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पुतिन से क्यों मिलना चाहता था एपस्टीन, अपना रहा था नई-नई तरकीबें, डॉक्यूमेंट्स में बड़ा खुलासा

जेफरी एपस्टीन की बातचीत ऐसे समय पर प्रमुख रूसी हस्तियों से हो रही थी, जब अमेरिका और रूस के रिश्ते बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे थे, खासतौर पर उस दौर के बाद जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस पर हस्तक्षेप का आरोप लगाया था. इस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत हुई थी.

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पुतिन से क्यों मिलना चाहते थे एपस्टीन (Photo: Social Media)
पुतिन से क्यों मिलना चाहते थे एपस्टीन (Photo: Social Media)

जेफरी एपस्टीन के काले कारनामे दुनियाभर की सुर्खियां बने हुए हैं. नाबालिग बच्चियों के शोषण से लेकर सेक्स ट्रैफिकिंग तक का एपस्टीन का काला चिट्ठा अब दुनिया के सामने है. अब पता चला है कि जेफरी की रूस में बेइंतहा दिलचस्पी थी और वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलना चाहता था.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2018 की बात है. सालभर पहले ही संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विटाली चुरकिन की अचानक मौत हो गई थी. अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की ओर से जारी किए गए ताजा डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, चुरकिन वह शख्स थे जिससे एपस्टीन न्यूयॉर्क में नियमित तौर पर मिलता था. न्यूयॉर्क की एक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म में एपस्टीन ने चुरकिन के बेटे मैक्सिम की नौकरी लगवाने की पेशकश भी की थी.

लेकिन चुरकिन की मौत के बाद एपस्टीन को किसी और रूसी अधिकारी से संपर्क करना था और वो शख्स थे- रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव. एपस्टीन ने 24 जून 2018 को नॉर्वे के नेता थोर्ब्योन जागलैंड को ईमेल किया. वह उस समय यूरोप काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल थे. इस ईमेल में एपस्टीन ने कहा कि मुझे लगता है कि आपको पुतिन को सुझाव देना चाहिए कि लावरोव मुझसे बात करें. इससे फायदा होगा. चुरकिन ऐसा कर सकते थे लेकिन उनका इंतकाल हो गया. 

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इस पर जागलैंड ने जवाब दिया कि वह अगले सोमवार को लावरोव के एक सहायक से मिलने वाले हैं और इस बात को आगे बढ़ा देंगे. इसके बाद एपस्टीन ने कहा कि चुरकिन शानदार शख्स थे. हमारी बातचीत के बाद वह ट्रंप को समझने लगे थे. 

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जेफरी एपस्टीन

हालांकि, एपस्टीन की रूस और पूर्वी यूरोप से मॉडल्स की तलाश में दिलचस्पी पहले ही सामने आ चुकी थी, लेकिन दस्तावेजों की यह नई खेप उसके रूसी सत्ता के शीर्ष स्तर तक पहुंचने के प्रयासों पर नई रोशनी डालती है. इनमें राष्ट्रपति पुतिन भी शामिल हैं, जिनसे मिलने या बात करने की कोशिश एपस्टीन ने कई बार की.

अंतरराष्ट्रीय नेताओं और रूसी अधिकारियों के साथ एपस्टीन की बातचीत से जुड़े ये नए दस्तावेज सामने आने के बाद उसके इरादों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं.

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इस सप्ताह कैबिनेट बैठक में कहा कि उनका देश अब एपस्टीन के रूसी खुफिया एजेंसियों से संभावित संबंधों की जांच शुरू करेगा. टस्क ने कहा कि दुनियाभर की मीडिया में लगातार सामने आ रही नई जानकारियां, नए सुराग और टिप्पणियां इस संदेह की ओर इशारा कर रही हैं कि इस पीडोफाइल स्कैंडल में रूस की खुफिया एजेंसियों का गठजोड़ था.

हालांकि, क्रेमलिन ने एपस्टीन के रूस के लिए जासूसी करने के दावों को सिरे से खारिज किया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ये थ्योरी कि रूस की खुफियां एजेंसियां एप्सटीन को कंट्रोल कर रही हैं, इन्हें गंभीरता से नहीं लेना चाहिए. 

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डॉयूमेंट्स के मुताबिक, नौ मई 2013 को जेफरी एपस्टीन ने इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक को एक लेटर लिखा था कि जागलैंड 20 मई को सोची में पुतिन से मिलने वाले हैं. जागलैंड ने उनसे पूछा है कि क्या एपस्टीन रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलने के लिए उपलब्ध रहेंगे ताकि वह यह समझा सकें कि रूस पश्चिमी निवेश को आकर्षित करने के लिए सौदें किस तरह से कर सकता है.

एपस्टीन ने बराक को भेजे ईमेल में कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं पुतिन से कभी नहीं मिला. कुछ दिन बाद 14 मई 2013 को जागलैंड ने एपस्टीन को बताया कि वह एपस्टीन की ओर से पुतिन को एक मैसेज देना चाहते हैं कि एपस्टीन उनके लिए काम का शख्स साबित हो सकता है. जागलैंड ने एपस्टी को लिखे ईमेल में लिखा कि मेरा एक दोस्त है जो जरूरी कदम उठाने में आपकी मदद कर सकता है और यह पूछ सकता है कि क्या आपसे मिलना उनके लिए दिलचस्प होगा.

