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इराक को मिला नया राष्ट्रपति, युद्ध और आर्थिक संकट के बीच निज़ार अमीदी संभालेंगे कमान

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से चरमराई अर्थव्यवस्था और सुरक्षा चुनौतियों के बीच अमीदी का चुनाव देश के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है.

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निजार अमीदी इराक के दो पूर्व राष्ट्रपतियों के साथ काम कर चुके हैं. (Photo: X)
निजार अमीदी इराक के दो पूर्व राष्ट्रपतियों के साथ काम कर चुके हैं. (Photo: X)

इराक की संसद ने शनिवार को हुई वोटिंग में 'पैट्रियटिक यूनियन ऑफ कुर्दिस्तान' पार्टी के नेता निज़ार अमीदी को देश का नया राष्ट्रपति चुना है. यह चुनाव संसदीय चुनाव के पांच महीने बाद हुआ, जिसमें किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. उत्तरी इराक के दोहुक प्रांत में जन्मे इंजीनियर अमीदी ने दूसरे दौर के मतदान में 227 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. 

अमीदी ने अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार फुआद हुसैन और मुथन्ना अमीन नादेर को भारी मतों से हराया. यह मतदान संवैधानिक समय सीमा के दो महीने बाद हुआ है, जिसमें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अब अगले 15 दिनों के अंदर सबसे बड़े संसदीय गुट के नामांकित व्यक्ति को सरकार बनाने और प्रधानमंत्री पद संभालने का न्योता देंगे. 

मौजूदा वक्त में ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण तेल निर्यात ठप होने और बुनियादी ढांचे पर हमलों से इराक आर्थिक संकट से जूझ रहा है.

युद्ध और आर्थिक तबाही के बीच कमान

निज़ार अमीदी का चुनाव ऐसे संवेदनशील वक्त में हुआ है, जब इराक, ईरान पर अमेरिका और इजरायल के युद्ध के भीषण नतीजों को झेल रहा है. ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके जवाब में अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक में इराकी सैनिक भी मारे गए हैं. इस तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' के बंद होने से इराक का तेल निर्यात रुक गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.

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पेशे से इंजीनियर निज़ार अमीदी राजनीति के पुराने खिलाड़ी रहे हैं. वे इससे पहले इराक के दो पूर्व राष्ट्रपतियों, जलाल तालाबानी और फुआद मासूम के सहायक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. अमीदी ने पहले दौर में ही 208 वोट पाकर अपनी मजबूत स्थिति स्पष्ट कर दी थी, जिसके बाद दूसरे दौर के साधारण बहुमत के नियम ने उनकी जीत पर अंतिम मुहर लगा दी.

प्रधानमंत्री पद पर सस्पेंस

इराक में परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति का पद कुर्द, प्रधानमंत्री का शिया और स्पीकर का पद सुन्नी समुदाय के पास रहता है. अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री के नामांकन पर टिकी हैं. ईरान समर्थक 'शिया कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क' ने नूरी अल-मलिकी का नाम आगे किया है, जिसका वॉशिंगटन विरोध कर रहा है. अब राष्ट्रपति को तय करना है कि क्या वे अल-मलिकी को सरकार बनाने का मौका देंगे या कोई नया चेहरा सामने आएगा.

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