उत्तर कोरिया के सैन्य शासक किम जोंग उन ने एक बार फिर युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि देश के आसपास की सैन्य और राजनीतिक स्थिति स्थिर नहीं हैं. यही वजह है कि हमें युद्ध के लिए अब पहले से अधिक तैयार रहना होगा.
उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए के मुताबिक, किम जोंग उन ने देश की मुख्य सैन्य यूनिवर्सिटी का दौरा किया. उन्होंने इससे पहले इस महीने की शुरुआत में एक नए हाइपरसोनिक इंटरमीडिएट बैलिस्टिक मिसाइल का टेस्ट लॉन्च किया था. इसे लेकर विश्लेषकों ने कहा था कि इस बैलिस्टिक मिसाइल से उत्तर कोरिय की मिसाइलों की तैनाती की क्षमता और मजबूत होगी.
बता दें कि उत्तर कोरिया दरअसल दक्षिण कोरिया और अमेरिका पर सैन्य तनाव को बढ़ाने का आरोप बनाता रहा है. बता दें कि कुछ समय पहले ही नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने परमाणु हथियारों को लेकर कहा था कि अगर दुश्मन ने उकसाया तो हम परमाणु हमला करने से भी नहीं हिचकिचाएंगे. किम ने साफ निर्देश दिए थे कि अगर दुश्मन परमाणु हमले की धमकी देता है या उकसाता है तो हम भी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से बिल्कुल नहीं हिचकिचाएंगे. इसके बाद उन्होंने नॉर्थ कोरिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासोंग-18 (Hwaong-18) को लॉन्च किया था.
पर क्या सच में परमाणु हमला कर सकते हैं किम?
नॉर्थ कोरिया दावा करता है कि वो जंग के खिलाफ है और उसने अपने परमाणु हथियार सेल्फ-डिफेंस के लिए रखे हैं. उसका कहना है कि अमेरिका, साउथ कोरिया और जापान की 'शत्रुतापूर्ण' नीतियों का सामना करने के लिए ये जरूरी हैं.
पिछले साल मिलिट्री परेड के दौरान किम ने कहा था कि उन्होंने अपनी न्यूक्लियर फोर्स को देश के हितों का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ हमले करने का काम सौंप दिया है.
पिछले साल ही सितंबर में नॉर्थ कोरिया ने अपने एक कानून में संशोधन किया था, जो संभावित हमले के खतरे को देखते हुए पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने का अधिकार देता है.
कानून के मुताबिक, अगर नॉर्थ कोरिया पर परमाणु हमले का खतरा हो, उसकी लीडरशिप या लोगों की जान का खतरा हो या फिर कोई देश हमला करने की तैयारी कर रहा हो, तो ऐसी स्थिति में परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया जा सकता है.
इस कानून में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर सारे फैसले लेने का अधिकार किम जोंग को दिया गया है. लेकिन अगर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को खतरा महसूस होता है तो मिसाइल 'ऑटोमैटिकली' ही लॉन्च हो जाएगी. यानी, किम जोंग की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.
इस साल सितंबर में ही एक और संवैधानिक संशोधन हुआ था, जो अमेरिकी उकसावों को रोकने के लिए परमाणु हथियारों के उत्पादन में तेजी लाने का अधिकार देता है.
जुलाई में नॉर्थ कोरिया के रक्षा मंत्री कांग सुन ने नाम ने कहा था कि साउथ कोरिया में अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर्स, बॉम्बर्स और मिसाइल सबमरीन की तैनाती से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा बढ़ गया है.
कितना बड़ा है परमाणु हथियारों का जखीरा?
ऐसा मानना है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के जखीरे में 30 से 40 हथियार होंगे. इसके अलावा वो हर साल 6 से 7 हथियार और बना सकता है.
साल 2003 में उत्तर कोरिया परमाणु अप्रसार संधि से पीछे हट गया था. और उसके बाद 2006 से लेकर 2017 के बीच उसने छह बार परमाणु हथियारों की टेस्टिंग की है. आखिरी बार उसने 2017 में परीक्षण किया था.
साल 2017 में उत्तर कोरिया ने जिस परमाणु हथियार का परीक्षण किया था, वो असल में हाइड्रोजन बम था. दावा है कि ये बाकी परमाणु बम की तुलना में कहीं ज्यादा शक्तिशाली है. इतना ही नहीं, ऐसा भी मानना है कि उस समय जिस परमाणु बम की टेस्टिंग हुई थी, वो 100 से 370 किलोटन का होगा. 100 किलोटन का परमाणु बम हिरोशिमा पर गिरे बम से छह गुना ज्यादा ताकतवर है.
इसी साल मार्च में किम जोंग ने न्यूक्लियर वेपन इंस्टीट्यूट का दौरा किया था. ये वो जगह है जहां उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार रखे हैं. इसकी तस्वीरें उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने जारी की थीं.
चिंता की बात ये भी है कि उत्तर कोरिया ने छोटे-छोटे परमाणु हथियार भी बनाए हैं, जिन्हें कम दूरी की मिसाइलों में तैनात किया जा सकता है.
2018 में उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि उसने पुंग्ये-री साइट को बंद कर दिया है. ये वही साइट थी जहां उसने छह बार परमाणु परीक्षण किया था. हालांकि, पिछले साल इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा था कि पुंग्ये-री साइट को दोबारा खोल दिया गया है.