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'QUAD की ताबूत में आखिरी कील...', US ने सैन्य कमांड से INDO शब्द हटाया तो भड़के थरूर

भारत ने पिछले दशक में अपनी समुद्री रणनीति, QUAD और हिंद महासागर में अपनी भूमिका को काफी हद तक "इंडो-पैसिफिक" नैरेटिव से जोड़ा था. लेकि अब अमेरिका का यह बदलाव याद दिलाता है कि किसी भी महाशक्ति की रणनीतिक शब्दावली स्थायी नहीं होती. भारत को अपनी समुद्री शक्ति और क्षेत्रीय प्रभाव को अमेरिकी ब्रांडिंग पर नहीं छोड़ना चाहिए.

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अमेरिका ने US पैसिफिक कमांड से INDO शब्द हटा दिया है. (Photo: ITG)
अमेरिका ने US पैसिफिक कमांड से INDO शब्द हटा दिया है. (Photo: ITG)

अमेरिका के युद्ध विभाग ने घोषणा की है कि US इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) आधिकारिक तौर पर अब अपने पुराने नाम  US पैसिफिक कमांड (USPACOM) से जाना जाएगा. इस तरह उस नाम को फिर से बहाल किया जाएगा जिसके तहत यह मिलिट्री कमांड सात दशकों से भी ज़्यादा समय तक काम करती रही थी. 

कमांड ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने ऑपरेशनल इलाके के संबंध में अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भारत का गलत नक्शा भी दिखाया है. USPACOM वेबसाइट ने अपने "एरिया ऑफ़ रिस्पॉन्सिबिलिटी मैप" सेक्शन में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया है. 

नाम बदलकर अमेरिका ने 2018 में किए गए एक प्रतीकात्मक लेकिन रणनीतिक रूप से अहम बदलाव को पलट दिया गया है. तब तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने इस कमांड का नाम  US पैसिफिक कमांड से बदलकर 'यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड' कर दिया था. ये भारत-अमेरिका के बीच बढ़ती साझेदारी का प्रतीक था.  

तब अमेरिका ने उस समय हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक महत्व और प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के साथ इसके बढ़ते जुड़ाव को रेखांकित किया था. 

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि यह नाम कमांड की गहरी ऐतिहासिक जड़ों का सम्मान करता है, जिसकी स्थापना 1947 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी.

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अमेरिकी पैसिफिक कमांड का दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है. 

अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि नाम बदलने से कमांड की ऑपरेशनल भूमिका, रणनीतिक मिशन या भौगोलिक दायरे में कोई बदलाव नहीं आएगा. अमेरिका ने कहा है कि USPACOM की ज़िम्मेदारी वाला इलाका जो अमेरिका के पश्चिमी तट के पास के पानी से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है वो वैसा ही रहेगा.  विभाग ने कहा कि "क्षेत्रीय सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर एक 'आज़ाद और खुला क्षेत्र' बनाए रखने" की उसकी प्रतिबद्धता बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी. 

भारत के लिए क्या मायने हैं?

अमेरिका के इस कदम से इंडो पैसिफिक की अवधारणा को झटका लगा है. 2018 में जब पेंटागन ने US पैसिफिक कमांड के साथ इंडो जोड़ा था तो अमेरिका का ये कदम क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में भारत की बढ़ती भूमिका की वास्तविकता की पहचान थी. तब एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ और अधिक काम करना चाहता है ताकि उस देश को क्षेत्र में अपने संबंधों का विस्तार करने में मदद मिल सके, जिसमें नए समुद्री सुरक्षा अभ्यास की योजना भी शामिल है.

लेकिन अब अमेरिका ने इससे कदम खींच लिए हैं. अब "Indo" हटाने से यह संदेश जाता है कि वॉशिंगटन अपनी रणनीतिक ब्रांडिंग में भारत को पहले जैसी प्रमुखता नहीं दे रहा है. 
 
हालांकि पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि कमांड की जिम्मेदारियां, क्षेत्राधिकार और सहयोगी देशों के साथ प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं होगा. कमांड का दायरा अब भी अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक रहेगा. 

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इसलिए QUAD, भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग, मालाबार नौसैनिक अभ्यास या तकनीकी साझेदारी पर तत्काल असर पड़ने की संभावना नहीं है. 

हालांकि अमेरिका के इस कदम पर भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आई हैं. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर इस घोषणा पर एक संक्षिप्त लेकिन तीखी टिप्पणी की. "क्या यह 'क्वाड' (Quad) के ताबूत में एक और कील है?" साथ ही उन्होंने 'डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर' (Department of War) द्वारा जारी आदेश का स्क्रीनशॉट भी साझा किया. 

थरूर की प्रतिक्रिया से कुछ जानकारों की चिंताएं जाहिर हुईं कि कमांड के नाम से "इंडो" शब्द हटाने का मतलब वॉशिंगटन की इंडो-पैसिफिक रणनीति और 'क्वाड' जैसे समूहों की भूमिका के बारे में संदेश में बदलाव के तौर पर निकाला जा सकता है. 

इंडो पैसिफिक शब्द Quad (US, India, Japan, Australia) की रणनीतिक भाषा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जो मुख्य रूप से चीन की समंदर में बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए इस्तेमाल होता है. नाम हटने से सांकेतिक रूप से ही सही भारत के केंद्रीय किरदार हल्का हो सकता है.

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ़ नाम और ऐतिहासिक निरंतरता तक ही सीमित है; उनका जोर इस बात पर है कि कमांड का ढांचा, ज़िम्मेदारियां और क्षेत्रीय प्रतिबद्धताएं पहले जैसी ही रहेंगी. 
 

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