जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से निकला एक युवक, जो कभी आम जिंदगी जी रहा था, बाद में पाकिस्तान पहुंचकर आतंक की दुनिया का बड़ा चेहरा बन गया. यही था अरजुमंद गुलजार डार, जिसे लोग हमजा बुरहान और "डॉक्टर" के नाम से भी जानते थे. अब खबर है कि पाकिस्तान में उसकी हत्या कर दी गई है. बताया जा रहा है कि किसी अज्ञात हमलावर ने उसे मार गिराया. वह पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में रह रहा था और वहां खुद को एक शिक्षक बताता था, लेकिन पर्दे के पीछे वह आतंकी नेटवर्क चला रहा था.
अरजुमंद गुलजार डार का नाम लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था. भारत सरकार ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया था. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वह पुलवामा के खरबतपोरा रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था और साल 1999 में पैदा हुआ था. उसके पिता का नाम गुलजार अहमद डार बताया गया है.
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गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर मिली जानकारी के मुताबिक, अरजुमंद गुलजार डार वैध दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तान गया था. वहां पहुंचने के बाद उसने आतंकी संगठन अल-बद्र जॉइन कर लिया. यही नहीं, वह धीरे-धीरे संगठन का सक्रिय कमांडर बन गया और पाकिस्तान से ही आतंकवादी गतिविधियों को ऑपरेट करने लगा.
भारत सरकार के रिकॉर्ड में उसके खिलाफ कई गंभीर आरोप दर्ज थे. जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह जम्मू-कश्मीर में युवाओं को आतंकवादी संगठनों में भर्ती होने के लिए उकसाता था. सोशल मीडिया और स्थानीय नेटवर्क के जरिए वह कट्टरपंथी विचार फैलाने में सक्रिय था. सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि उसने कई युवाओं को अल बद्र में शामिल करवाने में भूमिका निभाई.
उसका नाम पुलवामा में ओवर ग्राउंड वर्कर्स के पास से विस्फोटक बरामद होने के मामलों में भी सामने आया था. इसके अलावा नवंबर 2020 को पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए ग्रेनेड हमले से भी उसका संबंध बताया गया. जांच में कहा गया कि वह आतंकियों को फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में भी शामिल था.
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भारत सरकार ने जब उसे आतंकवादी घोषित किया था, तब आधिकारिक अधिसूचना में साफ लिखा गया था कि वह पाकिस्तान से संचालित होकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. सरकार का मानना था कि वह सिर्फ एक आतंकी नहीं, बल्कि एक ऐसा ऑपरेटर था जो आतंकवादी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था.
हमजा बुरहान का नाम इसलिए भी ज्यादा चर्चा में रहा क्योंकि उसका संबंध पुलवामा क्षेत्र से था, जहां साल 2019 में देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक हुआ था. उस हमले में 40 से ज्यादा सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. हालांकि इस इनपुट में सीधे तौर पर उस हमले में उसकी भूमिका का आधिकारिक जिक्र नहीं है, लेकिन सुरक्षा हलकों में उसे लंबे समय से कश्मीर में सक्रिय आतंकी ढांचे का अहम हिस्सा माना जाता रहा.
पाकिस्तान में रहते हुए उसने खुद को "टीचर" की पहचान देने की कोशिश की, ताकि उसकी गतिविधियों पर ज्यादा शक न हो. लेकिन भारतीय एजेंसियों का दावा था कि वह लगातार आतंकी गतिविधियों में शामिल था और पाकिस्तान की जमीन से भारत विरोधी ऑपरेशन चला रहा था.