अमेरिका ने 3 जनवरी की सुबह वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर धावा बोला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पत्नी सिलिया फ्लोरेस सहित बंदी बना लिया. अमेरिकी सैनिक मादुरो और उनकी पत्नी को लेकर न्यूयॉर्क आए, जहां उन्हें अब अमेरिकी कानून के तहत मुकदमे का सामना करना होगा. ट्रंप प्रशासन ने मादुरो पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल्स के साथ मिलकर अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध प्रवासियों की घुसपैठ कराने का आरोप लगाता रहा है.
अमेरिका ने मादुरो को पकड़ने के लिए 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' चलाया था. इसका मतलब हुआ किसी काम को करने के लिए पूरी तरह समर्पित होना. यह कोई अचानक किया गया हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे बहुत लंबी प्लानिंग थी. अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी तक ले जाने वाले गुप्त सैन्य अभियान से जुड़े नए विवरण सार्वजनिक किए हैं. वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार यह अभियान अभूतपूर्व और अत्यधिक सटीकता के साथ अंजाम दिया गया, जिसमें 150 से अधिक विमान (हेलीकॉप्टर और जेट) शामिल थे.
पिछले कई महीनों से अमेरिकी सेना वेनेजुएला के तट के पास अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही थी. इस दौरान कथित ड्रग तस्करी में इस्तेमाल होने वाली नौकाओं पर हवाई हमले किए गए और उनमें सवार लोगों को मार गिराया गया. इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियां वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर बारीकी से नजर रखे हुए थीं. उनकी दिनचर्या, खाने-पीने की आदतों तक का अध्ययन किया गया, जबकि अमेरिका की स्पेशल फोर्स गुप्त रूप से उन्हें सत्ता से हटाने की योजना पर काम कर रही थी. कई महीनों की गोपनीय तैयारी के बाद 3 दिसंबर की सुबह इस साहसिक अभियान को अंजाम दिया गया.
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ट्रंप ने आदेश दिया और सिर्फ 5 घंटे में ऑपरेशन पूरा
अमेरिकी सेना ने इस दक्षिण अमेरिकी देश की राजधानी काराकस की बिजली व्यवस्था ठप कर दी, राष्ट्रपति आवास में घुसपैठ की और निकोलस मादुरो को पकड़कर न्यूयॉर्क ले गए, जहां उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने घर 'मार-ए-लागो' में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का विवरण दिया. उनके मुताबिक, मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बंदी बनाने के बाद हेलीकॉप्टर से कैरेबियन सागर में स्थित अमेरिकी युद्धपोत पर ले जाया गया.
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' तभी शुरू किया गया जब मौसम की स्थिति अनुकूल हो गई, जिससे हेलीकॉप्टर और विमान बिना किसी की नजर में आए वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर सके. योजना के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन की हूबहू नकल तैयार की गई थी और विशेष उपकरणों से लैस स्पेशल फोर्स के जवानों को इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए भेजा गया था.
अमेरिकी सैनिकों के पास 'ब्लोटॉर्च' थे. यदि सेफ रूम की स्टील दीवारों को काटकर मादुरो और उनकी पत्नी को बाहर निकालना पड़ता, तो अमेरिकी सैनिक इसका इस्तेमाल करते. हालांकि, इसकी जरूरत नहीं पड़ी. अभियान शुरू होने के 30 मिनट से भी कम समय में, मादुरो और उनकी पत्नी, सिलिया फ्लोरेस, अमेरिकी हिरासत में थे और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया. ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, 'मादुरो सुरक्षित कमरे (स्टील सेफ) में पहुंच भी नहीं पाए. अमेरिकी सुरक्षा बल इतनी तेजी से अंदर घुसे कि उन्हें मौका ही नहीं मिला. वह उस जगह को बंद नहीं कर पाए. वह उसमें घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इतनी तेजी से हमला हुआ कि वह अंदर नहीं जा सके.'
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सावधानीपूर्वक प्लान और एग्जीक्यूट किया गया मिशन
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए स्पेशल फोर्स के जवानों ने महीनों तक ट्रेनिंग की. मादुरो की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों, उनके कपड़ों और यहां तक कि पालतू जानवरों तक की जानकारी जुटाई गई. उन्होंने कहा, 'हमने बार-बार अभ्यास किया ताकि गलती की कोई गुंजाइश न रहे.' जनरल डैन केन ने बताया कि 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 जनवरी की रात 10:46 बजे (Eastern Standard Time) हरी झंडी दी. जनरल केन ने कहा कि इस तरह के साहसिक मिशन को सिर्फ संयुक्त राज्य अमेरिका ही अंजाम दे सकता था. उन्होंने कहा कि इसमें अमेरिकी सेना की वायु, थल, समुद्र, अंतरिक्ष और खुफिया क्षमताओं का ऐसा समन्वय किया गया, जो बहुत कम देखने को मिलता है.
उन्होंने बताया कि इस अभियान में F-22, F-35, F-18, EA-18, E-2, B-1 बॉम्बर जैसे विमान, चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर समेत अन्य एयरक्राफ्ट और बड़ी संख्या में ड्रोन शामिल थे. जनरल केन के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा बल 2 और 3 जनवरी की मध्य रात्रि 1:01 बजे (कराकस के स्थानीय समयानुसार 2:01 बजे) वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन परिसर में तेजी, सटीकता और अनुशासन के साथ दाखिल हुए और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया. इसके आधे घंटे के अंदर उन्होंने मादुरो और उनकी पत्नी को बंदी बना लिया और दोनों को लेकर कैरेबियन सागर में खड़े अमेरिकी युद्धपोत के लिए उड़ान भरी.
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राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि मौसम खराब होने के कारण ऑपरेशन को चार दिन तक टालना पड़ा. मौसम अनुकूल होने के बाद हेलीकॉप्टर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए वेनेजुएला में दाखिल हुए. उन्हें अमेरिकी एयरफोर्स के विमानों ने कवर दिया. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक यह एक बड़ा 'जॉइंट मिलिट्री एंड लॉ एंफोर्समेंट' ऑपरेशन था, जो 30 मिनट से भी कम समय में पूरा हो गया. काराकस में कम से कम 7 विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन में कुछ अमेरिकी सैनिक घायल हुए, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई. जनरल केन ने बताया कि एक हेलीकॉप्टर पर गोलीबारी हुई, लेकिन वह सुरक्षित लौट आया.
वेनेजुएला ने अमेरिकी अभियान में 40 मौतों का दावा किया
वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने दावा किया कि इस कार्रवाई में नागरिकों और सैन्यकर्मियों समेत 40 लोग मारे गए. सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में रोड्रिग्ज ने अमेरिका से मादुरो को रिहा करने की मांग की और उन्हें देश का वैध नेता बताया. साथ ही उन्होंने अमेरिका के साथ संवाद की संभावना खुली रखी और कहा, 'हम सम्मानजनक संबंध रखने को तैयार हैं.' वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ने मादुरो की अनुपस्थिति में डेल्सी रोड्रिग्ज को देश का अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया है.