तेज हुआ है. ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर रॉकेट हमले किए, जिसके जवाब में इजरायल ने बेरूत और दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले किए. तीन सप्ताह बाद भी इस युद्ध के खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के रास्ते बंद हैं, और दोनों पक्ष अपने हमलों का दायरा बढ़ा रहे हैं. यह संघर्ष अब न केवल सैन्य, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है.