अमेरिका ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है. अमेरिका ने इन देशों पर 'धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन' का आरोप लगाते हुए 'विशेष चिंता वाले देश' के रूप में चिह्नित किया है.
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का कहना है कि 1998 में संसद से अंतर्राष्ट्र्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम पारित कानून पारित होकर लागू होने के बाद से धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने हमारी विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य रहा है.
ब्लिंकन ने पिछले हफ्ते कहा था कि इस कानून के तहत, बर्मा, चीन, क्यूबा, उत्तर कोरिया, इरीट्रिया, ईरान, निकारागुआ, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, तजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामले में 'विशेष चिंता वाले देश' हैं. अमेरिका के अंतर्राष्ट्र्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत चिह्नित सूची में शामिल होने के मायने हैं कि इन देशों में धार्मिक स्वतंत्रता का विशेष रूप से गंभीर उल्लंघन होता है.
अमेरिका पर भड़का पाकिस्तान
पाकिस्तान ने धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन मामले में विशेष चिंता का देश घोषित करने के अमेरिका के कदम को खारिज किया है. इसके साथ ही अमेरिका पर भेदभाव का आरोप लगाया है. पाकिस्तान ने अमेरिकी आकलन को खारिज करते हुए कहा कि है कि पाकिस्तान एक बहुलवादी देश है, जिसमें अंतर-धार्मिक सद्भाव की समृद्ध परंपरा है.
पाकिस्तान ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने संविधान के अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के व्यापक कदम उठाए हैं. हम अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा को सिरे से खारिज करते हैं. हमें इस बात से बेहद निराश हैं कि यह कदम जमीनी हकीकत से कोसों दूर, पक्षपातपूर्ण और मनमाने मूल्यांकन पर आधारित है. पाकिस्तान का दृढ़ विश्वास है कि धार्मिक असहिष्णुता, जेनोफोबिया और इस्लामोफोबिया की चुनौती का मुकाबला आपसी समझ और सम्मान के आधार पर किया जा सकता है.