राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस सप्ताह के अंत में इजराइल, जॉर्डन और फलस्तीन की यात्रा पर जाएंगे. मुखर्जी दोनों विरोधी देशों इजराइल और फलस्तीन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय राष्ट्राध्यक्ष होंगे. इस यात्रा से मुखर्जी को दोनों देशों के नेतृत्व को तनाव कम करने के लिए प्रेरित करने का अवसर मिलेगा.
भारतीयों की रिहाई की अपील कर सकते हैं मुखर्जी
आगामी 10 अक्टूबर से शुरू हो रही छह दिवसीय यात्रा के पहले चरण में सबसे पहले जॉर्डन जाएंगे, जहां वह इराक के मोसुल कस्बे में आईएसआईएस द्वारा बंधक बनाये गये 39 भारतीयों की रिहाई सुनिश्चित करने में मदद की अपील कर सकते हैं. राष्ट्रपति जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला से मिलेंगे और परस्पर हित के क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तथा व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों पर गहन चर्चा करेंगे. मुखर्जी यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्डन जाएंगे और शिक्षकों एवं छात्रों को संबोधित करेंगे. वह भारतवंशी समुदाय के लिए अम्मान में भारतीय राजदूत द्वारा आयोजित समारोह में शिरकत करेंगे.
नेसेट में होगा राष्ट्रपति का संबोधन
12 अक्टूबर को फलस्तीन के लिए रवाना होंगे और फिर 13 अक्टूबर से तीन दिन के लिए इजराइल जाएंगे. विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) अनिल वाधवा ने राष्ट्रपति की आगामी ऐतिहासिक यात्रा पर जानकारी दी, ‘यह इजराइल की पहली राजकीय यात्रा है जो संपूर्ण दस्तूरों के साथ होगी.’ राष्ट्रपति की इजराइल यात्रा में वहां की संसद नेसेट में उनका संबोधन विशेष रूप से शामिल है जो किसी मेहमान नेता के लिए दुर्लभ सम्मान है.
एमओयू पर होंगे दस्तखत
वाधवा ने कहा, ‘अतीत में अन्य कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने इजराइल की यात्रा की होगी लेकिन बहुत से नेताओं को नेसेट को संबोधित करने का सम्मान नहीं मिला
होगा.’ मुखर्जी अपने इजराइल समकक्ष रूवेन रिवलिन से वार्ता करेंगे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू और नेसेट के स्पीकर युली-योएल एडलस्टाइन से मुलाकात करेंगे. आतंकवाद और अनेक क्षेत्रों में सहयोग जैसे विषयों पर बातचीत हो सकती है. संस्कृति, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में एमओयू पर दस्तखत किये जाएंगे.
फलस्तीन का कार्यक्रम
फलस्तीन यात्रा के संबंध में वाधवा ने बताया कि राष्ट्रपति फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास, प्रधानमंत्री रामी हमदल्ला और प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ मुलाकात और बातचीत करेंगे. वह अल कुद्स विश्वविद्यालय में भी संबोधन देंगे जहां उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा. इसके बाद मुखर्जी पूर्वी यरूशलम के अबू दीस में जवाहरलाल नेहरू माध्यमिक विद्यालय का उद्घाटन करेंगे. फलस्तीन के विवाद पर उन्होंने कहा कि भारत फलस्तीन की चिंताओं को सैद्धांतिक समर्थन पर कायम है.