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रोहिंग्या शरणार्थियों का संकट जारी, 3 महीने में समुद्र में डूबने से 200 से ज्यादा की मौत

25 अगस्त से अभी तक रखाइन प्रांत से 6,00,000 से अधिक रोहिंग्या मुसलमान सीमा पार कर बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं. इनमें से अधिकतर सीमा-पार कर निकटवर्ती बांग्लादेश पहुंचे हैं, जहां शरणार्थी शिविर हिंसा पीड़ित बीमार एवं घायल लोगों से भरे हुए हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

म्यांमार से बाहर निकाले जा रहे रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की आफत कम होती नहीं दिख रही है. समुद्री रास्ते बांग्लादेश की तरफ भेजे जा रहे रोहिंग्या लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं. अगस्त महीने से अब तक 200 से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थियों की समुद्र में डूबने से मौत हो चुकी है.

मंगलवार को भी म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर जा रही एक नौका बांग्लोदश तट के पास पलट गई. इस नाव के पलटने से उसमें सवार चार लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि नौका में क्षमता से ज्यादा लोग सवाल थे, जिस वजह से नौका पलट गई.

पुलिस ने बताया कि नौका शामलापुर गांव के पास तट पर पहुंचते ही खराब मौसम के कारण पलट गई. म्यांमार में उत्पन्न हिंसा के बाद अगस्त से करीब हजारों रोहिंग्या शरणार्थी नौका से शामलापुर गांव पहुंचे हैं.

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स्थानीय पुलिस प्रमुख अबुल खैर ने एजेंसी को बताया कि छोटी मछली पकड़ने की नौका में कम से कम 33 लोग सवार थे, जो खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण पलट गई. उन्होंने बताया, 'एक व्यक्ति की मौत मौके पर ही हो गई और छह लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनमें से तीन की मौत हो गई'. उन्होंने बताया कि सभी पीड़ित म्यांमार के रखाइन प्रांत के बुथीडोंग जिले के रोहिंग्या हैं.

25 अगस्त से अभी तक रखाइन प्रांत से 6,00,000 से अधिक रोहिंग्या मुसलमान सीमा पार कर बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं. इनमें से अधिकतर सीमा-पार कर निकटवर्ती बांग्लादेश पहुंचे हैं, जहां शरणार्थी शिविर हिंसा पीड़ित बीमार एवं घायल लोगों से भरे हुए हैं.

वहीं, अन्य लोगों ने समुद्र के खतरनाक रास्ते से यात्रा की और वे मछली पकड़ने वाली जर्जर नौकाओं में सवार होकर बंगाल की खाड़ी में उतर गए और बांग्लादेश तट पहुंच वहां उतरने की जगह तलाशने लगे. अगस्त से अभी तक इस खतरनाक समुद्री मार्ग में करीब 200 लोग डूब चुके हैं.

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