अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और वहां के नेतृत्व पर एक बार फिर तीखा हमला किया है. ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे क्योंकि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है.
उन्होंने कड़े लहजे में कहा, 'ईरान को परमाणु हथियार नहीं दिए जा सकते हैं क्योंकि वे इसका इस्तेमाल सबसे पहले इजरायल पर करेंगे, फिर मिडिल ईस्ट और यूरोप पर, और अगला नंबर हमारा होगा. हम ऐसे पागलों (Lunatics) के हाथ में परमाणु हथियार नहीं रहने दे सकते.'
इससे पहले ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए आए इस प्रस्ताव पर नाखुशी जाहिर करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि ईरान ऐसी शर्तें रख रहा है, जिन्हें अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा. व्हाइट हाउस से फ्लोरिडा रवाना होते समय ट्रंप ने कहा, 'वे समझौता तो करना चाहते हैं, लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं.'
परमाणु कार्यक्रम पर 'नो कॉम्प्रोमाइज'
ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, विशेष रूप से B-2 बॉम्बर्स के इस्तेमाल ने ईरान की कमर तोड़ दी है. उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब न नौसेना है, न वायुसेना और न ही रडार सिस्टम.
यह भी पढ़ें: ईरान में बड़ा हादसा... ऑर्डनेंस क्लियरेंस मिशन के दौरान IRGC के 14 जवानों की मौत, 2 घायल
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे ईरान को पूरी तरह खत्म करने के लिए भीषण हमला करना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, 'मानवीय आधार पर मैं ऐसा नहीं करना चाहूंगा, लेकिन हम एक ऐसी डील चाहते हैं जो समस्या को जड़ से खत्म करे.'
ईरानी नेतृत्व को 'दुष्ट' बताते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां कोई वास्तविक लीडर नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी सरकार ने दो सप्ताह के भीतर 42,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी.
होर्मुज की वजह से पैदा हुआ वैश्विक संकट
आपको बता दें कि यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के साथ शुरू हुआ था. इस जंग के बाद होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है और वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा है. होर्मजु दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस आपूर्ति का मार्ग है.
8 अप्रैल को इस जंग को लेकर सीजफायर तो जरूर हुआ लेकिन लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं जो बीते चार साल के उच्चतम स्तर पर हैं. इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है.
यह भी पढ़ें: यूरोपीय कारों पर 25 फीसदी टैरिफ, क्यूबा पर नए प्रतिबंध... फिर भड़के राष्ट्रपति ट्रंप
अब ईरान के नए प्रस्ताव की खबर के बाद कीमतों में थोड़ी गिरावट जरूर आई है. ईरान पर आर्थिक और सुरक्षा संबंधी दबाव बढ़ गए हैं. अमेरिकी नौसेना ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगा रही है और वाशिंगटन ने शुक्रवार को शिपिंग कंटेनर भेजने वालों को चेतावनी दी कि यदि वे होर्मुज में ईरान को टोल शुल्क का भुगतान किया गया तो उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि वाशिंगटन अपनी 'धमकी भरी बयानबाजी' छोड़ता है, तो वे कूटनीति के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए मुस्तैद है. इस बीच ईरान ने भी अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है और हमले की स्थिति में व्यापक जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. कहा जा रहा है कि अमेरिकी अधिकारी छोटे लेकिन तीव्र हमले की संभावना का आकलन कर रहे हैं, जिसके बाद संभवतः इजरायल भी कार्रवाई कर सकता है.