3 अप्रैल को ईरान ने अमेरिकी एफ-15 (F-15) ईगल लड़ाकू विमान मार गिराया गया था. इस घटना के बाद व्हाइट हाउस में भारी तनाव पैदा हो गया था. जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पता चला कि इस घटना के बाद दो अमेरिकी पायलट लापता हैं, तो वो आपे से बाहर हो गए थे और घंटों तक अपने सहायकों पर चिल्लाते रहे.
फाइटर जेट गिरने के बाद एक पायलट को अमेरिकी बलों ने तुरंत बचा लिया था. लेकिन दूसरा पायलट ईरान में ही फंस गया था. वो 24 घंटे से ज्यादा समय तक अमेरिका में रहा. हालांकि बाद में उसे अमेरिका ने वहां से सुरक्षित निकाल लिया था.
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन में ट्रंप पायलट की गुमशुदगी को लेकर बेहद डरे हुए थे. उनके मन में 'ईरान बंधक संकट' की यादें ताजा हो गई थीं. ट्रंप को डर था कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स 'सिचुएशन रूम' में मौजूद रहे. वो पल-पल का अपडेट ले रहे थे. लेकिन ट्रंप इन बैठकों का हिस्सा नहीं थे. कहा जा रहा है कि सहायकों ने जानबूझकर ट्रंप को बैठकों से बाहर रखा. उन्हें डर था कि ट्रंप की बेसब्री फैसलों में बाधा बन सकती है. उन्हें सिर्फ फोन के जरिए खास मौकों पर जानकारी दी गई.
हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है. प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप एक 'स्थिर नेता' के रूप में बने रहे, जिसकी देश को जरूरत है.
यह भी पढ़ें: ईरान पर फिर हमले के मूड में ट्रंप! वार्ता पर सस्पेंस के बीच 'LOCKED IN' मोड में यूएस
पायलट की लोकेशन से उसे बचाया गया
अमेरिका ने 4 अप्रैल की शाम को अपने दूसरे पायलट को सुरक्षित बचा लिया था. इसे 'सूखी घास के ढेर में सुई' ढूंढने जैसा मिशन बताया गया था. सीआईए ने पायलट की सटीक लोकेशन का पता लगाया. एजेंसी ने ईरान को गुमराह करने के लिए झूठी खबरें भी फैलाईं कि पायलट मिल चुका है.