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लौट कर ट्रंप टैरिफ पर आए, फार्मा पर 100% का दिया झटका, लेकिन कई मेटल्स पर 50% से घटाकर किया 25

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी में बदलाव करते हुए दो बड़े फैसले लिए हैं. पहला, अगर कंपनियां दवाओं की कीमत कम नहीं करती हैं और उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट नहीं करतीं हैं तो विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. दूसरा, स्टील और एल्युमिनियम जैसे मेटल उत्पादों के टैक्स नियमों में बदलाव किया गया है.

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अब अमेरिका में ही बनानी होंगी विदेशी पेटेंट दवाइयां (Photo: AFP)
अब अमेरिका में ही बनानी होंगी विदेशी पेटेंट दवाइयां (Photo: AFP)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेड पॉलिसी में बड़ा फेरबदल करते हुए विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% तक का भारी टैक्स (टैरिफ) लगाने का आदेश दिया है. इस फैसले का सीधा असर उन फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी दवाइयां अमेरिका के बाहर बनाती हैं. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि कंपनियों को न सिर्फ अपनी दवाओं की कीमतें कम करनी होंगी, बल्कि उनका उत्पादन भी अमेरिका के अंदर ही करना होगा. जो कंपनियां इन शर्तों को पूरी तरह नहीं मानेंगी, उन पर भारी जुर्माना और टैक्स लगाया जाएगा.

इसके साथ ही, ट्रंप ने स्टील, एल्युमिनियम और तांबे जैसे मेटल उत्पादों के टैक्स नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है, जिसमें कई सामानों पर टैरिफ की दरें घटाई गई हैं और टैक्स वसूलने का तरीका भी बदल दिया गया है.

इस नए नियम के मुताबिक, जो कंपनियां आंशिक रूप से अपना उत्पादन अमेरिका शिफ्ट करेंगी, उन्हें 20% टैक्स देना होगा. वहीं, आदेश का पालन न करने वाली कंपनियों पर 100% की दर से टैरिफ वसूला जाएगा. ट्रंप का मानना है कि इस कदम से न केवल दवाइयां सस्ती होंगी, बल्कि देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियों के नए अवसर भी पैदा होंगे. हालांकि, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे व्यापारिक भागीदारों के लिए इस टैक्स की सीमा 15% तय की गई है.

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दवाइयों के साथ-साथ ट्रंप ने स्टील, एल्युमिनियम और तांबे (कॉपर) पर लगने वाली ड्यूटी में भी बड़े बदलाव किए हैं. कई मेटल उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को 50% से घटाकर 25% कर दिया गया है. इसके अलावा, जिन उत्पादों में मेटल की मात्रा 15% से कम है, उन्हें टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है. यह बदलाव घरेलू उद्योगों को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराने और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के इरादे से किया गया है.

ये जो 100% टैक्स वाला नया आदेश आया है, इसके पीछे एक बड़ी वजह है. दरअसल, एक साल पहले ट्रंप ने 'मुक्ति दिवस' (Liberation Day) के नाम पर एक खास कानून (IEEPA) के तहत पूरी दुनिया पर भारी टैक्स लगा दिया था. इससे दूसरे देश भड़क गए और मामला अदालत पहुंच गया. इसी साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के उन पुराने टैक्सों को अवैध यानी गैरकानूनी करार दे दिया. अब हालत ये है कि सरकार को करीब 166 अरब डॉलर उन लोगों को वापस करने पड़ रहे हैं जिनसे ये टैक्स वसूला गया था. अब इसी भारी नुकसान की भरपाई करने और अपनी बात ऊपर रखने के लिए ट्रंप ये नए नियम लेकर आए हैं.

दवा कंपनियों को अल्टीमेटम: 120 दिन में बदलनी होगी रणनीति

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ट्रंप प्रशासन ने बड़ी फार्मा कंपनियों को इन नए नियमों को लागू करने के लिए 120 दिन का समय दिया है, जबकि छोटी कंपनियों को 180 दिन की मोहलत मिली है. इस अवधि के बाद ही सबसे ऊंची टैक्स दरें प्रभावी होंगी. सरकार का कहना है कि यह 'रीसेट बटन' दबाने जैसा है, जिससे पुराने व्यापारिक घाटे की भरपाई की जा सके और अमेरिकी बाजार को विदेशी कंपनियों की मनमानी से बचाया जा सके.

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दूसरी तरफ, व्यापारिक संगठनों ने इस पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अचानक टैक्स बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ सकती है. खासकर ऐसे समय में जब ऊर्जा संकट के कारण पहले से ही महंगाई का दबाव है, इन नए टैरिफ का असर आम जनता की जेब पर पड़ सकता है. हालांकि, स्टील इंडस्ट्री ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे घरेलू उत्पादन के लिए एक संजीवनी बताया है.

कुल मिलाकर, ट्रंप के इन फैसलों ने ग्लोबल ट्रेड मार्केट में हलचल पैदा कर दी है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि विदेशी कंपनियां इन कड़े नियमों के आगे झुकती हैं या फिर अमेरिकी बाजार में कीमतों का नया दौर शुरू होता है. सरकार का दावा है कि ये कदम अमेरिका को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे.
 

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