ईरानी-फ्रेंच कार्टूनिस्ट, लेखिका और फिल्ममेकर मार्जान सात्रापी का 56 साल की उम्र में निधन हो गया है. महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली मार्जान को दुनिया भर में उनकी मशहूर ग्राफिक नॉवेल और फिल्म 'पर्सेपोलिस' के लिए जाना जाता है. उनके निधन की जानकारी फ्रांस की राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से दी गई.
राष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मार्जान सात्रापी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके जाने से फ्रांसीसी संस्कृति और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लड़ने वाली एक बड़ी कलाकार को खो दिया गया है. उन्होंने कहा कि मार्जान ने अपने ईरान के बचपन की कहानी को एक ऐसी सार्वभौमिक दास्तान में बदल दिया, जिससे पूरी दुनिया खुद को जोड़ सकी.
पति के निधन के दुख में बीती बाकी जिंदगी
फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्जान सात्रापी अपने पति मैटियास रीपा के निधन के बाद गहरे दुख में थीं. मैटियास स्वीडिश फिल्म प्रोड्यूसर और अभिनेता थे, जिनका करीब एक साल पहले निधन हुआ था. उनके करीबी लोगों का कहना है कि मार्जान इस सदमे से कभी पूरी तरह उबर नहीं पाईं.
फ्रेंच एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स, जिसकी वह सदस्य थीं, ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया. संस्था ने उन्हें सिनेमा और फिल्म शिक्षा की मजबूत समर्थक बताया. इसी साल उन्होंने एक फाउंडेशन भी शुरू किया था, जिसका मकसद दुनियाभर के छात्रों को पेरिस में फिल्म की पढ़ाई करने में मदद करना था.
मार्जान सात्रापी को सबसे ज्यादा पहचान उनकी आत्मकथात्मक ग्राफिक नॉवेल और एनिमेटेड फिल्म 'पर्सेपोलिस' से मिली. यह कहानी ईरान की इस्लामिक क्रांति के दौर में उनके बचपन और युवावस्था पर आधारित थी. साल 2007 में इस फिल्म ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में फिल्म क्रिटिक्स ग्रैंड प्रिक्स अवॉर्ड जीता था. इसके अलावा इसे 2008 के ऑस्कर अवॉर्ड्स में बेस्ट एनिमेटेड फीचर कैटेगरी में नॉमिनेट भी किया गया था.
एक इंटरव्यू में मार्जान ने कहा था कि 'पर्सेपोलिस' के जरिए वह दुनिया को बताना चाहती थीं कि ईरानी लोग भी बाकी दुनिया की तरह ही सपने देखते हैं, प्यार करते हैं और उम्मीदों के साथ जीते हैं. हालांकि फिल्म को लेकर उस समय ईरानी सरकार ने विरोध भी जताया था.
कौन थीं मार्जान?
मार्जान सात्रापी का जन्म 22 नवंबर 1969 को ईरान के रश्त शहर में हुआ था. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश में बढ़ते कट्टरवाद को देखते हुए उनके माता-पिता ने 1983 में उन्हें पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रिया भेज दिया. लेकिन परिवार से दूर रहना उनके लिए आसान नहीं था और 1989 में वह वापस ईरान लौट आईं.
तेहरान यूनिवर्सिटी से विजुअल कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1994 में फ्रांस का रुख किया. पहले उन्होंने स्ट्रासबर्ग में पढ़ाई की और बाद में पेरिस में बस गईं.
'पर्सेपोलिस' के अलावा उनकी अन्य चर्चित किताबों में 'एम्ब्रॉयडरीज' और 'चिकन विद प्लम्स' शामिल हैं. 'चिकन विद प्लम्स' पर बाद में फिल्म भी बनाई गई. बतौर डायरेक्टर उन्होंने 'द गैंग ऑफ जोटास' और 'रेडियोएक्टिव' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. 'रेडियोएक्टिव' मशहूर वैज्ञानिक मैरी क्यूरी की जिंदगी पर आधारित थी.
हक की लड़ाई लड़ना जानती थीं मार्जान
मार्जान सात्रापी महिलाओं के अधिकारों और लोकतंत्र की लड़ाई में भी सक्रिय रहीं. साल 2023 में उन्होंने कलाकारों और शिक्षाविदों के साथ मिलकर 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम' नाम की किताब तैयार की थी. यह किताब महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में हुए महिला आंदोलनों और मानवाधिकारों के मुद्दों पर आधारित थी.
साल 2024 में उन्हें फ्रेंच एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स का सदस्य चुना गया. इसी साल उन्हें फ्रांस के सर्वोच्च सम्मान 'लीजन ऑफ ऑनर' से नवाजने की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. उनका कहना था कि फ्रांस को ईरान में लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रहे लोगों का और मजबूती से समर्थन करना चाहिए. 2024 में उन्हें स्पेन के प्रतिष्ठित 'प्रिंसेस ऑफ ऑस्टुरियास अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया था.
मार्जान सात्रापी भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी किताबें, फिल्में और महिलाओं की आजादी के लिए उठाई गई उनकी आवाज हमेशा याद की जाएगी.