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आखिरकार रूस की मिडिल ईस्ट युद्ध में एंट्री! ईरान को सौंप दी US से जुड़ी खुफिया जानकारी

ईरान-अमेरिका टकराव के बीच रूस की एंट्री ने संघर्ष को और खतरनाक बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मॉस्को ने तेहरान को ऐसी खुफिया जानकारी दी है जिससे वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हथियारों को निशाना बना सकता है. अगर यह सहयोग खुलकर सामने आया तो मिडिल ईस्ट का युद्ध और फैल सकता है.

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रूस के इस कदम से मिडिल ईस्ट का युद्ध और फैल सकता है (फाइल फोटो)
रूस के इस कदम से मिडिल ईस्ट का युद्ध और फैल सकता है (फाइल फोटो)

ईरान-यूएस जंग से दूरी बनाए दिख रहा रूस आखिरकार दोस्त की मदद के लिए आगे आ गया है. अब उसने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जिससे तेहरान को अमेरिकी सेना पर हमला करने में मदद मिल सकती है. अगर ऐसा हुआ तो ईरान अपने हमलों से अमेरिका और इजरायल को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि, रूस के इस कदम की भनक अमेरिका को भी लग चुकी है.

न्यूज एजेंसी एपी की खबर के मुताबिक, रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जिससे तेहरान को अमेरिकी सेना पर हमला करने में मदद मिल सकती है. दो अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जो तेहरान को क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य संपत्तियों पर हमला करने में मदद कर सकती है.

हालांकि, यह पहला संकेत है कि मॉस्को ने उस युद्ध में शामिल होने की कोशिश की है जिसे अमेरिका और इजरायल ने एक हफ्ते पहले ईरान के खिलाफ शुरू किया था.

रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अपने चार साल के युद्ध में इस्तेमाल करने के लिए मिसाइलों और ड्रोन की सख्त जरूरत के चलते ईरान के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं. वहीं, तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज़्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे प्रॉक्सी समूहों के समर्थन के कारण वर्षों से अलग-थलग पड़ा है, ऐसे में रूस का सपोर्ट उसके लिए बड़ी बात होगी.

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पुतिन की ईरान के प्रेसिडेंट से बात

इतना ही नहीं, रूसी प्रेसिडेंट पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन से बात भी की थी. उन्होंने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमले से कई आम लोगों के मारे जाने पर दुख जताया. युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की तरफ से ईरान को यह पहला फोन कॉल था. पुतिन ने दुश्मनी तुरंत खत्म करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े या मिडिल ईस्ट में उठने वाले किसी भी मुद्दे को हल करने के लिए ताकत का इस्तेमाल न किया जाए, और डिप्लोमैटिक हल के रास्ते पर तेजी से लौटा जाए.

अमेरिका का आया बयान

रूस के ईरान को मिलिट्री एसेट्स के बारे में जानकारी देने पर अमेरिका का बयान भी आया. इसमें कहा गया कि इससे ईरान में मिलिट्री ऑपरेशन्स पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि हम उन्हें पूरी तरह से खत्म कर रहे हैं. हम इस ऑपरेशन के मिलिट्री मकसद पूरे कर रहे हैं और यह जारी रहेगा.

बता दें कि ईरान की सैन्य ताकत को अमेरिका और इजरायल पूरी ताकत से तहस नहस करने में जुटे हैं, हर दिन ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, बकायदा हमले के वीडियो जारी किए जा रहे हैं.

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लेकिन सवाल यही है, ट्रंप की धमकी के आगे जीते जी खामेनेई नहीं झुके तो उनकी मारे जाने के बाद अब ईरान झुकने को तैयार होगा या नहीं. फिलहाल तक ईरान के तेवरों से ऐसा नहीं लगता.

ईरान लगतार इजरायल और मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है. ईरान ने इजराइल समेत अब तक 12 देशों पर हमला किया है. इन देशों में UAE, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया और अजरबैजान शामिल हैं. ईरान ने खोर्रमशहर 4, खेबर और फतेह मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. खबर ये भी है कि इजरायल पर उसने कई ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिनमें क्लस्टर बम लगे थे.

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