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होर्मुज खुलेगा, यूरेनियम एनरिचमेंट रुकेगा... एक पन्ने के मेमोरेंडम से थमेगी ईरान और अमेरिका की जंग!

अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद न्यूक्लियर प्रोग्राम रोकने की अवधि को लेकर है. कहा जा रहा है कि ईरान पांच साल का प्रस्ताव दे चुका है, जबकि अमेरिका यह अवधि 20 साल चाहता है. ऐसे में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है.

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क्या अमेरिका-ईरान के बीच जंग थमेगी? (Photo: AP)
क्या अमेरिका-ईरान के बीच जंग थमेगी? (Photo: AP)

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की उम्मीद नजर आ रही है. दोनों देशों के बीच 14 प्वॉइंट वाले एक नए समझौते का ड्राफ्ट तैयार हुआ है. ऐसे में माना जा रहा है कि यह जंग खत्म होने और परमाणु बातचीत का रास्ता लगभग तय होने लगा है. 

एक्सियोस की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया कि व्हाइट हाउस का मानना है कि वह ईरान के साथ एक समझौते के करीब है, जो एक पेज के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) के रूप में होगा. इसका उद्देश्य इस जंग को खत्म करना और परमाणु वार्ता के लिए विस्तृत ढांचा तैयार करना है. 

अमेरिका को उम्मीद है कि अगले 48 घंटों में ईरान कुछ अहम मुद्दों पर जवाब देगा. हालांकि, अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों मुल्कों के बीच बातचीत की यह सबसे विश्वसनीय स्थिति है.

इस प्रस्तावित समझौते में ईरान परमाणु संवर्धन (nuclear enrichment) पर अस्थायी रोक लगाना शामिल है. इसके साथ अमेरिका, ईरान से प्रतिबंध हटाएगा और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करेगा. इसके अलावा दोनों मुल्क होर्मुज से गुजरने वाले जहाजो पर लगे प्रतिबंध हटाएंगे. हालांकि, इन शर्तों का बड़ा हिस्सा अंतिम समझौते पर निर्भर करेगा. इसका मतलब यह भी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो फिर से युद्ध शुरू हो सकता है.

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व्हाइट हाउस को लगता है कि ईरान की नेतृत्व टीम में मतभेद हैं, जिससे सहमति बनाना मुश्किल हो सकता है. कुछ अमेरिकी अधिकारी अब भी संदेह में हैं कि कोई शुरुआती समझौता भी हो पाएगा या नहीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अगले 48 घंटे के भीतर सीजफायर को लेकर सहमति दे सकता है. समझौते के ड्राफ्ट के मुताबिक, ईरान न्यूक्लियर प्रोग्राम को कुछ समय के लिए रोक सकता है. लेकिन इसके बदले में अमेरिका धीरे-धीरे प्रतिबंध कम करेगा और ईरान के जब्त किए हुए अरबों डॉलर जारी करेगा.

इसके साथ ही, होर्मुज में दोनों तरफ से लगाई गई पाबंदियों में भी ढील दी जाएगी. हालांकि सबसे बड़ा विवाद न्यूक्लियर प्रोग्राम रोकने की अवधि को लेकर है. कहा जा रहा है कि ईरान पांच साल का प्रस्ताव दे चुका है, जबकि अमेरिका 20 साल की अवधि पर अड़ा हुआ है. ऐसे में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है.

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