संयुक्त राज्य अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को मध्य पूर्व भेजने का फैसला किया है. यह पोत पहले से ही वहां मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन को सपोर्ट करेगा. अमेरिका के इस कदम की वजह से इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य शक्ति में भारी बढ़ोतरी होगी. अमेरिका का ये कदम डोनाल्ड ट्रंप की सौदेबाजी करने की कोशिशों को मजबूत करेगा.
यह कदम तब उठाया गया है जब ट्रंप ने कुछ दिनों पहले ईरान के साथ बातचीत की एक नई दौर की उम्मीद जताई थी. लेकिन तेहरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी के ओमान और कतर दौरे तथा अमेरिकी मध्यस्थों के साथ संदेशों के आदान-प्रदान से बातचीत आगे नहीं बढ़ी.
इधर अरब देशों ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में अमेरिका का कोई भी हमला क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है, खासकर जब गाजा में इजरायल-हमास युद्ध से मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिर है.
यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, जो दुनिया का सबसे एडवांस और बड़ा विमानवाहक है. यह युद्धपोत कैरिबियन से सीधे मध्य पूर्व की ओर रवाना होगा. यह पहले वेनेजुएला पर दबाव बनाने के लिए वहां तैनात था, जहां ट्रंप प्रशासन ने निकोलस मादुरो की सरकार पर कार्रवाई की थी. फोर्ड जून 2025 से समुद्र में है, जिसका मतलब है कि क्रू सदस्यों की तैनाती आठ महीने से ज्यादा हो जाएगी.
अब यह अब्राहम लिंकन के साथ पर्सियन गल्फ में शामिल होगा, जहां गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, फाइटर जेट्स और सर्विलांस एयरक्राफ्ट पहले से मौजूद हैं.
दुनिया के सबसे शक्तिशाली विमानवाहक के रूप में जाना जाने वाला फोर्ड 4,500 से ज्यादा क्रू सदस्यों के साथ तैनात है. इसकी रीडिप्लॉयमेंट से अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है.
ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर परमाणु समझौता नहीं हुआ तो ईरान के लिए स्थिति "बहुत दर्दनाक" होगी. उन्होंने एक साक्षात्कार में दूसरे विमानवाहक को भेजने की संभावना जताई थी.
ईरान में आंतरिक दबाव भी बढ़ रहा है. पिछले महीने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर खूनी दमन किया गया और हजारों लोगों की मौत हुई. इनकी याद में देश में 40 दिनों के शोक समारोह शुरू हो गए हैं. आने वाले दिनों में यह गुस्सा और बढ़ सकता है क्योंकि अब लंबे दमन के साथ लोग एक दूसरे से मिल रहे हैं, ऑनलाइन वीडियो में देश के अलग-अलग हिस्सों में शोक मनाने वालों को अपने मरे हुए लोगों की तस्वीरें लिए हुए इकट्ठा होते हुए दिखाया गया है.