संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में जब यूक्रेन और रूस के वार्ताकार मिले तो पूरी दुनिया की निगाहें उनपर टिकी थीं. उम्मीद थी कि जंग रोकने के लिए हो रहे इस महा-मंथन से जरूर कोई नतीजा निकलेगा. हालांकि शुरुआती नतीजे बहुत अच्छे नहीं दिख रहे.
शुक्रवार को यूक्रेन और रूस के वार्ताकारों ने जंग रोकने समेत क्षेत्रीय मुद्दे पर चर्चा के लिए मीटिंग की. हालांकि, दोनों मुल्कों के बीच किसी समझौते के संकेत नहीं मिले हैं.
बाततीच से पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि अबू धाबी में हो रही इन वार्ताओं में क्षेत्रीय विवाद सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगा. ज़ेलेंस्की के एक सहयोगी ने बताया कि यह बातचीत शनिवार सुबह (24 जनवरी) तक जारी रहने की उम्मीद है.
जंग से बेहाल है यूक्रेन
बता दें कि ये बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब रूस ने यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली पर हमले तेज कर दिए हैं. कीव जैसे बड़े शहरों में बिजली बाधित हो गई है, जबकि तापमान जीरो से नीचे बना हुआ है. जंग के कारण यूक्रेन सबसे गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है.
फरवरी 2022 में रूस की ओर से शुरू किए गए इस युद्ध को समाप्त करने के लिए कीव पर अमेरिकी दबाव बढ़ रहा है. वहीं मॉस्को की डिमांड है कि यूक्रेन पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र- डोनबास को पूरी तरह रूस को सौंप दे, तभी वह लड़ाई रोकेगा.
रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मांग है कि यूक्रेन डोनबास के डोनेत्स्क क्षेत्र का वह 20% हिस्सा भी सौंप दे जो अब भी उसके नियंत्रण में है. यह करीब 5,000 वर्ग किलोमीटर है. यूक्रेन इससे साफ इनकार कर रहा है. ऐसे में यह मुद्दा किसी भी समझौते में बड़ी बाधा बनी हुई है.
पुतिन की डिमांड मानने को तैयार नहीं जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की उन इलाकों को छोड़ने से इनकार कर रहे हैं, जिन्हें रूस चार वर्षों के भीषण और थकाऊ युद्ध के बावजूद कब्जे में नहीं ले सका है.
ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को दावोस में कहा कि अबू धाबी वार्ता युद्ध शुरू होने के बाद पहली त्रिपक्षीय बैठक है, जिसमें यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधियों के साथ अमेरिकी मध्यस्थ भी शामिल हैं.
पिछले वर्ष, रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों की 2022 के बाद पहली आमने-सामने बैठक इस्तांबुल में हुई थी. नवंबर में यूक्रेन के एक वरिष्ठ सैन्य खुफिया अधिकारी ने भी अबू धाबी में अमेरिकी और रूसी प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की थी.