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ईरान पर बड़े हमले की आहट! ब्रिटेन के बेस से अमेरिकी बमवर्षक ने भरी उड़ान

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है. अमेरिका ने सैन्य दबाव बढ़ाते हुए B-52 बमवर्षक तैनात किया है और ईरान को सख्त चेतावनी दी है. डेडलाइन नजदीक आने के साथ हमले तेज हो गए हैं, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की बात कही है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं.

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B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बमवर्षक विमान RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से उड़ा (Photo: Reuters)
B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बमवर्षक विमान RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से उड़ा (Photo: Reuters)

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच United States Air Force का एक B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बमवर्षक विमान मंगलवार को ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से रवाना हुआ. यह विमान हथियारों से लैस बताया जा रहा है और इसे मौजूदा हालात के बीच एक बड़े सैन्य संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं तो आज रात पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है. ट्रंप ने ईरान को वॉशिंगटन समयानुसार शाम 8 बजे तक का अल्टीमेटम दिया है, जो तेहरान में सुबह साढ़े तीन बजे के बराबर है.

अमेरिका की मांग है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगाए गए अवरोध को खत्म करे. यह जलमार्ग खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात के लिए बेहद अहम माना जाता है. ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने यह कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका ईरान के सभी पुलों और पावर प्लांट को निशाना बनाएगा.

तनाव के बीच B-52 बमवर्षक की तैनाती

जैसे-जैसे डेडलाइन करीब आती गई, ईरान पर हमले भी तेज होते गए. दिनभर में रेलवे और सड़क पुलों, एक हवाई अड्डे और एक पेट्रोकेमिकल प्लांट को निशाना बनाया गया. इसके अलावा अमेरिकी बलों ने खार्ग द्वीप पर भी हमले किए, जहां ईरान का मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल स्थित है. ट्रंप पहले भी इस क्षेत्र पर कब्जा करने की बात कर चुके हैं.

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इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है. ईरान ने कहा है कि अब वह खाड़ी क्षेत्र के देशों के बुनियादी ढांचे पर हमले करने से पीछे नहीं हटेगा. ईरान का दावा है कि उसने खाड़ी में एक जहाज और सऊदी अरब के एक बड़े पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर भी हमला किया है.

ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ कार्रवाई जारी रही, तो वह अमेरिका के सहयोगी देशों को भी निशाना बनाएगा. खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि वहां की अर्थव्यवस्था और जीवन व्यवस्था बिजली और पानी पर निर्भर है. इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में हालात को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है. एक तरफ अमेरिका अपने सैन्य दबाव को बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है.

ट्रंप की सख्त चेतावनी और डेडलाइन

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज जैसे अहम क्षेत्र को लेकर बढ़ता विवाद वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी असर डाल सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने के बाद हालात किस दिशा में जाते हैं. स्थिति तेजी से बदल रही है और दोनों पक्षों के बीच टकराव का खतरा लगातार बढ़ रहा है. आने वाले घंटे इस संकट के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
 

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