मिडिल ईस्ट में जंग लगातार जारी है और इसका असर अब पूरी दुनिया में दिखाई देने लगा है. आने वाले दिनों में भी यह संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा. इस बीच ईरान की संसद के स्पीकर ने कहा कि देश सीजफायर के पक्ष में नहीं है.
वहीं, ईरान की राजधानी तेहरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताया है. ईरान भी जंग में पीछे हटने को तैयार नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ईरान ने युद्ध के लिए पहले से ही बड़ी तैयारी कर रखी थी?
डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि ईरान कुछ बड़ा करने की तैयारी में था. क्या सच में ईरान ने खुद ही परमाणु बम तैयार कर लिया था? या फिर क्या ईरान ने युद्ध के दौरान लगातार मिसाइल बनाने की भी तैयारी कर रखी थी?
अमेरिकी राष्ट्रपति दावा करते हैं कि ईरान के परमाणु ठिकाने वाली जगह हों या फिर मिसाइल लॉन्चर, इसलिए सबको खत्म कर दिया जा रहा है क्योंकि ईरान बहुत बड़ा हमला कर देता. जिसके बाद रोकना मुश्किल हो जाता.
तेहरान पर इजरायल और अमेरिका के ताबड़ तोड़ हमले इस बात का सबूत है कि अब भी अमेरिका को आशंका है कि पहले ईरान को जो करने से रोका गया है, वो अब भी करने की क्षमता रखता है.
चीन की वजह से ईरान की मिसाइल को ताकत
मिसाइल और मिसाइल लॉन्चर वाली अपनी ताकत को लेकर ईरान का ये आत्मविश्वास क्या चीन की वजह से है? द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की सरकारी कंपनी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स यानी IRISL के 2 जहाज- शब्दीस और बर्जिन चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं.
जिनकी मंजिल ईरान ही होने का दावा है. गाओलान पोर्ट चीन के दक्षिण-पूर्वी तट के झूहाई शहर में मौजूद है. ये केमिकल लोडिंग पोर्ट है, जहां से हथियार और मिसाइल वैगरह बनाने के केमिकल भी लोड होते हैं.
शब्दीस और बर्जिन जहाजों में करीब 20 फीट लंबे बहुत सारे कंटेनर ले जा सकते हैं. इन पर चीन से सोडियम परक्लोरेट केमिकल लदे होने का दावा होता है.
सोडियम परक्लोरेट एक हाई-पावर ऑक्सीडाइजर है. इसका इस्तेमाल अमोनियम परक्लोरेट बनाने के लिए किया जाता है, जिससे मिसाइलों के लिए सॉलिड फ्यूल बनाया जाता है, तो क्या चीन के बंदरगाह से निकले ये जहाज क्या ईरान पहुंच पाएंगे? या फिर इनको भी ईरान के उसी शिप की तरह अमेरिकी पनडुबी डुबो देगी, जैसे पिछले हफ्ते भारत से लौटते ईरानी शिप को डुबो दिया था.