मुस्लिम बहुल पश्चिम अफ्रीकी देश सिएरा लियोन में खतना कराने से तीन बच्चियों की मौत हो गई हैं. स्थानीय मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, तीनों बच्चियों की मौत देश के उत्तर पश्चिमी प्रांत में हुई है जिसे लेकर अब पुलिस जांच में जुट गई है.
ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने कहा कि पिछले महीने एडमसे सेसे (12 साल), सलामतु जोल्लाह (13 साल) और कदियातु बंगारू (17 साल) की खतना के दौरान मौत हो गई. इसे लेकर हुए हंगामे के बाद पुलिस ने कई गिरफ्तारियां की है.
पुलिस हिरासत में माता-पिता
सिएरा लियोन में खतना की रोकथाम के लिए काम करने वाले संगठन फोरम अगेंस्ट हार्मफुल प्रेक्टिसेज (FAHP) की कार्यकारी सचिव अमीनता कोरोमा ने जानकारी दी कि बच्चियों के माता-पिता और जिन लोगों ने उनका खतना किया था, सभी पुलिस की हिरासत में हैं.
खतना जिसे FGM (Female Genital Mutilation) कहा जाता है, एक प्रक्रिया है जिसमें महिला के जननांग के बाहरी हिस्से को काटकर अलग कर दिया जाता है. अक्सर ये काम गैर प्रशिक्षित लोग करते हैं. खतना के लिए रेजर ब्लेड या सामान्य ब्लेड का इस्तेमाल किया जाता है.
संयुक्त राष्ट्र इसे मानवाधिकारों का हनन मानता है. साल 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पास कर खतना पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन अभी भी 92 देशों में खतना किया जाता है.
अनुमानों के मुताबिक, दुनियाभर की लगभग 20 करोड़ महिलाओं और लड़कियों का खतना हुआ है. यूनिसेफ अगले महीने खतना को लेकर नए आकंड़े जारी करने वाला है.
बिना एनीस्थीसिया के बच्चियों का खतना
कई मुस्लिम समुदायों के बीच खतना का चलन है. खतना के बहुत से मामलों में बच्चियों को एनीस्थीसिया भी नहीं दिया जाता और पूरे होश में उनका खतना चाकू या ब्लेड से कर दिया जाता है.
इस प्रक्रिया के दौरान कई बच्चियों की मौत हो जाती है. खतना का लड़कियों की मानसिक सेहत पर भी बुरा असर होता है.
क्या भारत में चलन में है खतना?
भारत में खतना का चलन बोहरा मुस्लिम समुदाय में है. गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में रहने वाले इस समुदाय के लोगों के बीच क्लिटरिस यानी जननांग के बाहरी हिस्से को 'हराम की बोटी' कहा जाता है.
समुदाय के मुस्लिमों का मानना है कि अगर क्लिटरिस को नहीं काटा गया तो लड़की की यौन इच्छा बढ़ेगी और वो शादी से पहले किसी से शारीरिक संबंध बना सकती है.
खतना को कनाडा, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन, अमेरिका जैसे देश गैर-कानूनी घोषित कर चुके हैं लेकिन भारत में इसे लेकर कोई कानून नहीं है. इस संबंध में महिला और बाल कल्याण मंत्रालय का कहना है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के पास खतना से जुड़ा कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है इसलिए सरकार इसे रोकने को लेकर कानून नहीं बना सकती.