इसके जवाब में एपस्टीन ने कहा कि वह कुछ बड़ा काम करने की  स्थिति में हैं, ठीक वैसे ही जैसे स्पुतनिक ने अंतरिक्ष की रेस के लिए किया था. आप उनसे कह सकते हैं कि आप और मैं करीबी हैं और मैं बिल गेट्स को सलाह देता हूं. यह गोपनीय है. मैं उनसे मिलने को तैयार हूं, लेकिन कम से कम दो से तीन घंटे के लिए ,इससे कम नहीं.

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बिल गेट्स ने अपने प्रवक्ता के जरिये सार्वजनिक रूप से कहा है कि एपस्टीन से मिलना उनकी सबसे बड़ी गलती थी.  लेकिन 21 मई 2013 को बराक को भेजे एक और ईमेल में एपस्टीन ने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि उसने सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक रूसी आर्थिक सम्मेलन के दौरान पुतिन से मिलने के अनुरोध को ठुकरा दिया था. एपस्टीन ने लिखा कि अगर पुतिन उनसे मिलना चाहते हैं, तो उन्हें वास्तविक समय और पूरी निजता अलग रखनी होगी. (हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि क्या पुतिन ने वाकई कभी एपस्टीन से मिलने का अनुरोध किया था)

इसके एक साल बाद जुलाई 2014 में एपस्टीन को भेजा गया एक ईमेल इस ओर इशारा करता है कि उनकी पुतिन के साथ एक तय बैठक होने वाली थी और उन्होंने लिंक्डइन के संस्थापक को भी उसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया था. उस वक्त एमआईटी मीडिया लैब के निदेशक जॉय इटो ने एपस्टीन को लिखा था कि मैं रीड को पुतिन से मिलने के लिए अपना कार्यक्रम बदलने के लिए मना नहीं पाया.

जॉय इटो इससे पहले एपस्टीन के साथ अपने संबंधों और एमआईटी मीडिया लैब के लिए उससे फंड स्वीकार करने को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं.

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एपस्टीन की बातचीत ऐसे समय पर प्रमुख रूसी हस्तियों से हो रही थी, जब अमेरिका और रूस के रिश्ते बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे थे, खासतौर पर उस दौर के बाद जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस पर हस्तक्षेप का आरोप लगाया था. इस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत हुई थी.

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नॉर्वे के नेता थोर्ब्योन जागलैंड

जून 2018 में जागलैंड ने एपस्टीन को ईमेल कर बताया कि वह पेरिस स्थित उनके आवास पर ठहरने की उम्मीद कर रहे हैं और वे मॉस्को से आ रहे होंगे, जहां उनकी योजना राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव और उस समय रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव से मिलने की थी.

इसके जवाब में एपस्टीन ने लिखा कि मुझे बस इस बात का अफसोस है कि मैं आपके साथ रूसियों से मिलने के लिए वहां नहीं हूं. नॉर्वे की एक जांच एजेंसी ने गुरुवार को घोषणा की कि एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर जागलैंड के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है. एक बयान में जागलैंड के वकील एंडर्स ब्रॉसवीट ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करेगा. यागलैंड ने एपस्टीन से जुड़े किसी भी मामले में गलत काम करने से इनकार किया है.

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डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि एपस्टीन की कम से कम एक ऐसे रूसी व्यक्ति से करीबी रिश्ते थे, जिसके FSB से संबंध थे. FSB दरअसल रूस की मुख्य सिक्योरिटी सर्विस और KGB की उत्तराधिकारी है.

2015 में सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने के बाद इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक ने एपस्टीन को बताया कि उनकी कई रूसी अधिकारियों से मुलाकात हुई थी. इनमें विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव, रूस के केंद्रीय बैंक की प्रमुख एल्विरा नबीउलीना और कई बड़े रूसी बैंकों के प्रमुख शामिल थे. 

बराक के कार्यालय ने जारी बयान में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम की यात्राएं हमेशा पुतिन कार्यालय के निमंत्रण पर हुई थीं. बयान में कहा गया कि एपस्टीन को रूस के मामलों में दिलचस्पी थी और वह पुतिन से मिलना चाहता था, लेकिन बराक ने कभी भी एपस्टीन का नाम क्रेमलिन के सामने नहीं रखा. हालांकि उन्होंने कभी-कभार एपस्टीन के साथ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की.

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सेरगेई बेल्याकोव

दस्तावेजों से पता लता है कि एपस्टीन का रिश्ता सिर्फ सामान्य राजनीतिक रुचि से आगे था. उसने रूस के कुछ शीर्ष अधिकारियों और व्यापारिक हलकों से सीधी संपर्क और बातचीत की कोशिश की. उनमें से एक प्रमुख नाम सेरगेई बेल्याकोव है, जो रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) अकादमी से स्नातक और बाद में रूस के उप आर्थिक मंत्री रहे.

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2016 में बेल्याकोव और एपस्टीन के बीच भेजे गए ईमेल से पता चलता है कि उन्होंने रूस के रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) यानी देश के सॉवरेन वेल्थ फंड में नई जिम्मेदारी संभाली है और वे रूसी परियोजनाओं के लिए निवेश लाना चाहते हैं. एक अन्य ईमेल में एपस्टीन ने बेल्याकोव से कहा मैं आपके लिए उपयोगी साबित होने वाला हर काम करने को तैयार हूं.

एपस्टीन ने कम से कम एक बार बेल्याकोव से मदद भी मांगी थी. 2015 के एक पत्राचार में एपस्टीन ने बेल्याकोव को लिखा कि रूस की एक लड़की न्यूयॉर्क से ताकतवर कारोबारियों को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही है. इसके बाद एपस्टीन ने बेल्याकोव से पूछा कि यह रूसी महिला न्यूयॉर्क कब पहुंची और किस होटल में ठहरी हुई है.

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