अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासियों को लेकर एक नया और बेहद विवादित प्रस्ताव पेश किया है, जिसका सीधा और बड़ा असर अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों पर पड़ सकता है. ट्रंप ने घोषणा की है कि उनकी सरकार देश की सड़कों पर दौड़ रहे बड़ी संख्या में अप्रवासी ट्रक ड्राइवरों को हटाकर उनकी जगह अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों को तैनात करेगी.
ट्रंप ने आरोप लगाया कि प्रवासियों में से अधिकांश ड्राइवर नशे की लत में डूबे हैं और सड़कों पर कई लोगों की जान ले रहे हैं. पेंसिल्वेनिया में आयोजित मिलिट्री इन्वेस्टमेंट समिट में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन गैर-कानूनी और बिना उचित दस्तावेजों के बड़े ट्रक चलाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई कर रहा है.
ट्रंप ने कहा, "मेरा प्रशासन जल्द ही अवैध विदेशी ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई करेगा, जो सड़कों पर कई लोगों की जान ले रहे हैं. वे सड़कों पर लगे साइन बोर्ड तक नहीं पढ़ सकते. उनमें से कई ड्रग्स या शराब के नशे में होते हैं. वे पूरी तरह से अवैध रूप से देश में आए हैं, और हम उन्हें अमेरिकी सड़कों पर गाड़ियां चलाते हुए नहीं देखना चाहते."
ट्रंप ने आगे कहा कि इन ड्राइवरों की जगह गर्वित अमेरिकी दिग्गजों को दी जाएगी. प्रस्ताव के तहत, सेना में भारी ट्रक चलाने का अनुभव रखने वाले किसी भी अमेरिकी नागरिक को बिना किसी परेशानी के सीधे कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) जारी कर दिया जाएगा.
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2 लाख प्रवासियों के लाइसेंस पहले ही हो चुके हैं रद्द
यह कोई हवाई घोषणा नहीं है, बल्कि ट्रंप प्रशासन इस पर पहले से ही एक बड़ा क्रैकडाउनकर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी साल मार्च में नए नियमों के तहत लगभग 2,00,000 अप्रवासी ड्राइवरों के कमर्शियल लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जिनके पास पहले अमेरिका में रहने और काम करने का कानूनी अधिकार था. द
रअसल, अमेरिकी नागरिकों द्वारा ट्रक ड्राइविंग से दूरी बनाने के कारण हाल के वर्षों में वैध और अवैध दोनों तरह के प्रवासियों के लिए यह सेक्टर मोटी कमाई का जरिया बन गया था.
भारतीय समुदाय, खासकर सिख और पंजाबी ड्राइवरों को लगेगा तगड़ा झटकानॉर्थ अमेरिकन पंजाबी ट्रकर्स एसोसिएशन (NAPTA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय अमेरिका में करीब 1.3- 1.5 लाख ट्रक ड्राइवर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले हैं.
यदि ट्रंप का यह नया प्रस्ताव पूरी तरह लागू होता है, तो इन परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा संकट आ जाएगा. भारतीय मूल के ट्रक चालक पहले से ही सरकार के कड़े फैसलों, जैसे- अनिवार्य अंग्रेजी दक्षता परीक्षा और नए दलीला कानून की मार झेल रहे हैं.