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वेनेजुएला पर अमेरिकी स्ट्राइक से भड़के रूस-चीन... बीजिंग ने बताया 'दादागिरी', मॉस्को बोला- मादुरो को तुरंत रिहा करो

वेनेजुएला में हवाई हमलों के बाद दुनिया की दो महाशक्तियां अमेरिका के खिलाफ खुलकर सामने आ गई हैं. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है. अमेरिकी कार्रवाई को चीन ने दादागिरी बताया है. जबकि रूस ने कहा है कि मादुरो को तुरंत रिहा किया जाए.

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी कार्रवाई का चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विरोध किया.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी कार्रवाई का चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विरोध किया.

वेनेजुएला पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किए जाने पर रूस और चीन भड़क गए हैं. बीजिंग ने इसे खुले तौर पर ‘दादागिरी’ करार दिया है, जबकि रूस ने अमेरिका से मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की अपील की है. दोनों देशों ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंब बुलाने की मांग का समर्थन किया है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने बीजिंग में जारी बयान में कहा कि अमेरिका का यह कदम 'हेजेमोनिक एक्शन' है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन करता है. मंत्रालय ने कहा कि चीन इस कार्रवाई से गहरी चिंता में है और किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति के खिलाफ बल प्रयोग का कड़ा विरोध करता है.

चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका की यह कार्रवाई ना सिर्फ वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि इससे पूरे लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. चीन ने अमेरिका से मांग की है कि वो अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करे और अन्य देशों की सुरक्षा और संप्रभुता का उल्लंघन बंद करे.

चीन और वेनेजुएला के बीच गहरी रणनीतिक साझेदारी

चीन और वेनेजुएला के बीच पिछले दो दशकों से गहरी रणनीतिक साझेदारी रही है. राजनीतिक तालमेल, ऊर्जा सहयोग और अमेरिका तथा पश्चिमी देशों के प्रभाव के खिलाफ साझा रुख इस रिश्ते की बुनियाद रहे हैं. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन वेनेजुएला के तेल का बड़ा खरीदार बना हुआ है. इसके अलावा चीन ने वेनेजुएला को तेल के बदले अरबों डॉलर के कर्ज भी दिए हैं. चीन वहां का प्रमुख निवेशक और ऋणदाता है.

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रूस ने कहा- ये चिंताजनक और निंदनीय

वहीं, रूस ने अमेरिका की इस कार्रवाई को 'सशस्त्र आक्रामकता' करार दिया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य हमला किया है, जो बेहद चिंताजनक और निंदनीय है. मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमलों को सही ठहराने के लिए दिए जा रहे तर्क पूरी तरह निराधार हैं.

रूसी विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि मौजूदा हालात में सबसे जरूरी है- हालात को और बिगड़ने से रोकना और बातचीत के जरिए समाधान निकालना. रूस ने स्पष्ट किया कि लैटिन अमेरिका को 2014 में घोषित 'शांति क्षेत्र' बना रहना चाहिए और वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी, खासकर सैन्य हस्तक्षेप के अपने भविष्य का फैसला करने का पूरा अधिकार है. रूस ने वेनेजुएला की जनता के साथ एकजुटता जताते हुए वहां की बोलिवेरियन सरकार के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के प्रयासों का समर्थन किया है.

'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाएं'

रूसी विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों की उस मांग का भी समर्थन किया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाने की अपील की गई है. रूस ने कहा कि कराकस में स्थित उसका दूतावास सामान्य रूप से काम कर रहा है और वेनेजुएला में मौजूद रूसी नागरिकों के संपर्क में है. फिलहाल, किसी रूसी नागरिक के घायल होने की कोई सूचना नहीं है.

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'मादुरो को पत्नी समेत रिहा करो'

इससे पहले रूसी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से बयान जारी कर अमेरिका से अपील की गई कि वह अपने रुख पर दोबारा विचार करे और वेनेजुएला के वैध रूप से चुने गए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर एयरस्ट्राइक की और राष्ट्रपति मादुरो को देश से बाहर ले जाया गया है. इस कार्रवाई के बाद अमेरिका और रूस-चीन के बीच तनाव और गहरा होता दिख रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर बड़े टकराव की आशंका जताई जा रही है.

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